'डिग्री हाथ में और जेब में RDX....', रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने 'व्हाइट कॉलर टेररिज्म' को देश के लिए खतरे की घंटी बताया।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने राजस्थान के उदयपुर में भूपाल नोबल्स यूनिवर्सिटी के 104वें स्थापना दिवस समारोह में संबोधन दिया। उन्होंने देश
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने राजस्थान के उदयपुर में भूपाल नोबल्स यूनिवर्सिटी के 104वें स्थापना दिवस समारोह में संबोधन दिया। उन्होंने देश में 'व्हाइट कॉलर टेररिज्म' के उभरते खतरे पर चिंता जताई, जिसमें उच्च शिक्षित व्यक्ति समाज और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने दिल्ली के रेड फोर्ट के पास 10 नवंबर 2025 को हुए कार बम धमाके का उदाहरण दिया, जिसमें 15 लोगों की मौत हुई और कई घायल हुए। इस धमाके में सुसाइड कार बॉम्बर डॉक्टर उमर उन नबी ने विस्फोटक से भरी Hyundai i20 कार चलाई थी। जांच में 'व्हाइट कॉलर' टेरर मॉड्यूल का खुलासा हुआ, जिसमें तीन अन्य डॉक्टरों डॉ. मुजम्मिल शकील गनाई, डॉ. अदील अहमद और डॉ. शहीन सईद सहित कई लोगों को गिरफ्तार किया गया। राजनाथ सिंह ने कहा कि दिल्ली बम धमाके करने वाले डॉक्टर थे, जो पर्चे पर 'Rx' लिखते थे लेकिन उनके हाथों में RDX था।
रक्षामंत्री ने इस घटना को 'व्हाइट कॉलर टेररिज्म' का उदाहरण बताते हुए कहा कि आज उच्च शिक्षित लोग समाज और राष्ट्र के खिलाफ काम कर रहे हैं। उन्होंने जोर दिया कि ज्ञान के साथ-साथ अच्छे मूल्य, चरित्र और नैतिकता होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कोई भी शिक्षा व्यवस्था जो ज्ञान के साथ विनम्रता, चरित्र और नैतिक मूल्यों का विकास नहीं करती, वह सफल नहीं मानी जा सकती। शिक्षा का उद्देश्य केवल पेशेवर सफलता नहीं, बल्कि नैतिकता, सदाचार और मानवीय चरित्र का निर्माण भी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि धर्म का मतलब केवल मंदिर, मस्जिद या चर्च जाना नहीं, बल्कि कर्तव्य और जिम्मेदारी का पालन करना है। शिक्षा यदि नैतिकता और धर्म से खाली है, तो वह समाज के लिए उपयोगी नहीं रहती और कभी-कभी खतरनाक भी हो सकती है।
रक्षामंत्री ने आगे कहा कि ज्ञान से क्षमता आती है, क्षमता से समृद्धि, समृद्धि से धर्म और नैतिकता का उदय होता है तथा सच्चा सुख केवल धर्म और नैतिक जीवन से मिलता है। उन्होंने बताया कि आतंकवाद केवल अनपढ़ लोगों तक सीमित नहीं है, कई उच्च शिक्षित व्यक्ति भी इसमें शामिल हो रहे हैं लेकिन उनमें विवेक और बुद्धि का अभाव होता है। इसलिए केवल ज्ञान नहीं, बल्कि विवेक भी जरूरी है। उन्होंने इस घटना को शिक्षा व्यवस्था और सामाजिक मूल्यों के लिए चुनौती बताया, जहां डिग्री हाथ में होने के बावजूद व्यक्ति राष्ट्र विरोधी कार्य कर सकता है। इस संदर्भ में राजनाथ सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में चौथी औद्योगिक क्रांति चल रही है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग जैसी तकनीकें जीवन और कार्यशैली को बदल रही हैं। उन्होंने विश्वविद्यालयों की भूमिका पर जोर दिया कि वे देश को तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में योगदान दें। उन्होंने आतंकवाद के इस नए रूप को समाज के लिए गंभीर खतरा बताया और शिक्षा को मूल्यों से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
रक्षामंत्री ने इस घटना के माध्यम से बताया कि पढ़े-लिखे लोग भी आपराधिक और राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह ट्रेंड चिंताजनक है और शिक्षा व्यवस्था को इसमें सुधार की जरूरत है। उन्होंने जोर दिया कि ज्ञान के साथ अच्छे संस्कार और चरित्र का होना बहुत जरूरी है। रक्षामंत्री ने समारोह में कहा कि भारत प्राचीन काल से समृद्ध रहा है और आज भी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने रक्षा क्षेत्र में स्टार्टअप्स की सराहना की और कहा कि आने वाले 15-20 वर्षों में भारत हथियारों में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो जाएगा। उन्होंने शिक्षा को समाज में समरसता और शांति स्थापित करने का माध्यम बताया।
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