अचानक आने वाली हिचकी का वैज्ञानिक सच, जानिए क्यों हमारा शरीर पैदा करता है यह अजीब ध्वनि
मानव शरीर एक बेहद जटिल और अद्भुत मशीन की तरह काम करता है, जिसमें होने वाली हर छोटी-बड़ी गतिविधि के पीछे

- आयुर्वेद के पिटारे से निकले अचूक और प्राकृतिक नुस्खे, जो मिनटों में दूर करेंगे हिचकियों की समस्या
- लगातार आने वाली हिचकी को न करें नजरअंदाज, सामान्य सी दिखने वाली यह परेशानी हो सकती है बड़ी बीमारी का संकेत
मानव शरीर एक बेहद जटिल और अद्भुत मशीन की तरह काम करता है, जिसमें होने वाली हर छोटी-बड़ी गतिविधि के पीछे कोई न कोई ठोस वैज्ञानिक कारण छिपा होता है। इसी तरह की गतिविधियों में से एक है अचानक हिचकी आना, जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को कभी भी और कहीं भी परेशान कर सकती है। आमतौर पर जब किसी व्यक्ति को हिचकी आती है, तो हमारे समाज में पुरानी मान्यताओं के अनुसार इसे किसी अपने द्वारा याद किए जाने से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि, चिकित्सा विज्ञान और जीव विज्ञान इन पुरानी पारंपरिक धारणाओं को पूरी तरह से खारिज करते हैं। विज्ञान के अनुसार हिचकी आना पूरी तरह से एक अनैच्छिक शारीरिक प्रक्रिया है, जिसका संबंध हमारे श्वसन तंत्र और पेट के बीच मौजूद एक विशेष हिस्से से होता है और यह तब उत्पन्न होती है जब हमारे शरीर के आंतरिक संतुलन में कोई अचानक व्यवधान उत्पन्न होता है।
शारीरिक बनावट और विज्ञान के नजरिए से देखा जाए तो हमारे फेफड़ों के ठीक नीचे और पेट के ऊपरी हिस्से में एक गुंबद के आकार की मांसपेशी होती है, जिसे डायाफ्राम कहा जाता है। यह डायाफ्राम हमारे श्वसन तंत्र को सुचारू रूप से चलाने में सबसे मुख्य भूमिका निभाता है, क्योंकि जब हम सांस अंदर लेते हैं तो यह नीचे की तरफ सिकुड़ता है और सांस छोड़ते समय यह वापस अपनी सामान्य स्थिति में आ जाता है। परंतु जब किसी वजह से इस डायाफ्राम मांसपेशी में अचानक से कोई अनैच्छिक ऐंठन या सिकुड़न पैदा हो जाती है, तो हमारे फेफड़े बहुत तेजी से हवा को अंदर की तरफ खींचते हैं। इस अचानक खिंचाव के कारण हमारे गले में स्थित वोकल कॉर्ड यानी ध्वनि यंत्र का छिद्र एक झटके के साथ बंद हो जाता है, जिससे हवा का मार्ग अचानक रुक जाता है और हमारे मुंह से एक विशिष्ट ध्वनि निकलती है जिसे हम हिचकी कहते हैं। हिचकी आने के कई सामान्य और दैनिक कारण हो सकते हैं, जिनमें बहुत तेजी से बिना चबाए भोजन करना, अत्यधिक तीखा या मसालेदार खाना खाना, अचानक बहुत ठंडा या बहुत गर्म पेय पदार्थ पी लेना शामिल है। इसके अलावा अचानक से बहुत अधिक हंसना, रोना, मानसिक तनाव में आ जाना या फिर पेट में गैस और एसिडिटी का बहुत ज्यादा बढ़ जाना भी डायाफ्राम को उत्तेजित कर देता है, जिससे हिचकियों का सिलसिला शुरू हो जाता है।
भारतीय चिकित्सा पद्धति यानी आयुर्वेद में हिचकी को 'हिक्का रोग' के नाम से जाना जाता है और इसे मुख्य रूप से शरीर में वात और कफ दोष के असंतुलन का परिणाम माना जाता है। जब अनुचित खान-पान या जीवनशैली के कारण पेट में वायु यानी वात का प्रकोप बढ़ जाता है, तो वह ऊपर की ओर गति करने लगती है और प्राण वायु के मार्ग को बाधित करती है। आयुर्वेद में इस समस्या से तुरंत राहत पाने के लिए कई बेहद सरल और प्रभावशाली घरेलू उपाय बताए गए हैं, जिन्हें बिना किसी दुष्प्रभाव के आसानी से रसोई में उपलब्ध सामग्रियों से तैयार किया जा सकता है। इन उपायों का मुख्य उद्देश्य शरीर के भीतर बढ़े हुए वात दोष को शांत करना और श्वसन मार्ग की ऐंठन को दूर कर मांसपेशियों को सामान्य स्थिति में लाना होता है।
हिचकी को तुरंत रोकने के सबसे असरदार आयुर्वेदिक उपायों में मिश्री और सूखे धनिए के बीजों का मिश्रण बेहद लोकप्रिय माना जाता है। जब भी हिचकी की समस्या बहुत अधिक बढ़ जाए, तो आधा चम्मच सूखे धनिए के दाने और आधा चम्मच मिश्री को मुंह में रखकर धीरे-धीरे चबाना चाहिए और उसका रस निगलना चाहिए। इसके अलावा एक चम्मच शुद्ध शहद में थोड़ी सी काली मिर्च का पाउडर मिलाकर उसका सेवन करने से भी गले के तंत्रिका तंत्र को तुरंत आराम मिलता है और डायाफ्राम की ऐंठन शांत हो जाती है। ठंडे पानी का एक गिलास धीरे-धीरे घूंट-घूंट करके पीना या फिर मुंह में बर्फ का एक छोटा टुकड़ा रखकर उसे चूसना भी एक बेहतरीन और तुरंत असर दिखाने वाला उपाय है, क्योंकि यह हमारे तंत्रिका तंत्र को एक नया शॉक देता है जिससे हिचकी का चक्र टूट जाता है।
एक अन्य बेहद कारगर और प्राचीन आयुर्वेदिक नुस्खे के अनुसार, एक चम्मच शुद्ध गाय के घी को हल्का गुनगुना करके उसका सेवन करने से भी ऊपरी श्वसन मार्ग और पेट की वायु को तुरंत शांति मिलती है। यदि हिचकी बंद होने का नाम न ले रही हो, तो एक छोटी इलायची को कूटकर उसे एक कप पानी में अच्छी तरह से उबाल लेना चाहिए और जब पानी आधा रह जाए तो उसे छानकर हल्का गुनगुना ही धीरे-धीरे चाय की तरह पीना चाहिए। इलायची के भीतर मौजूद प्राकृतिक गुण मांसपेशियों के संकुचन को रोकने में बहुत मददगार साबित होते हैं। इसी तरह, अदरक का एक छोटा सा टुकड़ा दांतों के बीच दबाकर उसका तीखा रस धीरे-धीरे गले के नीचे उतारने से भी वेग से आ रही हिचकियों पर तुरंत लगाम लगाई जा सकती है।
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