प्रसिद्ध कवि और प्रखर वक्ता डॉ. कुमार विश्वास ने देश विरोधी ताकतों की साजिश बताते हुए CJP की मंशा पर खड़े किए तीखे सवाल
सोशल मीडिया के इस आधुनिक दौर में कब कौन सा मुद्दा इंटरनेट पर वायरल होकर एक बड़े आंदोलन या राजनीतिक विमर्श
- डिजिटल बगावत और मीम संस्कृति के बीच देश में उठी नई सियासी बहस, इंटरनेट पर तेजी से उभरा एक अनोखा राजनीतिक मंच
- दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना नया दल, युवाओं की नाराजगी का प्रतीक
सोशल मीडिया के इस आधुनिक दौर में कब कौन सा मुद्दा इंटरनेट पर वायरल होकर एक बड़े आंदोलन या राजनीतिक विमर्श की शक्ल अख्तियार कर ले, यह कहना बेहद मुश्किल है। पिछले कुछ हफ्तों से देश के डिजिटल स्पेस और युवाओं के बीच एक अजीबोगरीब नाम वाले संगठन की धमक काफी तेजी से महसूस की जा रही है, जिसे 'कॉकरोच जनता पार्टी' के नाम से जाना जा रहा है। शुरुआत में महज एक हास्यपरक मीम और इंटरनेट मजाक के रूप में शुरू हुआ यह अभियान अब देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर तक पहुंच चुका है, जहां बड़ी संख्या में युवा और छात्र इसके बैनर तले एकत्रित होकर विरोध प्रदर्शन करते हुए नजर आए। इस संगठन का प्रभाव केवल ऑनलाइन दुनिया तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसके इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया हैंडल्स पर कुछ ही दिनों के भीतर करोड़ों की संख्या में फॉलोअर्स जुड़ चुके हैं। इस अप्रत्याशित और तेजी से बढ़ते डिजिटल उभार ने देश के बड़े-बड़े राजनीतिक दलों, सामाजिक विचारकों और सांस्कृतिक हस्तियों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है, जिसके बाद इस पर गंभीर चर्चाएं और प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने उस समय एक नया और बेहद आक्रामक मोड़ ले लिया, जब देश के जाने-माने कवि, प्रखर वक्ता और समसामयिक विषयों पर बेबाकी से राय रखने वाले डॉ. कुमार विश्वास ने इस संगठन को लेकर अपनी तीखी और बेहद कड़वी प्रतिक्रिया सार्वजनिक की। नैनीताल और देहरादून जैसे विभिन्न सांस्कृतिक मंचों पर अपने व्याख्यान के दौरान उन्होंने इस उभरते हुए डिजिटल ट्रेंड पर सीधे प्रहार किया। उन्होंने बेहद कड़े लहजे में कहा कि यह कोई सामान्य या स्वतः स्फूर्त आंदोलन नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी वैश्विक और देश विरोधी साजिश काम कर रही है। उन्होंने अपनी बात को विस्तार देते हुए कहा कि जब विदेशों में बैठे कुछ तत्व इंटरनेट के माध्यम से भारत की आंतरिक व्यवस्था और यहां के लोकतांत्रिक ताने-बाने को अस्थिर करने का प्रयास कर रहे हैं, तो ऐसे में देश के युवाओं को सतर्क रहने की आवश्यकता है। उनके इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर आते ही जंगल की आग की तरह फैल गया और इसके बाद इस संगठन के वास्तविक स्वरूप को लेकर देश भर में एक नई बहस छिड़ गई है।
कुमार विश्वास ने इस संगठन के नाम पर गहरी आपत्ति जताते हुए और इसके पीछे छिपी मानसिकता पर प्रहार करते हुए जीव विज्ञान और पारिवारिक संस्कारों का उदाहरण दिया। उन्होंने मंच से साझा किया कि बचपन में ही यह सीख दी जाती है कि कॉकरोच एक ऐसा जीव है जो हमेशा अंधेरे और गंदगी वाले कोनों में पनपता है। वह हमेशा झुंड में रहता है और घर की किसी भी सुंदर या शुभ वस्तु पर आक्रमण करके उसे खराब करने की कोशिश करता है। उन्होंने इसी परिभाषा को इस नए डिजिटल संगठन से जोड़ते हुए कहा कि यह तथाकथित दल भी देश की बनी-बनाई लोकतांत्रिक और सामाजिक व्यवस्थाओं को नष्ट करने की नीयत से काम कर रहा है। उन्होंने इस जीव को बेहद त्याज्य बताते हुए कहा कि इसकी प्रकृति ही केवल नुकसान पहुंचाने की होती है और यह जहां भी पहुंचता है, वहां केवल सड़न और व्यवधान ही पैदा करता है। इस तरह के जीवों का सामाजिक या राष्ट्रीय जीवन में कोई सकारात्मक योगदान नहीं हो सकता।
वैश्विक साजिश का आरोप
कुमार विश्वास ने वैश्विक संदर्भों का उल्लेख करते हुए सीधे तौर पर कहा कि जर्मनी, अमेरिका और तुर्की जैसे देशों में बैठे कुछ लोग सोशल मीडिया के एल्गोरिदम और लाइक्स के सहारे भारत की स्थिति को अपने पड़ोसी देशों जैसी अस्थिर और कमजोर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने साफ किया कि भारत विरोधी गिरोहों से मदद लेकर देश के भीतर एक कृत्रिम नैरेटिव तैयार किया जा रहा है, जिसका मुकाबला केवल देश के जागरूक और संस्कारी युवा ही कर सकते हैं।
अपनी बात को और अधिक आक्रामक रूप देते हुए प्रसिद्ध कवि ने देश में इस तरह के तत्वों से निपटने के तरीकों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि प्रकृति का यह नियम है कि यदि समाज में या घर में कॉकरोच पैदा होते हैं, तो उनसे निजात पाने के लिए बाजार में कीटनाशक दवाएं भी मौजूद होती हैं। उन्होंने इशारों-इशारों में देश की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र की तुलना उस कीटनाशक दवा से की जो ऐसे हानिकारक तत्वों को समाप्त करने की क्षमता रखती है। उन्होंने कुछ राज्यों की प्रशासनिक कार्रवाइयों का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार वहां पर उपद्रवी तत्वों और कानून हाथ में लेने वालों का समुचित इलाज किया जा रहा है, उसी प्रकार देश विरोधी मानसिकता से ग्रसित इन इंटरनेट संगठनों का भी समय आने पर पूरी तरह से इलाज कर दिया जाएगा। उनके इस बयान ने यह साफ कर दिया कि वे इस डिजिटल आंदोलन को देश की सुरक्षा और स्थिरता के लिए एक गंभीर खतरे के रूप में देख रहे हैं।
इस पूरी बहस की पृष्ठभूमि को देखा जाए तो यह तथाकथित पार्टी हाल ही में न्यायपालिका की एक टिप्पणी के बाद अस्तित्व में आई थी, जिसे युवाओं ने व्यंग्य और तीखे तंज के रूप में अपनाया। देश में बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं में होने वाली धांधली, जैसे नीट और अन्य सरकारी नौकरियों की प्रक्रियाओं में आ रही दिक्कतों से परेशान युवाओं ने इस नाम को अपनी हताशा व्यक्त करने का जरिया बना लिया। जंतर-मंतर पर हुए हालिया प्रदर्शन में शामिल छात्रों और युवाओं ने देश के शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए अपनी आवाज बुलंद की थी। इस आंदोलन से जुड़े लोगों का तर्क है कि जब देश की मुख्यधारा की राजनीति और व्यवस्था उनकी समस्याओं को सुनने और हल करने में नाकाम साबित हो रही है, तो वे व्यंग्य और मीम के माध्यम से अपनी बात रख रहे हैं। युवाओं की इसी भारी हताशा और गुस्से के कारण ही इस डिजिटल पेज को इतनी कम अवधि में करोड़ों लोगों का समर्थन प्राप्त हो गया, जिसने व्यवस्था के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
इस पूरे मामले को लेकर देश के विभिन्न कोनों से अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां एक तरफ कुमार विश्वास और उनके विचारों से सहमत लोगों का मानना है कि इस तरह के डिजिटल प्लेटफॉर्म देश के युवाओं को गुमराह करने और एक नकारात्मक माहौल तैयार करने के लिए विदेशी फंडिंग या टूूलकिट के तहत संचालित किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ राजनीतिक विश्लेषक इसे समाज की गहरी आर्थिक और सामाजिक बदहाली का संकेत मान रहे हैं। कई लोगों का कहना है कि सोशल मीडिया पेज पर इतनी बड़ी संख्या में युवाओं का जुटना केवल एक मजाक नहीं है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण है कि युवा वर्ग रोजगार और सुरक्षा को लेकर कितना चिंतित है। यदि समय रहते सत्ता में बैठे लोगों ने युवाओं की इस गहरी परेशानी और प्रशासनिक कमियों का संज्ञान नहीं लिया, तो आने वाले समय में यह डिजिटल बगावत किसी बड़े वास्तविक राजनीतिक संकट का रूप ले सकती है।
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