ईरान में खामेनेई के खिलाफ उभरा विद्रोह- 50 शहरों में फैला आर्थिक आक्रोश, अंतिम संस्कारों में गूंजे तख्तापलट के नारे।
ईरान में दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब छठे दिन यानी 2 जनवरी 2026 तक कम से कम 50 शहरों में फैल चुके हैं। यह आंदोलन
ईरान में दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब छठे दिन यानी 2 जनवरी 2026 तक कम से कम 50 शहरों में फैल चुके हैं। यह आंदोलन शुरू में महंगाई, राष्ट्रीय मुद्रा रियाल के अभूतपूर्व गिरावट, खाद्य पदार्थों की 72 प्रतिशत वृद्धि और स्वास्थ्य सेवाओं की 50 प्रतिशत महंगाई के खिलाफ बाजार व्यापारियों और दुकानदारों द्वारा तेहरान के ग्रैंड बाजार में दुकानें बंद करने से शुरू हुआ। आर्थिक संकट के साथ पानी की कमी, बिजली कटौती और बेरोजगारी ने आम लोगों की सहनशक्ति खत्म कर दी, जिससे विरोध राजनीतिक मांगों में बदल गया। प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के खिलाफ नारे लगाए, जिसमें 'डेथ टू द डिक्टेटर' और 'खामेनेई मुर्दाबाद' प्रमुख हैं। यह आंदोलन 2022 के महसा अमीनी विरोध के बाद सबसे बड़ा माना जा रहा है।
प्रदर्शन अब तेहरान से निकलकर इस्फहान, मशहद, क़ोम, शिराज, हमदान, बाबोल, खूज़ेस्तान, लोरेस्तान, फार्स और अन्य प्रांतों तक पहुंच चुके हैं। क़ोम, जो शिया धर्मगुरुओं का गढ़ है, वहां भी सत्ता विरोधी नारे सुनाई दिए, जो शासन के लिए बड़ा झटका है। छात्रों, महिलाओं, व्यापारियों और युवाओं ने शामिल होकर विरोध को व्यापक बनाया। प्रदर्शनकारियों ने पूर्व शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे रजा पहलवी का समर्थन किया तथा 'जाविद शाह' (लॉन्ग लिव द शाह) और 'रजा पहलवी वापस आएगा' जैसे नारे लगाए। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने रेजीम के प्रतीकों को जला दिया तथा सरकारी इमारतों पर हमला किया। सुरक्षा बलों ने आंसू गैस, लाठीचार्ज और फायरिंग का इस्तेमाल किया, जिससे कई प्रदर्शनकारी घायल हुए और मौतें हुईं।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए प्रदर्शनकारियों के अंतिम संस्कार विरोध का नया केंद्र बन गए। फुलादशहर, कुहदाश्त, मार्वदाश्त और अन्य शहरों में अंतिम संस्कारों में हजारों लोग जमा हुए, जहां 'डेथ टू खामेनेई' और 'शाह वापस आएगा' जैसे नारे गूंजे। ये अंतिम संस्कार शवयात्राओं में बदल गए तथा प्रदर्शनकारियों ने सत्ता विरोध जारी रखा। कुहदाश्त में अमीर हेसाम खोदायारिफर्द के अंतिम संस्कार में क्लैश हुए तथा मार्वदाश्त में खोदादाद शिरवानी के अंतिम संस्कार ने विरोध को और तेज किया। इन नारों ने आंदोलन को तख्तापलट की दिशा में ले जाने का संकेत दिया।
आर्थिक संकट के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था गंभीर रूप से प्रभावित है, जहां मुद्रा का मूल्य अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 में मुद्रास्फीति 42.2 प्रतिशत तक पहुंच गई। सरकार ने 2026 के बजट में करों में 62 प्रतिशत वृद्धि प्रस्तावित की, जिसे लोगों ने लूट बताया। प्रदर्शनकारियों ने विदेश नीति पर भी सवाल उठाए तथा 'न गाजा, न लेबनान, मैं ईरान के लिए अपनी जान दूंगा' जैसे नारे लगाए। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने संवाद की बात कही तथा आर्थिक सुधारों का वादा किया, लेकिन प्रदर्शनकारियों की मांगें अब शासन परिवर्तन तक पहुंच गई हैं।
सुरक्षा बलों ने दमनात्मक कार्रवाई तेज की तथा आईआरजीसी के डिप्टी कमांडर की नियुक्ति बदली। कई प्रदर्शनकारी गिरफ्तार हुए तथा हिंसा में मौतें हुईं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का सम्मान करने की अपील की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर हिंसा हुई तो अमेरिका हस्तक्षेप करेगा। ईरान ने इस बयान को खतरनाक बताया। रजा पहलवी ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया तथा कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक का अंत हो चुका है।
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