ट्रंप के H-1B वीजा शुल्क वृद्धि पर ओवैसी का केंद्र पर तीखा प्रहार, बोले- 'हाउडी मोदी-नमस्ते ट्रंप से क्या मिला?'

H-1B वीजा अमेरिका में उच्च कुशल विदेशी कामगारों के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, जो मुख्य रूप से आईटी, इंजीनियरिंग और हेल्थकेयर क्षेत्रों में काम करने की अनुमति

Sep 21, 2025 - 11:55
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ट्रंप के H-1B वीजा शुल्क वृद्धि पर ओवैसी का केंद्र पर तीखा प्रहार, बोले- 'हाउडी मोदी-नमस्ते ट्रंप से क्या मिला?'
ट्रंप के H-1B वीजा शुल्क वृद्धि पर ओवैसी का केंद्र पर तीखा प्रहार, बोले- 'हाउडी मोदी-नमस्ते ट्रंप से क्या मिला?'

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा H-1B वीजा आवेदनों पर 100,000 डॉलर (करीब 88 लाख रुपये) का वार्षिक शुल्क लगाने वाले कार्यकारी आदेश ने भारत में हड़कंप मचा दिया। यह कदम विशेष रूप से भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए झटका है, क्योंकि 71-72 प्रतिशत H-1B वीजा भारतीयों को मिलते हैं। हैदराबाद से लोकसभा सांसद और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस फैसले का फायदा उठाते हुए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर जोरदार हमला बोला। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक लंबी पोस्ट में ओवैसी ने कहा कि ट्रंप ने H-1B सिस्टम को लगभग समाप्त कर दिया है, जो तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों के लिए सबसे बड़ा नुकसान है। उन्होंने सरकार की विदेश नीति को निशाने पर लेते हुए सवाल किया, 'हाउडी मोदी और नमस्ते ट्रंप से क्या हासिल हुआ?' यह बयान इकोनॉमिक टाइम्स, एबीपी लाइव, द हिंदू और लाइवमिंट जैसी प्रमुख मीडिया संस्थाओं द्वारा प्रमुखता से कवर किया गया, जहां ओवैसी ने साफ कहा कि उनकी शिकायत ट्रंप से नहीं, बल्कि मोदी सरकार से है।

H-1B वीजा अमेरिका में उच्च कुशल विदेशी कामगारों के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, जो मुख्य रूप से आईटी, इंजीनियरिंग और हेल्थकेयर क्षेत्रों में काम करने की अनुमति देता है। ट्रंप प्रशासन का यह नया आदेश 20 सितंबर से लागू हो गया, जिसके तहत नए आवेदनों पर भारी शुल्क लगेगा। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह फैसला अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से लिया गया है, लेकिन भारत पर इसका गहरा असर पड़ेगा। भारत से सालाना 1.25 लाख करोड़ डॉलर के रेमिटेंस आते हैं, जिसमें H-1B वीजा धारकों की कमाई का बड़ा हिस्सा है। भारतीय H-1B वीजा धारकों की औसत वार्षिक आय लगभग 1,20,000 डॉलर है, जो उनके परिवारों के लिए आय का प्रमुख स्रोत है। ओवैसी ने अपनी पोस्ट में बताया कि तेलंगाना और आंध्र प्रदेश भारतीय NRI जमा राशि का 37 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं, और यह वृद्धि इन राज्यों के युवाओं के लिए 'अंतरपीढ़ीगत गतिशीलता का दरवाजा बंद' करने जैसी है। उन्होंने कहा, 'ट्रंप ने भारत के साथ अपने संबंधों को खतरे में डाल दिया, जो दिखाता है कि अमेरिका को हमारी सामरिक साझेदारी की कोई परवाह नहीं।'

ओवैसी का हमला मोदी सरकार के विदेश नीति प्रयासों पर केंद्रित रहा। उन्होंने 2019 के 'हाउडी मोदी' इवेंट का जिक्र किया, जहां प्रधानमंत्री मोदी ने ह्यूस्टन में 50,000 से ज्यादा भारतीय प्रवासियों को संबोधित किया था। इसी तरह, 2020 के 'नमस्ते ट्रंप' कार्यक्रम में ट्रंप अहमदाबाद आए थे। ओवैसी ने तंज कसा, 'मैडिसन स्क्वायर गार्डन में जुटाए गए सभी NRI से क्या हासिल हुआ? जन्मदिन की शुभकामनाएं विदेश नीति की सफलता नहीं हैं।' यहां वे ट्रंप द्वारा 17 सितंबर को मोदी के 75वें जन्मदिन पर दी गई शुभकामना का इशारा कर रहे थे। द हिंदू की रिपोर्ट में ओवैसी ने कहा, 'ट्रंप ने जो किया, वह उसके देश के हित में था। लेकिन सरकार को सोचना चाहिए कि विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों को आपने शो-पीस बना दिया। लंबी अवधि के लाभों को घरेलू दिखावे के लिए कुर्बान कर दिया। 2014 से 2024 तक खोया हुआ दशक रहा।' उन्होंने सरकार से अपील की कि ट्रंप के 'ब्लैकमेल' के आगे झुकना नहीं चाहिए, लेकिन डी-डॉलरीकरण को बढ़ावा देकर अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करें।

यह विवाद अमेरिका-भारत संबंधों के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करता है। द सनडे गार्जियन के अनुसार, ट्रंप का आदेश केवल नए आवेदनों पर लागू है, लेकिन मौजूदा वीजा धारकों को भी नवीनीकरण में दिक्कत हो सकती है। भारतीय आईटी कंपनियां जैसे इंफोसिस, विप्रो और टीसीएस सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी, क्योंकि वे H-1B पर निर्भर हैं। हिंदुस्तान टाइम्स ने बताया कि व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि यह नियम अमेरिकी नौकरियों को बचाने के लिए है, लेकिन भारत ने अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी। विपक्षी नेता इस मौके का फायदा उठा रहे हैं। कांग्रेस की सुप्रिया श्रीनाते ने कहा, 'जन्मदिन की दोस्ती के दो दिन बाद ही अमेरिका ने भारत पर हमला बोला।' शिवसेना (यूबीटी) के आदित्य ठाकरे ने केंद्र की 'चुप्पी' पर तंज कसा। लेकिन ओवैसी का बयान सबसे तीखा रहा, क्योंकि उन्होंने इसे 'रणनीतिक विफलता' करार दिया।

ओवैसी की पोस्ट एक्स पर वायरल हो गई। इसमें उन्होंने थ्रेड के रूप में प्रभावों को विस्तार से बताया। पहला बिंदु: H-1B सिस्टम का अंत भारतीयों, खासकर तेलंगाना और आंध्र के लोगों के लिए झटका। दूसरा: 71-72 प्रतिशत वीजा भारतीयों को, जिसमें तेलुगु राज्य हावी हैं। तीसरा: औसत सैलरी 1,20,000 डॉलर, जो रेमिटेंस का बड़ा स्रोत। चौथा: परिवारों के लिए आय का स्रोत बंद। पांचवां: NRI जमा में 37 प्रतिशत हिस्सा। छठा: आईटी कंपनियों का नुकसान। सातवां: विदेश नीति की कमजोरी। आठवां: सरकार को डी-डॉलरीकरण पर ध्यान दें। नौवां: ट्रंप के ब्लैकमेल से न झुकें। दसवां: आम भारतीयों को नुकसान। यह थ्रेड हजारों लाइक्स और शेयर पा चुका है। सोशल मीडिया पर लोग बहस कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, 'ओवैसी ने सही कहा, मोदी की विदेश नीति सिर्फ फोटोशूट है।' दूसरा बोला, 'ट्रंप का फैसला सही, लेकिन भारत को मजबूत बनना चाहिए।'

केंद्र सरकार की ओर से अभी कोई प्रत्यक्ष जवाब नहीं आया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि वे अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखेंगे। लेकिन विपक्ष का आरोप है कि सरकार चुप है। टीवी9 हिंदी की रिपोर्ट में ओवैसी ने कहा, 'ट्रंप का फैसला भारत के साथ संबंधों को खतरे में डालता है, जो हमारी सामरिक साझेदारी पर सवाल उठाता है।' विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती है। रेमिटेंस में कमी से ग्रामीण अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है। आईटी सेक्टर में नौकरियां कम हो सकती हैं। द सियासत डॉट कॉम ने बताया कि ओवैसी ने सरकार से विदेश नीति पर आत्मचिंतन करने को कहा। उन्होंने कहा, 'ट्रंप ने अपने हित साधे, लेकिन आपने क्या किया?'

यह घटना भारत-अमेरिका संबंधों की जटिलता दिखाती है। एक तरफ QUAD और रक्षा सौदे, दूसरी तरफ वीजा और व्यापार विवाद। ओवैसी का बयान विपक्ष को एकजुट करने का मौका दे रहा है। चुनावी साल में यह मुद्दा गरम हो सकता है। तेलंगाना और आंध्र के युवा सबसे ज्यादा प्रभावित हैं, जहां H-1B पर सपने टिके हैं। ओवैसी ने सही कहा कि जन्मदिन की शुभकामनाएं नीति नहीं बदलतीं। सरकार को अब मजबूत कदम उठाने चाहिए, जैसे वैकल्पिक बाजारों पर फोकस। डी-डॉलरीकरण से ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार बढ़ा सकते हैं। यह विवाद हमें याद दिलाता है कि विदेश नीति में शो से ज्यादा पदार्थ जरूरी है। उम्मीद है कि सरकार जवाब देगी और भारतीय पेशेवरों के हित सुरक्षित करेगी। ओवैसी का यह प्रहार राजनीति को नई दिशा दे सकता है।

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