राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत का बयान, दुनिया भर में सत्ता परिवर्तन के नाम पर चल रही साजिशों से प्रगतिशील देश भी त्रस्त

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने वैश्विक अस्थिरता और ‘रिजीम चेंज’ की कार्रवाइयों पर चिंता जताते हुए कहा कि फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल के घटनाक्रम सोचे-समझे षड्यंत्र का हिस्सा हैं।

Oct 20, 2026 - 13:50
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत का बयान, दुनिया भर में सत्ता परिवर्तन के नाम पर चल रही साजिशों से प्रगतिशील देश भी त्रस्त
  • फ्रांस से लेकर बांग्लादेश और नेपाल तक अस्थिरता के पीछे सोची-समझी साजिश, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने चेताया
  • वैश्विक अस्थिरता और ‘रिजीम चेंज’ पर बोले मोहन भागवत, चुनी हुई व्यवस्थाओं को अस्थिर करने के प्रयासों पर जताई चिंता
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे षड्यंत्रों को लेकर संघ प्रमुख का बड़ा बयान, सामाजिक एकता और सतर्कता की बताई जरूरत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने वैश्विक स्तर पर लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं और सरकारों में हो रहे अचानक बदलावों को लेकर चिंता व्यक्त की है। दुनिया भर में बढ़ती राजनीतिक व सामाजिक अस्थिरता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों में हाल के समय में जो घटनाएं सामने आई हैं, वे केवल स्वतःस्फूर्त जनआक्रोश या आकस्मिक बदलाव नहीं हैं, बल्कि एक सोचे-समझे षड्यंत्र का हिस्सा जान पड़ती हैं।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि आज सत्ता परिवर्तन (रिजीम चेंज) के नाम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जो रणनीतियां और कार्रवाइयां संचालित की जा रही हैं, उनसे विकासशील ही नहीं, बल्कि कई बड़े और प्रगतिशील देश भी गंभीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं।

  • चुनी हुई व्यवस्थाओं को कमजोर करने के प्रयास

संघ प्रमुख ने अपने संबोधन में रेखांकित किया कि आधुनिक दौर में किसी भी देश को सीधे युद्ध के मैदान में हराने के बजाय भीतर से कमजोर करने के तरीके अपनाए जा रहे हैं। समाज के अलग-अलग वर्गों के बीच असंतोष, मतभेद या तात्कालिक आर्थिक संकटों को हवा देकर राजनीतिक अस्थिरता पैदा की जाती है।

फ्रांस में आंतरिक असंतोष और विरोध प्रदर्शनों से लेकर बांग्लादेश में हालिया तख्तापलट और नेपाल व अल्बानिया जैसे राष्ट्रों में राजनीतिक अनिश्चितताओं का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि इन सभी घटनाओं की प्रकृति को अगर बारीकी से देखा जाए तो इनमें एक खास पैटर्न नजर आता है। व्यवस्थित ढंग से चुनी हुई सरकारों को बेदखल करने और पूरे क्षेत्र को अस्थिर करने के प्रयासों से आम जनता और देश की अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक नुकसान उठाना पड़ता है।

  • सामाजिक सद्भाव और आंतरिक सजगता पर दिया बल

भागवत के इस बयान का सीधा संदेश भारत की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने से भी जुड़ा है। उनका मानना है कि जब वैश्विक स्तर पर ऐसी ताकतों का दखल बढ़ता है, तब किसी भी संप्रभु राष्ट्र के लिए सबसे बड़ा रक्षा कवच उसकी आंतरिक एकजुटता ही होती है। उन्होंने समाज से अपील की कि सामाजिक विभाजन पैदा करने वाले प्रयासों से सतर्क रहा जाए। जब किसी राष्ट्र की जनता जाति, भाषा, वर्ग या संप्रदाय के आधार पर आपस में उलझती है, तो बाहरी ताकतों के लिए विभाजनकारी नैरेटिव को आगे बढ़ाना बेहद आसान हो जाता है। इसलिए प्रगतिशील लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को बनाए रखने के लिए नागरिकों में राष्ट्रीय हित के प्रति जागरूकता और परस्पर विश्वास आवश्यक है।

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