Sugar Price Hike: त्योहारी मांग बढ़ते ही चीनी के भाव में 17 फीसदी तक की तेजी, दिल्ली से पटना तक के रेट चेक करें
त्योहारी सीजन शुरू होते ही चीनी की कीमतों में 17 फीसदी तक का उछाल दर्ज किया गया है। उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र समेत दिल्ली, लखनऊ और पटना के ताजा खुदरा व थोक रेट देखें।

- त्योहारी सीजन से पहले चीनी के दामों में उछाल, यूपी और महाराष्ट्र में 17% तक बढ़े भाव; जानें प्रमुख शहरों के ताजा रेट
- दिवाली से पहले मीठा हुआ महंगा: मांग और आपूर्ति में अंतर से चीनी की कीमतों में तेजी, सरकारी कदमों के बावजूद दबाव बरकरार
- चीनी की कीमतों ने बढ़ाई उपभोक्ताओं की चिंता; अतिरिक्त स्टॉक और ड्यूटी-फ्री आयात के बीच समझिए बाजार का पूरा गणित
दशहरा, करवाचौथ और दिवाली जैसे बड़े त्योहारों से ठीक पहले देश के घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में तेज वृद्धि दर्ज की जा रही है। त्योहारी मांग में अप्रत्याशित बढ़ोतरी और थोक मंडियों में सीमित आपूर्ति के चलते प्रमुख उत्पादक राज्यों उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में चीनी के मिल और थोक भाव में 17 प्रतिशत तक का उछाल आया है।
बाजार को संतुलित करने के लिए सरकार की ओर से अतिरिक्त मासिक कोटा जारी करने और आवश्यकता पड़ने पर शुल्क मुक्त (ड्यूटी-फ्री) आयात की अनुमति जैसे कदम उठाए जाने के बाद भी खुदरा स्तर पर कीमतें ऊंचे स्तरों पर टिकी हुई हैं। इस मूल्य वृद्धि का सीधा असर हलवाइयों, पैकेज्ड फूड कंपनियों और आम उपभोक्ताओं के त्योहारी बजट पर पड़ता दिख रहा है।
- प्रमुख शहरों में चीनी के ताजा खुदरा और थोक रेट
विभिन्न उपभोक्ता केंद्रों और थोक मंडियों में परिवहन खर्च और स्थानीय चुंगी के चलते कीमतों में अंतर देखा जा रहा है:
दिल्ली-एनसीआर: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सामान्य दानेदार चीनी का खुदरा भाव 44 से 47 रुपये प्रति किलोग्राम के दायरे में बिक रहा है, जबकि प्रीमियम या पैकेज्ड चीनी 48 से 50 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है।
लखनऊ (उत्तर प्रदेश): चीनी उत्पादन का बड़ा केंद्र होने के बावजूद लखनऊ और आसपास के जिलों में खुदरा कीमतें 43 से 46 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच दर्ज की गई हैं। थोक बाजार में मिलों के डिस्पैच रेट बढ़ने का असर खुदरा दुकानों पर दिखाई दे रहा है।
पटना (बिहार): अन्य राज्यों से माल ढुलाई और स्थानीय मांग अधिक होने के कारण पटना के खुदरा बाजार में चीनी 46 से 49 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर कारोबार कर रही है।
- क्यों बढ़ रहे हैं दाम: मांग और आपूर्ति का समीकरण
त्योहारी मांग में उछाल: रक्षाबंधन के बाद से ही हलवाई उद्योग, शीतल पेय और मिठाई निर्माताओं की ओर से थोक उठाव तेज हो जाता है, जो दिवाली और छठ तक चरम पर रहता है।
नया पेराई सत्र शुरू होने में देरी: अक्टूबर का महीना पिछले पेराई सत्र (सीजन) का अंतिम चरण होता है और मिलों में नया पेराई सत्र अक्टूबर के अंत या नवंबर में रफ्तार पकड़ता है। इसके चलते मौजूदा स्टॉक पर दबाव बढ़ जाता है।
एथेनॉल सम्मिश्रण का प्रभाव: गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे से एथेनॉल उत्पादन को दी गई प्राथमिकता के कारण चीनी के कुल उत्पादन पर उद्योग जगत की पैनी नजर बनी हुई है।
घरेलू बाजार में आपूर्ति सुचारू रखने के लिए खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय समय-समय पर मिलों के लिए घरेलू बिक्री कोटा जारी करता है। जमाखोरी रोकने के लिए थोक विक्रेताओं के स्टॉक होल्डिंग पर भी निगरानी रखी जा रही है। व्यापारियों का मानना है कि यदि आगामी हफ्तों में मिलों से नई पेराई तेजी से शुरू होती है और बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति पहुंचती है, तो नवंबर की शुरुआत तक कीमतों में स्थिरता या मामूली नरमी आ सकती है। हालांकि दिवाली तक मिठाइयों और कन्फेक्शनरी उत्पादों की लागत पर मौजूदा तेजी का असर बना रहने की संभावना है।
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