पुतिन की भारत यात्रा- कई बड़े फैसलों पर मुहर लगने की उम्मीद, रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्षों पर मुहर, मोदी के निजी डिनर से रक्षा सौदों तक व्यस्त कार्यक्रम।
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार को दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत पहुँचेंगे। उनके दिल्ली में शाम लगभग 4:30 बजे पहुँचने
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार को दो दिवसीय राजकीय यात्रा पर भारत पहुँचेंगे। उनके दिल्ली में शाम लगभग 4:30 बजे पहुँचने की संभावना है। आगमन के कुछ घंटों बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके सम्मान में निजी रात्रिभोज का आयोजन करेंगे। यह यात्रा भारत-रूस के बीच विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का महत्वपूर्ण मौका साबित होगी। पिछले जुलाई में प्रधानमंत्री मोदी की मॉस्को यात्रा के दौरान पुतिन ने भी इसी प्रकार का व्यक्तिगत आतिथ्य प्रदान किया था। पुतिन की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब भारत-अमेरिका संबंध दो दशकों के निम्नतम स्तर पर पहुँच चुके हैं। अमेरिका ने भारतीय निर्यात पर शुल्क 50 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है, जिसमें भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद के कारण लगाए गए 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क को भी शामिल किया गया है।
पुतिन की यात्रा का मुख्य उद्देश्य 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेना है, जो दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय संवाद का प्रमुख मंच है। यह शिखर सम्मेलन 2000 से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है, जिसमें अब तक 22 सम्मेलन हो चुके हैं। यात्रा से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, पुतिन का शुक्रवार को औपचारिक स्वागत होगा, उसके बाद वे प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। हैदराबाद हाउस में आयोजित दोपहर भोजन के दौरान दोनों नेता व्यापक चर्चा करेंगे। शुक्रवार सुबह पुतिन राजघाट जाकर महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। शिखर वार्ता के समापन के बाद पुतिन रूसी सरकारी प्रसारक आरटी के नए इंडिया चैनल का उद्घाटन करेंगे। इसके पश्चात राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उनके सम्मान में राष्ट्रपति भवन में राजकीय भोज का आयोजन करेंगी। भारत में लगभग 28 घंटे बिताने के बाद पुतिन शुक्रवार रात लगभग 9:30 बजे मॉस्को के लिए प्रस्थान कर लेंगे।
शिखर सम्मेलन के दौरान भारत रूस से बड़े पैमाने पर कच्चे तेल के आयात के कारण उत्पन्न हो रहे व्यापार असंतुलन पर चिंता व्यक्त कर सकता है। वर्तमान में भारत रूस से प्रतिवर्ष लगभग 65 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य की वस्तुओं का आयात करता है, जबकि रूस भारत से केवल लगभग 5 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य का आयात करता है। यह असंतुलन नई दिल्ली के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। द्विपक्षीय व्यापार 2024-25 वित्तीय वर्ष में 68.7 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया, जो महामारी पूर्व के 10 अरब डॉलर से काफी अधिक है, लेकिन निर्यात में वृद्धि की गति आयात से मेल नहीं खा रही। चर्चा में भारत-रूस व्यापार पर अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभाव पर भी विचार-विमर्श हो सकता है। दोनों देश 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखते हैं, जिसके लिए रूसी बाजार में भारतीय वस्तुओं की पहुँच बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, पुतिन प्रधानमंत्री मोदी को यूक्रेन विवाद के समाधान के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाले प्रयासों के बारे में जानकारी दे सकते हैं। भारत लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि युद्ध का समाधान केवल बातचीत और कूटनीति से ही संभव है। नेताओं की वार्ता के बाद कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर होने की अपेक्षा है। इनमें भारतीय श्रमिकों की रूस में आवाजाही को सुगम बनाने वाला समझौता शामिल है। वर्तमान में रूस में लगभग एक लाख भारतीय कार्यरत हैं, जबकि 25 हजार से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं। यह समझौता कुशल और अर्ध-कुशल श्रमिकों की गतिशीलता को बढ़ावा देगा। रक्षा साझेदारी ढांचे के अंतर्गत रक्षा उपकरणों पर सहयोग को मजबूत करने वाले दस्तावेज भी हस्ताक्षर के लिए तैयार हैं। फार्मास्यूटिकल्स, कृषि, खाद्य उत्पादों और उपभोक्ता वस्तुओं में रूस को भारतीय निर्यात बढ़ाने की पहल पर भी समझौता होगा।
भारत उर्वरक क्षेत्र में सहयोग को बढ़ाने पर कार्यरत है। रूस भारत को प्रतिवर्ष 3-4 मिलियन टन उर्वरक की आपूर्ति करता है। दोनों पक्ष व्यापार, शिक्षा, कृषि और संस्कृति से संबंधित समझौतों को अंतिम रूप दे सकते हैं। यूरेशियन आर्थिक संघ के साथ भारत के प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर भी बातचीत आगे बढ़ सकती है। अगस्त 2025 में इसकी शर्तों पर सहमति बनी थी, और अब 18 माह की कार्य योजना पर अमल हो रहा है। यह समझौता भारतीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों, किसानों तथा मछुआरों को नए बाजार प्रदान करेगा। इसके अलावा, स्वास्थ्य, मीडिया और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर समझौते भी हस्ताक्षर के दायरे में हैं। रूस के साथ व्यापार को बाहरी दबावों से सुरक्षित बनाने के लिए भुगतान प्रणालियों को मजबूत करने पर चर्चा होगी, जिसमें राष्ट्रीय मुद्राओं का उपयोग बढ़ाना शामिल है।
शिखर सम्मेलन से एक दिन पूर्व गुरुवार को दोनों देशों के रक्षा मंत्री व्यापक चर्चा करेंगे। भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रूसी रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव एस-400 मिसाइल प्रणाली, सुखोई-30 लड़ाकू विमानों के उन्नयन तथा अन्य सैन्य उपकरणों की खरीद से जुड़े मुद्दों की समीक्षा करेंगे। रक्षा संबंधों को मजबूत करने और रूसी उपकरणों की समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने पर बल दिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, भारत अतिरिक्त एस-400 मिसाइल इकाइयों की खरीद पर विचार कर रहा है, क्योंकि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह प्रणाली अत्यंत प्रभावी सिद्ध हुई थी। अक्टूबर 2018 में भारत ने सीएएटीएसए कानून के तहत अमेरिकी चेतावनियों के बावजूद पाँच एस-400 इकाइयों के लिए 5.4 अरब अमेरिकी डॉलर के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। अब दो अतिरिक्त स्क्वाड्रनों की डिलीवरी में देरी को दूर करने के साथ-साथ पाँच और इकाइयों की संभावना पर विचार हो रहा है।
रक्षा सहयोग के अन्य आयामों में सुखोई-30एमकेआई लड़ाकू विमानों के आधुनिकीकरण पर काम तेज होगा। रूस ने भारत को अपनी पाँचवीं पीढ़ी की सुखोई-57 स्टेल्थ फाइटर जेट की पेशकश की है, जिस पर चर्चा की संभावना है। हालांकि, भारत विकल्पों को खुला रखे हुए है। ब्रह्मोस मिसाइल के संयुक्त उत्पादन को और विस्तार देने तथा छोटे मॉड्यूलर न्यूक्लियर रिएक्टरों पर सहयोग पर भी वार्ता होगी। रक्षा मंत्रियों की बैठक 22वीं भारत-रूस अंतर-सरकारी आयोग की सैन्य-तकनीकी सहयोग पर होगी, जिसमें आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियों का समाधान प्रमुख होगा। रूस भारत को रक्षा क्षेत्र में 36 प्रतिशत आपूर्ति करता है, जो पहले 72 प्रतिशत था, लेकिन प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पर सहयोग मजबूत बना हुआ है।
यह यात्रा 2021 के बाद पुतिन की पहली भारत यात्रा है। तब से दोनों नेता शंघाई सहयोग संगठन तथा ब्रिक्स जैसे मंचों पर मिलते रहे हैं। पिछले वर्ष जुलाई में प्रधानमंत्री मोदी वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए मॉस्को गए थे, जहाँ ऊर्जा तथा रक्षा पर विस्तृत समझौते हुए थे। भारत-रूस संबंध सोवियत काल से चले आ रहे हैं, और यह यात्रा इनकी 25वीं वर्षगाँठ पर हो रही है। शिखर सम्मेलन के बाद दोनों नेता भारत-रूस व्यापार मंच को संबोधित करेंगे, जहाँ निवेश, विनिर्माण तथा प्रौद्योगिकी सहयोग पर फोकस होगा। रूसी प्रतिनिधिमंडल में नौ मंत्रियों तथा रोसनेफ्ट, गैजप्रोम तथा रोसोबोरोनएक्सपोर्ट जैसे प्रमुख उद्योगपतियों के प्रतिनिधि शामिल हैं।
द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा के अलावा क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा, जिसमें संयुक्त राष्ट्र, एससीओ, जी20 तथा ब्रिक्स में सहयोग प्रमुख है। रूस भारत के 2026 ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान समन्वय पर सहमत है। यात्रा के दौरान 10 अंतर-सरकारी तथा 15 से अधिक व्यावसायिक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर की अपेक्षा है। ऊर्जा क्षेत्र में कच्चे तेल की आपूर्ति को स्थिर रखने तथा एलएनजी तथा गैस ढांचे पर बहु-वर्षीय समझौते पर चर्चा होगी। रूस भारत को प्रतिस्पर्धी मूल्य पर ऊर्जा प्रदान करने को प्रतिबद्ध है, भले ही पश्चिमी प्रतिबंध चुनौतियाँ पैदा कर रहे हों। भारत ने दिसंबर में रूसी तेल आयात को तीन वर्षों के न्यूनतम स्तर पर पहुँचने दिया है, लेकिन दोनों पक्ष आपूर्ति को बहाल करने के उपाय तलाशेंगे।
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