रूस का यूक्रेन पर भयंकर हमला, 574 ड्रोन और 40 मिसाइलें दागीं, अमेरिकी कंपनी की फैक्ट्री निशाना, शांति वार्ता पर सवाल।
International: रूस ने यूक्रेन पर एक और बड़ा हमला किया। इस हमले में रूस ने 574 ड्रोन और 40 मिसाइलें दागीं, जिसे यूक्रेन की वायुसेना ने इस साल का सबसे बड़ा हवाई
रूस ने यूक्रेन पर एक और बड़ा हमला किया। इस हमले में रूस ने 574 ड्रोन और 40 मिसाइलें दागीं, जिसे यूक्रेन की वायुसेना ने इस साल का सबसे बड़ा हवाई हमला बताया। इस हमले का मुख्य निशाना पश्चिमी यूक्रेन के जकारपट्टिया क्षेत्र में स्थित अमेरिकी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी फ्लेक्स लिमिटेड की फैक्ट्री थी। इस कारखाने में लगभग 600 कर्मचारी काम करते थे, लेकिन समय रहते उन्हें सुरक्षित शेल्टर में भेज दिया गया, जिससे बड़ी जनहानि टल गई। फिर भी, हमले में फैक्ट्री का एक-तिहाई हिस्सा जलकर नष्ट हो गया। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने इस हमले की कड़ी निंदा की और इसे अमेरिकी निवेश और एक साधारण नागरिक उद्यम पर हमला बताया। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका, रूस और यूक्रेन के बीच शांति वार्ता की कोशिशें तेज हो रही थीं।
फ्लेक्स लिमिटेड की यह फैक्ट्री घरेलू उपकरण जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान बनाती थी और इसका सैन्य उपकरणों से कोई संबंध नहीं था। जेलेंस्की ने अपने बयान में कहा कि रूस ने जानबूझकर इस नागरिक उद्यम को निशाना बनाया, जिससे मास्को की शांति वार्ता में गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, हमले में ल्विव शहर में 26 आवासीय इमारतें, एक किंडरगार्टन और एक प्रशासनिक भवन को भी नुकसान पहुंचा। इस हमले में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हुई और 15 अन्य घायल हुए। यूक्रेनी वायुसेना ने दावा किया कि उन्होंने ज्यादातर ड्रोन और मिसाइलों को नष्ट कर दिया, लेकिन कुछ मिसाइलें सुरक्षा कवच को भेदने में सफल रहीं। यह हमला पश्चिमी यूक्रेन के उन क्षेत्रों पर केंद्रित था, जहां यूक्रेन के पश्चिमी सहयोगी देशों से सैन्य और मानवीय सहायता पहुंचती है। यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबिहा ने कहा कि रूस ने इस हमले में जानबूझकर एक प्रमुख अमेरिकी इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माता को निशाना बनाया। हालांकि, फ्लेक्स लिमिटेड ने इस हमले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हमले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें फैक्ट्री से भारी धुआं उठता दिखाई दे रहा है।
इस हमले का समय बेहद महत्वपूर्ण है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अलास्का में और जेलेंस्की के साथ व्हाइट हाउस में मुलाकात की थी। इन बैठकों का मकसद रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के लिए शांति वार्ता की दिशा में काम करना था। ट्रंप ने जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन को यूक्रेन के लिए सुरक्षा गारंटी तैयार करने का निर्देश भी दिया था। इसके बावजूद, रूस का यह ताजा हमला शांति की संभावनाओं पर एक बड़ा झटका है।
जेलेंस्की ने अपने टेलीग्राम पोस्ट में कहा कि यह हमला रूस की मंशा को दर्शाता है कि वह शांति वार्ता में गंभीर नहीं है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से रूस पर कड़े प्रतिबंध और टैरिफ लगाने की मांग की। जेलेंस्की ने यह भी बताया कि वह अगले सप्ताह पुतिन के साथ 2022 के बाद पहली बार सीधी बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन रूस के ताजा हमलों ने इस प्रक्रिया को जटिल बना दिया है। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इस बीच पश्चिमी देशों को चेतावनी दी कि मास्को की भागीदारी के बिना यूक्रेन की सुरक्षा समस्याओं को हल करने की कोशिश नाकाम रहेगी। उन्होंने कहा कि रूस को यूक्रेन के लिए सुरक्षा गारंटी पर वीटो का अधिकार होना चाहिए। यह बयान रूस के कड़े रुख को दर्शाता है, जो शांति वार्ता को और मुश्किल बना सकता है। यूक्रेन और रूस के बीच यह युद्ध 2022 से जारी है, जब रूस ने यूक्रेन पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण शुरू किया था। इस युद्ध में अब तक लाखों सैनिक और हजारों नागरिक हताहत हुए हैं। रूस ने क्रीमिया और डोनबास के कुछ हिस्सों पर कब्जा कर लिया है, जबकि यूक्रेन ने पश्चिमी देशों के समर्थन से अपनी रक्षा की है। हाल के महीनों में दोनों पक्षों ने ड्रोन और मिसाइल हमलों को तेज किया है। यूक्रेन ने भी रूस के सैन्य ठिकानों पर कई बड़े ड्रोन हमले किए, जिनमें जून 2025 में रूस के 40 से ज्यादा सैन्य विमानों को नष्ट करने का दावा शामिल है।
इस युद्ध ने न केवल यूक्रेन और रूस को प्रभावित किया है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजारों पर भी गहरा असर डाला है। भारत जैसे देश, जो रूस से तेल आयात करते हैं, भी इस युद्ध के परिणामों से प्रभावित हुए हैं। हाल ही में ट्रंप ने रूस से तेल खरीदने के लिए भारत पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, जिसे उन्होंने युद्ध को खत्म करने की रणनीति का हिस्सा बताया। हालांकि, भारत ने साफ किया कि वह रूसी तेल आयात जारी रखेगा। यह हमला और इसके बाद की प्रतिक्रियाएं दर्शाती हैं कि रूस-यूक्रेन युद्ध का समाधान अभी दूर है। जेलेंस्की ने अपने बयानों में बार-बार जोर दिया है कि यूक्रेन एक न्यायपूर्ण और टिकाऊ शांति चाहता है, जिसमें उसकी क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा की गारंटी हो। दूसरी ओर, पुतिन ने अपनी शर्तें रखी हैं, जिनमें यूक्रेन का नाटो में शामिल न होना और रूस के कब्जे वाले क्षेत्रों को मान्यता देना शामिल है। ये शर्तें यूक्रेन और उसके पश्चिमी सहयोगियों के लिए स्वीकार करना मुश्किल है। अमेरिका और यूरोपीय देश इस युद्ध को खत्म करने के लिए कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं, लेकिन रूस के ताजा हमलों ने इन कोशिशों को कमजोर किया है। फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने कहा कि रूस पर भरोसा नहीं किया जा सकता, जबकि नाटो देशों की एक बैठक में यूक्रेन को और हथियार देने पर चर्चा हो रही है। इस बीच, भारत की भूमिका भी इस युद्ध के समाधान में उभर रही है। भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने हाल ही में रूस और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की कोशिश की थी, और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पुतिन ने फोन कर इस मुद्दे पर चर्चा की थी।
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