देश-विदेश: एकजुट होकर QUAD ने पाकिस्तान और आतंक को दिखाया आईना, स्टेटमेंट जारी कर की पहलगाम हमले की निंदा।
वाशिंगटन में 1 जुलाई 2025 को आयोजित क्वाड (QUAD) विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने एकजुट होकर जम्मू-कश्मीर...
वाशिंगटन में 1 जुलाई 2025 को आयोजित क्वाड (QUAD) विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने एकजुट होकर जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल 2025 को हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की। इस हमले में 25 भारतीय नागरिकों और एक नेपाली नागरिक सहित 26 लोगों की जान गई थी। क्वाड ने अपने संयुक्त बयान में न केवल इस जघन्य कृत्य की निंदा की, बल्कि सीमापार आतंकवाद सहित सभी प्रकार के आतंकवाद और हिंसा के खिलाफ अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। बयान में स्पष्ट रूप से मांग की गई कि इस हमले के अपराधियों, आयोजकों और वित्तपोषकों को बिना किसी देरी के न्याय के कटघरे में लाया जाए। यह बयान भारत की उस लंबे समय से चली आ रही मांग को बल देता है, जिसमें वह पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित सीमापार आतंकवाद पर वैश्विक कार्रवाई की वकालत करता रहा है। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में बाइसारन घाटी, जिसे "मिनी स्विट्जरलैंड" के नाम से भी जाना जाता है, में आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी की। इस हमले में 26 लोग मारे गए, जिनमें ज्यादातर पर्यटक थे, और कई अन्य घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावरों ने पर्यटकों पर अचानक हमला किया, जिससे वहां भगदड़ मच गई। खुले मैदान में छिपने की कोई जगह न होने के कारण लोग असहाय हो गए। भारतीय खुफिया एजेंसियों ने इस हमले के लिए पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों, विशेष रूप से लश्कर-ए-तैयबा और इसके सहयोगी संगठन टीआरएफ को जिम्मेदार ठहराया। इस हमले ने न केवल कश्मीर की पर्यटन अर्थव्यवस्था को निशाना बनाया, बल्कि धार्मिक उन्माद भड़काने की कोशिश भी की, क्योंकि हमलावरों ने कथित तौर पर पीड़ितों से उनकी धार्मिक पहचान पूछी थी। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इसे "आर्थिक युद्ध" का हिस्सा बताया, जिसका उद्देश्य कश्मीर के पर्यटन उद्योग को नुकसान पहुंचाना और साम्प्रदायिक हिंसा को बढ़ावा देना था।
पहलगाम हमले के जवाब में भारत ने 7-8 मई 2025 की रात को "ऑपरेशन सिंदूर" शुरू किया। इस सैन्य कार्रवाई में भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में आतंकी ढांचों को निशाना बनाया। इस ऑपरेशन में जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे संगठनों से जुड़े 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए। इस कार्रवाई ने भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव को बढ़ा दिया, जिसके बाद दोनों देशों के बीच 11 मई को सभी सैन्य गतिविधियों को रोकने का समझौता हुआ। जयशंकर ने क्वाड बैठक से पहले और इसके दौरान यह स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ अपने नागरिकों की रक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाएगा और "परमाणु ब्लैकमेल" को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा, "भारत को अपने लोगों की रक्षा का पूरा अधिकार है, और हम इस अधिकार का उपयोग करेंगे।"
1 जुलाई 2025 को वाशिंगटन में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर, अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वॉन्ग और जापान के विदेश मंत्री ताकेशी इवाया शामिल हुए। इस बैठक में जारी संयुक्त बयान में कहा गया: "क्वाड सभी प्रकार के आतंकवाद और हिंसा, जिसमें सीमापार आतंकवाद शामिल है, की स्पष्ट रूप से निंदा करता है और आतंकवाद के खिलाफ सहयोग की अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है। हम 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं, जिसमें 25 भारतीय नागरिकों और एक नेपाली नागरिक की जान गई और कई अन्य घायल हुए।" बयान में यह भी मांग की गई कि इस हमले के अपराधियों, आयोजकों और वित्तपोषकों को तुरंत न्याय के दायरे में लाया जाए। क्वाड ने सभी संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों से अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार सहयोग करने का आह्वान किया ताकि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को मजबूती मिले। पहलगाम हमले के बाद भारत ने वैश्विक मंचों पर अपनी आवाज को बुलंद किया। जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र में एक प्रदर्शनी "द ह्यूमन कॉस्ट ऑफ टेररिज्म" का उद्घाटन किया, जिसमें भारत के 1947 से लेकर अब तक सीमापार आतंकवाद के खिलाफ संघर्ष को रेखांकित किया गया। इसके अलावा, वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) ने भी 16 जून 2025 को पहलगाम हमले की निंदा करते हुए कहा कि ऐसे हमले आतंकवादियों के लिए धन और वित्तीय सहायता के बिना संभव नहीं हो सकते। एफएटीएफ ने पाकिस्तान पर आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने में नाकामी का आरोप लगाया और उसे फिर से "ग्रे लिस्ट" में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू करने का संकेत दिया।
यूरोपीय संघ ने भी 11 जून 2025 को पहलगाम हमले की निंदा की और भारत के आतंकवाद के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के अधिकार का समर्थन किया। इसके अलावा, अमेरिकी कांग्रेस और ब्रिक्स संसदीय मंच ने भी हमले की निंदा करते हुए भारत के रुख का समर्थन किया। क्वाड का यह बयान सोशल मीडिया पर भी व्यापक रूप से चर्चा में रहा। कई भारतीय उपयोगकर्ताओं ने इसे भारत की कूटनीतिक जीत के रूप में देखा। एक एक्स पोस्ट में कहा गया, "क्वाड ने पाकिस्तान और आतंक को आईना दिखाया।" पाकिस्तान ने पहलगाम हमले में अपनी संलिप्तता से इनकार किया है, लेकिन भारतीय अधिकारियों ने इसे लश्कर-ए-तैयबा और टीआरएफ जैसे पाकिस्तान आधारित संगठनों से जोड़ा है। भारत ने एफएटीएफ और अन्य मंचों पर सबूत पेश किए हैं कि पाकिस्तान आतंकवादियों को वित्तीय और लॉजिस्टिक समर्थन प्रदान करता रहा है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने दावा किया कि भारत के साथ संघर्ष की संभावना "नगण्य" है, लेकिन भारत ने इसे खारिज करते हुए कहा कि पहलगाम हमला पाकिस्तान के आतंकवाद समर्थन का ताजा उदाहरण है।
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