इथियोपिया के हायली गूबी ज्वालामुखी विस्फोट से प्रभावित हुईं उड़ानें: आकाशा एयरलाइंस ने जेद्दा, कुवैत और अबू धाबी मार्गों पर कई उड़ानें रद्द कीं।
इथियोपिया के अफार क्षेत्र में स्थित हायली गूबी ज्वालामुखी ने रविवार सुबह अचानक विस्फोट किया। यह ज्वालामुखी लगभग 12,000 वर्षों से निष्क्रिय
इथियोपिया के अफार क्षेत्र में स्थित हायली गूबी ज्वालामुखी ने रविवार सुबह अचानक विस्फोट किया। यह ज्वालामुखी लगभग 12,000 वर्षों से निष्क्रिय था। इस विस्फोट ने आसपास के इलाकों में धूल और राख का बादल फैला दिया। विस्फोट की तीव्रता मध्यम बताई जा रही है। इससे लाल सागर के ऊपर से होते हुए राख का बादल यमन और ओमान की ओर बढ़ा। अब यह बादल पूर्व की ओर मुड़ गया है और उत्तरी भारत की ओर बढ़ रहा है। इस घटना ने न केवल स्थानीय स्तर पर चिंता पैदा की है बल्कि वैश्विक विमानन उद्योग को भी प्रभावित किया है। विशेष रूप से मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया के हवाई मार्गों पर इसका असर पड़ा है।
इस विस्फोट की जानकारी सबसे पहले अफार क्षेत्र के स्थानीय मीडिया आउटलेट अफार टीवी ने दी। रिपोर्ट के अनुसार, विस्फोट के समय आसपास के इलाकों में हल्के भूकंप के झटके महसूस किए गए। एरटा एले और अफदेरा शहर के आसपास के क्षेत्रों में कंपन दर्ज किया गया। अफदेरा गांव पर भारी धूल की परत जम गई। हालांकि, अभी तक इस विस्फोट से कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ है। लेकिन स्थानीय पशुपालकों की आजीविका पर इसका प्रभाव पड़ सकता है। ज्वालामुखी के धुंधले बादल ने क्षेत्र की दृश्यता कम कर दी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह विस्फोट एरटा एले श्रृंखला का हिस्सा है, जो इथियोपिया के सबसे सक्रिय ज्वालामुखी क्षेत्रों में से एक है।
विस्फोट के बाद टूलूज वोल्कैनिक ऐश एडवाइजरी सेंटर ने अलर्ट जारी किया। इस सेंटर ने बताया कि राख का बादल तेज हवाओं के साथ लाल सागर पार कर चुका है। यह बादल अब मध्य पूर्व के हवाई क्षेत्रों में फैल रहा है। मुस्कट फ्लाइट इन्फॉर्मेशन रीजन में इसका असर दिखाई दे रहा है। इससे विमानों के इंजनों के लिए खतरा पैदा हो गया है। ज्वालामुखी राख के कण इंजनों में चिपक सकते हैं, जिससे विमान की गति कम हो सकती है या इंजन बंद हो सकता है। इतिहास में कई बार ऐसे हादसे हो चुके हैं, जैसे 1982 में ब्रिटिश एयरवेज का विमान इंडोनेशिया के ज्वालामुखी राख से प्रभावित हुआ था। इसलिए, विमानन कंपनियां सतर्कता बरत रही हैं।
भारत में इस घटना का असर सोमवार सुबह से ही दिखाई देने लगा। नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने सभी एयरलाइंस और हवाई अड्डों को सलाह जारी की। सलाह में कहा गया है कि प्रभावित क्षेत्रों से बचने के लिए उड़ान मार्गों में बदलाव करें। अगर विमान को राख का सामना करना पड़े, तो तुरंत इंजन की जांच करें। केबिन में धुआं या गंध महसूस होने पर रिपोर्ट करें। हवाई अड्डों को निर्देश दिया गया है कि अगर राख का जमाव हो, तो रनवे की सफाई करें। डीजीसीए ने यह भी कहा कि राख का बादल गुजरात, राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर और पंजाब की ओर बढ़ रहा है। सोमवार रात तक यह उत्तर-पश्चिम भारत पहुंच सकता है।
आकाशा एयरलाइंस ने सबसे पहले अपनी उड़ानों पर असर की जानकारी दी। एयरलाइंस ने आधिकारिक बयान में कहा कि इथियोपिया में हाल की ज्वालामुखी गतिविधि और उसके कारण हवाई क्षेत्र में फैले राख के बादल से बचने के लिए 24 और 25 नवंबर 2025 को जेद्दा, कुवैत और अबू धाबी के लिए सभी उड़ानें रद्द कर दी गई हैं। यह फैसला अंतरराष्ट्रीय विमानन सलाहों का पालन करते हुए लिया गया है। एयरलाइंस ने प्रभावित यात्रियों से कहा कि वे वैकल्पिक यात्रा की व्यवस्था करेंगे। पूरी राशि का रिफंड या सात दिनों के अंदर मुफ्त पुनः बुकिंग का विकल्प दिया जाएगा। आकाशा एयर की टीम स्थिति की निगरानी कर रही है और आवश्यक कदम उठाएगी।
इसके अलावा, अन्य भारतीय एयरलाइंस भी प्रभावित हुईं। इंडिगो ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट किया कि हायली गूबी ज्वालामुखी के विस्फोट के बाद राख के बादल पश्चिमी भारत की ओर बढ़ रहे हैं। कंपनी ने कई उड़ानों को रद्द या डायवर्ट किया। कन्नूर से अबू धाबी जाने वाली इंडिगो की उड़ान 6ई 1433 को अहमदाबाद डायवर्ट कर दिया गया। मुंबई से एक और दक्षिण भारत से पांच उड़ानें रद्द हुईं। कोच्चि से दुबई जाने वाली इंडिगो की उड़ान 6ई1475 को भी रोक दिया गया। इंडिगो ने यात्रियों को मुआवजा देने का वादा किया है।
एयर इंडिया ने भी कई उड़ानें रद्द कीं। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न्यूयॉर्क से दिल्ली (एआई 102), न्यूर्क से दिल्ली (एआई 106), दुबई से हैदराबाद (एआई 2204), दोहा से मुंबई (एआई 2290), दुबई से चेन्नई (एआई 2212), दम्माम से मुंबई (एआई 2250) और दोहा से दिल्ली (एआई 2284) की उड़ानें रद्द हुईं। मंगलवार के लिए चेन्नई से मुंबई (एआई 2822), हैदराबाद से दिल्ली (एआई 2466), मुंबई-हैदराबाद (एआई 2444/2445) और मुंबई-कोलकाता (एआई 2471/2472) की उड़ानें प्रभावित हुईं। एयर इंडिया ने एक्स पर कहा कि वे स्थिति पर नजर रख रहे हैं और क्रू के संपर्क में हैं।
विदेशी एयरलाइंस भी इससे अछूती नहीं रहीं। केएलएम रॉयल डच एयरलाइंस ने एम्स्टर्डम से दिल्ली (केएल 871) और दिल्ली से एम्स्टर्डम (केएल 872) की उड़ानें रद्द कर दीं। कोच्चि इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने जेद्दा और दुबई के लिए सेवाएं रोक दीं। चेन्नई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड ने कहा कि स्थिति सामान्य होने पर ही उड़ानें फिर से शुरू होंगी। मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने यात्रियों को एयरलाइंस से संपर्क करने की सलाह दी।
इस विस्फोट का असर मध्य पूर्व तक पहुंच गया है। सऊदी अरब के नेशनल सेंटर फॉर मेटियोरॉजिकल ने कहा कि हायली गूबी ज्वालामुखी का विस्फोट सऊदी वायुमंडल पर सीधा प्रभाव नहीं डालेगा। लेकिन ओमान ने हवाई सलाह जारी की है। जेद्दा हवाई अड्डे पर कुछ उड़ानें प्रभावित हुईं। कुवैत और अबू धाबी के मार्गों पर भी सतर्कता बरती जा रही है। वैश्विक स्तर पर वोल्कैनिक ऐश एडवाइजरी सेंटर्स निगरानी कर रहे हैं।
इथियोपिया में स्थानीय प्रशासन ने राहत कार्य शुरू कर दिए हैं। अफार गवर्नमेंट कम्युनिकेशन ब्यूरो ने तस्वीरें जारी कीं, जिनमें राख के बादल दिखाई दे रहे हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि राख का बादल कुछ दिनों में छंट सकता है। लेकिन हवाओं की दिशा के आधार पर यह उत्तर भारत में देर रात तक पहुंच सकता है। हिमालय क्षेत्र भी प्रभावित हो सकता है। मौसम विभाग ने कहा कि राख से वायु प्रदूषण बढ़ सकता है। लोगों को मास्क पहनने की सलाह दी गई है।
विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि ज्वालामुखी राख विमानों के लिए सबसे बड़ा खतरा है। राख के कण गर्म होकर कांच जैसे हो जाते हैं, जो इंजनों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसलिए, एयरलाइंस मार्ग बदल रही हैं। कुछ उड़ानें लंबे रास्ते से उड़ रही हैं, जिससे ईंधन खर्च बढ़ रहा है। यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन सुरक्षा सबसे ऊपर है।
भारतीय सरकार ने भी सतर्कता बरती है। विदेश मंत्रालय ने इथियोपिया में रहने वाले भारतीयों को सलाह दी है। नागरिक उड्डयन मंत्री ने डीजीसीए के साथ बैठक की। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अगर राख का बादल बढ़ा, तो और उड़ानें प्रभावित हो सकती हैं।
यह घटना जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते मामलों को दर्शाती है। इथियोपिया जैसे क्षेत्रों में ज्वालामुखी गतिविधियां आम हैं, लेकिन इतने लंबे अंतराल के बाद यह अप्रत्याशित था। वैज्ञानिकों को अब इसकी जांच करनी होगी कि क्या यह श्रृंखला का हिस्सा है। स्थानीय समुदायों को सहायता की जरूरत है।
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