देश- विदेश: कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज ले रहा पाकिस्तान, चीन के पैर पकड़ने को मजबूर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री।
पाकिस्तान, जो लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा है, एक बार फिर कर्ज के जाल में और गहराई तक फंसता दिख रहा है। 29 मई 2025 को...
देश- विदेश: पाकिस्तान, जो लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझ रहा है, एक बार फिर कर्ज के जाल में और गहराई तक फंसता दिख रहा है। 29 मई 2025 को, खबरें सामने आईं कि शहबाज शरीफ सरकार पुराने कर्ज को चुकाने के लिए नए कर्ज लेने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। विशेष रूप से, पाकिस्तान अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए चीन की ओर बार-बार रुख कर रहा है। यह स्थिति तब और जटिल हो जाती है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण संबंध और युद्ध की आशंकाएं चर्चा में हैं।
शहबाज शरीफ सरकार के मंत्रियों के लगातार चीन दौरे और कर्ज के लिए अनुरोध इस बात का संकेत हैं कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में है। यह लेख पाकिस्तान की इस कर्ज की स्थिति, शहबाज शरीफ सरकार की नीतियों, और चीन के साथ उसके संबंधों पर प्रकाश डालता है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था लंबे समय से अस्थिरता का शिकार रही है। उच्च मुद्रास्फीति, कम विदेशी मुद्रा भंडार, और बढ़ते कर्ज ने देश को आर्थिक संकट की गहरी खाई में धकेल दिया है। 2025 तक, पाकिस्तान का कुल बाहरी कर्ज 128 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है, जिसमें से लगभग 30 बिलियन डॉलर चीन को बकाया है।
इसके अलावा, देश का कुल कर्ज (आंतरिक और बाहरी) 63 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गया है, जो जीडीपी का 74% से अधिक है। विदेशी मुद्रा भंडार केवल दो महीने के आयात को कवर करने के लिए पर्याप्त हैं, जो कि 9 बिलियन डॉलर के आसपास है। पाकिस्तानी रुपये की कीमत में भारी गिरावट आई है। 2017 में जहां एक अमेरिकी डॉलर 100 पाकिस्तानी रुपये के बराबर था, वहीं 2025 में यह 330 रुपये तक पहुंच गया। मुद्रास्फीति की दर 37% से अधिक हो गई है, जिसने आम लोगों के लिए जीवन को और कठिन बना दिया है। इसके अलावा, 2022 की विनाशकारी बाढ़ और यूक्रेन युद्ध के कारण बढ़ी खाद्य और ईंधन की कीमतों ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को और कमजोर किया है।
- कर्ज चुकाने के लिए नया कर्ज
पाकिस्तान की वित्तीय रणनीति का एक प्रमुख हिस्सा पुराने कर्ज को चुकाने के लिए नए कर्ज लेना रहा है। केंद्र सरकार ने हाल ही में विभिन्न स्रोतों से नए कर्ज लेने की योजना बनाई है, जिसमें चीन का औद्योगिक और वाणिज्यिक बैंक (ICBC) से 1.1 बिलियन डॉलर, स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक से 500 मिलियन डॉलर, और दुबई इस्लामिक बैंक से अतिरिक्त धनराशि शामिल है। यह रणनीति अल्पकालिक राहत तो प्रदान करती है, लेकिन यह देश को कर्ज के गहरे चक्र में धकेल रही है।
जून 2025 में, पाकिस्तान को 1 बिलियन डॉलर की चीनी सेफ डिपॉजिट और 1.4 बिलियन डॉलर की चीनी वाणिज्यिक ऋण की परिपक्वता का सामना करना है। पाकिस्तानी अधिकारी इन ऋणों को रोलओवर करने या पुनर्वित्त करने के लिए चीन से बातचीत कर रहे हैं। इसके अलावा, अगले वित्तीय वर्ष में पाकिस्तान को 25 बिलियन डॉलर की भारी कर्ज अदायगी करनी है, जिसके लिए देश को और अधिक उधार लेना पड़ सकता है।
- शहबाज शरीफ सरकार की नीतियां
शहबाज शरीफ की सरकार, जो अप्रैल 2022 में सत्ता में आई, ने आर्थिक स्थिरता लाने के लिए कई कदम उठाए हैं, लेकिन ये प्रयास पर्याप्त नहीं साबित हुए हैं। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से 7 बिलियन डॉलर के नए ऋण के लिए बातचीत की, जिसकी पहली किश्त 1.1 बिलियन डॉलर के रूप में सितंबर 2024 में प्राप्त हुई। इस ऋण के लिए, IMF ने सख्त शर्तें लगाईं, जिसमें कर वृद्धि, ऊर्जा सब्सिडी हटाना, और निजीकरण जैसे सुधार शामिल हैं।
शहबाज शरीफ ने दावा किया है कि देश अब डिफॉल्ट के जोखिम से बाहर है, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह केवल अस्थायी राहत है। IMF ने चेतावनी दी है कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था अभी भी कमजोर है, और गवर्नेंस की कमियां, निवेश की कमी, और संकीर्ण कर आधार जैसी संरचनात्मक समस्याएं बनी हुई हैं। इसके अलावा, IMF ने पाकिस्तान से चीनी ऋणों का खुलासा करने और इनका उपयोग IMF ऋणों को चुकाने के लिए न करने की शर्त रखी है।
- चीन के साथ संबंध
पाकिस्तान और चीन के बीच लंबे समय से "सभी मौसम में रणनीतिक सहयोगी" संबंध रहे हैं। चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC), जो 2015 में शुरू हुआ, इस साझेदारी का एक प्रमुख हिस्सा है। CPEC के तहत, चीन ने पाकिस्तान में 65 बिलियन डॉलर से अधिक के बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निवेश किया है, जिसमें ग्वादर बंदरगाह, बिजली संयंत्र, और सड़क नेटवर्क शामिल हैं। हालांकि, इन परियोजनाओं ने पाकिस्तान की कर्ज की स्थिति को और जटिल किया है।
2022 तक, पाकिस्तान पर चीन का 26.6 बिलियन डॉलर का कर्ज था, जो विश्व में किसी भी देश पर चीन के सबसे अधिक कर्ज का आंकड़ा है। ये ऋण 3.7% की ब्याज दर पर दिए गए हैं, जो बहुपक्षीय उधारदाताओं की तुलना में अधिक है। इसके अलावा, CPEC परियोजनाओं की लागत अन्य समान परियोजनाओं की तुलना में अधिक रही है, और पाकिस्तान की परियोजनाओं को समय पर पूरा करने की कमजोर क्षमता ने इन ऋणों को चुकाने में और कठिनाई पैदा की है। चीन ने हाल के वर्षों में कई बार पाकिस्तान के कर्ज को रोलओवर किया है, जिसमें 2023 में 2.4 बिलियन डॉलर और 2024 में 2 बिलियन डॉलर शामिल हैं।
हाल ही में, शहबाज शरीफ ने चीनी सरकार को पत्र लिखकर 12 बिलियन डॉलर से अधिक के कर्ज को तीन से पांच साल के लिए रोलओवर करने का अनुरोध किया है। इसके अलावा, पाकिस्तान ने आयातित कोयले पर आधारित बिजली परियोजनाओं को स्थानीय कोयले में बदलने और 15 बिलियन डॉलर से अधिक की ऊर्जा क्षेत्र की देनदारियों को पुनर्गठन करने की मांग की है। हालांकि, चीन और पाकिस्तान के बीच संबंधों में कुछ तनाव भी दिखाई दे रहा है। बीजिंग पाकिस्तान की कर्ज चुकाने की अक्षमता, चीनी कामगारों की सुरक्षा, और CPEC की दूसरी चरण की प्रगति में देरी से नाराज है। चीनी नागरिकों पर हाल के आतंकी हमलों ने बीजिंग की चिंताओं को और बढ़ा दिया है, जिसके कारण चीन नई वित्तीय प्रतिबद्धताओं में हिचक रहा है।
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पाकिस्तान की कर्ज की स्थिति और चीन पर बढ़ती निर्भरता कई चुनौतियां पेश करती है। पहला, उच्च ब्याज दरों और छोटी अवधि के चीनी ऋण देश की चुकाने की क्षमता से अधिक हैं। दूसरा, IMF और अन्य पश्चिमी उधारदाताओं की सख्त शर्तें पाकिस्तान को सुधारों के लिए मजबूर कर रही हैं, जो राजनीतिक रूप से अलोकप्रिय हैं। तीसरा, भारत और अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव और युद्ध की आशंकाएं पाकिस्तान की आर्थिक और कूटनीतिक स्थिति को और जटिल कर रही हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान को अपनी अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के लिए संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है, जैसे कि कर आधार को बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना, और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाना। हालांकि, शहबाज शरीफ सरकार के लिए इन सुधारों को लागू करना आसान नहीं होगा, क्योंकि इससे जनता में असंतोष बढ़ सकता है। पाकिस्तान की कर्ज की स्थिति और चीन पर उसकी बढ़ती निर्भरता उसकी आर्थिक कमजोरियों को उजागर करती है। शहबाज शरीफ सरकार के बार-बार चीन दौरे और नए कर्ज के लिए अनुरोध इस बात का संकेत हैं कि देश तत्काल राहत के लिए बाहरी सहायता पर निर्भर है।
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