उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्सों में अचानक पलटा मौसम, Delhi-NCR सहित 11 राज्यों में आंधी और भारी बारिश की चेतावनी

देश भर में भीषण और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के दौर के बीच अचानक मौसम के मिजाज में एक बड़ा और अप्रत्याशित बदलाव देखने

Jun 8, 2026 - 12:07
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उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्सों में अचानक पलटा मौसम, Delhi-NCR सहित 11 राज्यों में आंधी और भारी बारिश की चेतावनी
उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्सों में अचानक पलटा मौसम, Delhi-NCR सहित 11 राज्यों में आंधी और भारी बारिश की चेतावनी
  • 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी विनाशकारी हवाएं, मौसम विभाग ने जारी किया सुरक्षा को लेकर विशेष ऑरेंज अलर्ट
  • दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के आगे बढ़ने और पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से बदला मिजाज, तटीय और मैदानी इलाकों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

देश भर में भीषण और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के दौर के बीच अचानक मौसम के मिजाज में एक बड़ा और अप्रत्याशित बदलाव देखने को मिल रहा है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग की ओर से जारी ताजा वैज्ञानिक आकलन के मुताबिक, देश की राजधानी Delhi और उसके आस-पास के समूचे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) सहित कुल 11 राज्यों में आने वाले चौबीस से अड़तालीस घंटों के भीतर मौसम बेहद आक्रामक रूप अख्तियार कर सकता है। इन चिन्हित क्षेत्रों में तेज आंधी-तूफान के साथ मूसलाधार बारिश और आसमानी बिजली गिरने की गंभीर आशंका व्यक्त की गई है। इस मौसमी बदलाव के कारण लंबे समय से भीषण लू की मार झेल रहे उत्तर और मध्य भारत के लोगों को तात्कालिक तौर पर तापमान में गिरावट के कारण गर्मी से राहत तो मिलेगी, लेकिन साथ ही अचानक आने वाले इस तूफान के चलते जनजीवन के अस्त-व्यस्त होने और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचने की भी उतनी ही बड़ी संभावना बनी हुई है।

इस भयंकर मौसमी उथल-पुथल की जो सबसे प्रमुख और मुख्य वजह सामने आ रही है, वह उत्तर-पश्चिम भारत के वायुमंडल में एक बेहद शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता और साथ ही अरब सागर से उठने वाली नम हवाओं का मैदानी इलाकों की ओर तेजी से बढ़ना है। इन दो अलग-अलग वायुमंडलीय प्रणालियों के आपस में टकराने के कारण मैदानी और पहाड़ी राज्यों के ऊपर कम दबाव का एक बेहद घना क्षेत्र विकसित हो गया है। इसके प्रभाव से Delhi, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे विशाल मैदानी इलाकों में 80 किलोमीटर प्रति घंटे की भारी रफ्तार से विनाशकारी धूलभरी आंधी और चक्रवाती हवाएं चलने का पूर्वानुमान है। इन तेज हवाओं की तीव्रता इतनी अधिक हो सकती है कि वे कमजोर मकानों की छतों, कच्चे निर्माणों, बड़े-बड़े होर्डिंग्स और पुराने पेड़ों को आसानी से उखाड़ सकती हैं, जिसके कारण सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

देश के पहाड़ी राज्यों की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए वहां के मौसम को लेकर प्रशासनिक स्तर पर चिंताएं काफी ज्यादा बढ़ गई हैं। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के सुदूरवर्ती पहाड़ी जिलों और ऊंचाई वाले पर्यटन स्थलों पर न केवल भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी दी गई है, बल्कि कई संवेदनशील इलाकों में भीषण ओलावृष्टि और अचानक बादल फटने जैसी चरम मौसमी घटनाएं भी सामने आ सकती हैं। पहाड़ों में होने वाली इस मूसलाधार बारिश के चलते प्रमुख नदी-नालों का जलस्तर अचानक बहुत तेजी से बढ़ सकता है, जिससे पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन यानी लैंडस्लाइड होने का खतरा कई गुना बढ़ गया है। स्थानीय प्रशासन ने इन राज्यों में यात्रा कर रहे पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को अगले कुछ दिनों तक बेहद सतर्क रहने, नदी तटों से दूर रहने और मौसम पूरी तरह साफ होने तक अपनी यात्रा को स्थगित रखने की सख्त सलाह दी है।

कृषि क्षेत्र पर संभावित प्रभाव

इस अचानक आई आंधी, ओलावृष्टि और मूसलाधार बारिश के कारण ग्रामीण इलाकों में किसानों की फसलों को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका बढ़ गई है। खेतों में कटाई के बाद खुले में अनाज की बोरियां और मंडियों में रखी फसलें इस बेमौसम बारिश की वजह से भीग कर बर्बाद हो सकती हैं, जिसके चलते कृषि विभागों ने किसानों को अपनी उपज को तुरंत सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर ढक कर रखने की हिदायत दी है।

उत्तर प्रदेश और बिहार के विशाल भूभाग में फैले ग्रामीण और शहरी अंचलों के लिए भी मौसम विभाग की ओर से विशेष तौर पर ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किए गए हैं। उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र के जिलों जैसे वाराणसी, प्रयागराज, जौनपुर और गोरखपुर के साथ-साथ बिहार के पटना, गया, नालंदा और रोहतास जैसे इलाकों में आंधी-तूफान के साथ भारी वज्रपात यानी आसमानी बिजली गिरने का गंभीर संकट मंडरा रहा है। इस मौसम में खुले खेतों में काम करने वाले ग्रामीणों और मवेशियों को आसमानी बिजली से सबसे ज्यादा खतरा रहता है, इसलिए आपदा प्रबंधन विभागों ने लोगों से अपील की है कि जब आसमान में बादल गरज रहे हों या बिजली कड़क रही हो, तो वे किसी भी सूरत में ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों या मोबाइल टावरों के नीचे शरण न लें, बल्कि तुरंत पक्के मकानों के भीतर चले जाएं।

इधर, देश के दक्षिणी प्रायद्वीपीय हिस्से में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून अपनी स्वाभाविक गति से आगे बढ़ते हुए केरल, कर्नाटक और महाराष्ट्र के तटीय इलाकों में पूरी तरह से सक्रिय हो चुका है। केरल के मलप्पुरम, कोझिकोड और कासरगोड जैसे तटीय जिलों में मूसलाधार से लेकर अत्यधिक भारी बारिश का सिलसिला लगातार जारी है, जिसके कारण वहां की राज्य सरकारों को रेड अलर्ट घोषित करना पड़ा है। मॉनसून की इस मजबूत सक्रियता के कारण समुद्र के भीतर बेहद ऊंची और खतरनाक लहरें उठ रही हैं, और तटीय क्षेत्रों में हवा की गति साठ से सत्तर किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई है। तटीय राज्यों के मत्स्य पालन विभागों ने किसी भी संभावित अप्रिय घटना और जानमाल के नुकसान से बचने के लिए मछुआरों को समुद्र के गहरे पानी में न जाने की सख्त हिदायत दी है और सुरक्षा नौकाओं को मुस्तैद कर दिया है।

इस बड़े मौसमी संकट को देखते हुए देश की राजधानी Delhi और उसके पड़ोसी शहरों के नागरिक उड्डयन और रेलवे यातायात विभागों ने भी अपनी आंतरिक तैयारियां पूरी कर ली हैं। इतनी तेज रफ्तार की हवाओं और धूलभरी आंधी के कारण हवाई पट्टियों पर दृश्यता यानी विजिबिलिटी के अचानक शून्य हो जाने का खतरा रहता है, जिससे उड़ानों के संचालन में भारी बाधा आ सकती है। हवाई अड्डा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि मौसम अत्यधिक खराब होता है, तो सुरक्षा कारणों से उड़ानों को डायवर्ट किया जा सकता है या उनकी लैंडिंग और टेक-ऑफ में देरी हो सकती है। इसके साथ ही, शहरों के भीतर बिजली वितरण करने वाली कंपनियों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है, क्योंकि आंधी के कारण तारों पर पेड़ गिरने से बड़े पैमाने पर बिजली कटौती हो सकती है, जिसे तुरंत ठीक करने के लिए अतिरिक्त आपातकालीन टीमें तैनात की गई हैं।

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