UP Alliance Politics - कांग्रेस सपा को खत्म करना चाहती है, 170 सीटों की सूची पर ओपी राजभर का तीखा तंज
कांग्रेस द्वारा सपा को 170 सीटों की सूची सौंपने पर यूपी के मंत्री ओपी राजभर ने तंज कसा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस यूपी में समाजवादी पार्टी को खत्म करना चाहती है।

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में विपक्षी दलों के बीच संभावित सीट बंटवारे को लेकर बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने कांग्रेस द्वारा समाजवादी पार्टी को कथित तौर पर 170 विधानसभा सीटों की सूची सौंपे जाने पर कड़ा कटाक्ष किया है। उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस ने कम सीटें मांगी हैं, उन्हें तो 200 से अधिक सीटों की मांग करनी चाहिए थी।
ओपी राजभर ने विपक्षी खेमे में जारी आंतरिक खींचतान पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस की असल मंशा क्षेत्रीय दलों को हाशिए पर धकेलने की रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस चाहती है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी का राजनीतिक अस्तित्व समाप्त हो जाए।
क्षेत्रीय दलों के उदाहरण देकर साधा निशाना
पत्रकारों से बातचीत में सुभासपा प्रमुख ने अन्य राज्यों के राजनीतिक घटनाक्रमों का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की नीतियों के कारण क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ा और बिहार में गठबंधन की राजनीति के चलते तेजस्वी यादव को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा, उसी रणनीति पर कांग्रेस उत्तर प्रदेश में भी काम कर रही है।
राजभर ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और कांग्रेस यहां मुख्य विपक्षी दल के रूप में अपनी पुरानी जमीन वापस पाना चाहती है। इसी योजना के तहत वह समाजवादी पार्टी पर दबाव बनाकर उसे कमजोर करने की कोशिश में जुटी है।
'अड़ी रही कांग्रेस तो गठबंधन टिकना नामुमकिन'
सीट बंटवारे की वास्तविक संभावनाओं पर बात करते हुए ओपी राजभर ने कहा कि उनकी जानकारी के अनुसार समाजवादी पार्टी किसी भी सूरत में कांग्रेस को इतनी बड़ी संख्या में सीटें देने के लिए तैयार नहीं होगी। सपा का कैडर और नेतृत्व राज्य में अपनी मजबूत हिस्सेदारी किसी के दबाव में छोड़ने वाला नहीं है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कांग्रेस 170 सीटों की अपनी इस मांग पर अड़ी रहती है, तो दोनों दलों के बीच चुनावी तालमेल या गठबंधन का टिक पाना असंभव होगा। राजभर के इस बयान के बाद उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में विपक्षी एकता और सीटों के फॉर्मूले को लेकर चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
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