UPI Transaction Failure - यूपीआई पेमेंट फेल होने पर बैंक देगा 100 रुपये रोजाना मुआवजा, जानिए आरबीआई का रिफंड नियम

यूपीआई पेमेंट फेल होने और खाते से पैसे कटने पर तय समय में रिफंड न मिलने पर बैंक को 100 रुपये रोजाना मुआवजा देना होगा। जानिए आरबीआई के अनिवार्य नियम।

Oct 23, 2026 - 18:01
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UPI Transaction Failure - यूपीआई पेमेंट फेल होने पर बैंक देगा 100 रुपये रोजाना मुआवजा, जानिए आरबीआई का रिफंड नियम
  • RBI UPI Guidelines - खाते से पैसे कटे पर सामने वाले को नहीं मिले, ऐसे पाएं हर दिन 100 रुपये की क्षतिपूर्ति
  • Failed UPI Refund Rules - गूगल पे या फोनपे पर अटका पैसा, टी+1 और टी+5 दिन की समयसीमा और मुआवजे की पूरी प्रक्रिया
  • Digital Banking Alert - यूपीआई ट्रांजैक्शन फेल होने पर घबराएं नहीं, समय पर रिफंड न आने पर आरबीआई पोर्टल पर ऐसे करें शिकायत

डिजिटल लेनदेन के इस दौर में यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) रोजमर्रा की जरूरतों का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। किराना दुकान से लेकर बड़े भुगतानों तक लोग यूपीआई का उपयोग कर रहे हैं। हालांकि, कई बार सर्वर में तकनीकी खराबी, नेटवर्क समस्या या बैंक सिस्टम की खामी के चलते खाते से पैसे कट जाते हैं, लेकिन प्राप्तकर्ता के खाते में राशि जमा नहीं होती। ऐसे मामलों में उपभोक्ताओं को मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने उपभोक्ताओं के वित्तीय हितों की रक्षा के लिए 'टर्नअराउंड टाइम' (TAT) और दैनिक मुआवजे को लेकर सख्त दिशा-निर्देश लागू किए हैं।

आरबीआई के नियमों के अनुसार, यदि तय समयसीमा के भीतर ग्राहक के खाते में कटी हुई राशि वापस नहीं लौटाई जाती है, तो संबंधित बैंक को देरी के लिए ग्राहक को ₹100 प्रतिदिन की दर से क्षतिपूर्ति (मुआवजा) देनी होगी। यह प्रावधान डिजिटल भुगतान प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से बनाया गया है।

  • रिफंड की समयसीमा- P2P और P2M के लिए अलग मानक

लेनदेन के प्रकार के आधार पर रिफंड की अवधि तय की गई है। यहां 'T' का अर्थ ट्रांजैक्शन (लेनदेन) वाले दिन से है:

पहला, व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) ट्रांसफर: यदि आपने किसी मित्र या परिचित के खाते में पैसे भेजे, आपके खाते से डेबिट हो गया लेकिन सामने वाले के खाते में क्रेडिट नहीं हुआ, तो यह राशि T+1 दिन (लेनदेन का दिन + एक कार्यदिवस) के भीतर आपके खाते में स्वतः वापस आ जानी चाहिए।

दूसरा, मर्चेंट भुगतान (P2M): यदि आपने किसी दुकान, मॉल या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भुगतान किया, आपके खाते से राशि कट गई लेकिन विक्रेता को पुष्टि नहीं मिली, तो ऐसे मामलों में ऑटो-रिवर्सल के लिए T+5 दिन का समय निर्धारित है।

यदि निर्धारित दिनों के बाद भी राशि वापस नहीं आती है, तो T+1 या T+5 दिन की मियाद खत्म होने के अगले दिन से लेकर पैसा खाते में आने तक प्रतिदिन ₹100 का हर्जाना सीधे ग्राहक के खाते में जमा करना बैंक की कानूनी जिम्मेदारी है।

  • ट्रांजैक्शन फेल होने पर तुरंत क्या कदम उठाएं?

जब भी कोई यूपीआई लेनदेन फेल हो और बैंक खाते से पैसे कट जाएं, तो सबसे पहले घबराकर तुरंत दोबारा भुगतान करने से बचें। इसके बाद व्यवस्थित रूप से इन चरणों का पालन करें:

डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखें: अपने संबंधित यूपीआई ऐप (जैसे PhonePe, Google Pay, Paytm या BHIM) की ट्रांजैक्शन हिस्ट्री में जाएं। वहां दिख रहे 12 अंकों के यूपीआई ट्रांजैक्शन आईडी (UTR नंबर), तारीख, समय और बैंक के डेबिट मैसेज का स्क्रीनशॉट संभालकर रखें।

ऐप के माध्यम से टिकट रेज करें: पेमेंट ऐप के 'हेल्प' या 'हैविंग इश्यूज' विकल्प में जाकर संबंधित ट्रांजैक्शन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराएं। इससे सिस्टम में डिस्प्यूट दर्ज हो जाता है।

बैंक कस्टमर केयर से संपर्क: यदि ऐप स्तर पर समाधान न मिले, तो अपने बैंक की हेल्पलाइन पर संपर्क करें। बैंक प्रतिनिधि से शिकायत संख्या (कंप्लेंट रेफरेंस नंबर) अवश्य लें।

नोडल अधिकारी तक पहुंच: यदि निर्धारित समयसीमा बीत जाने के बाद भी राशि या नियमानुसार मुआवजा नहीं मिलता है, तो बैंक के प्रधान शिकायत निवारण अधिकारी (Principal Nodal Officer) को लिखित शिकायत भेजें।

समाधान न होने पर आरबीआई सीएमएस पोर्टल का है विकल्प

यदि बैंक में शिकायत दर्ज कराने के 30 दिनों के भीतर संतोषजनक समाधान नहीं मिलता है या बैंक आपकी शिकायत को खारिज कर देता है, तो उपभोक्ता भारतीय रिजर्व बैंक के पास जा सकते हैं।

इसके लिए केंद्रीय बैंक के एकीकृत लोकपाल तंत्र (Integrated Ombudsman Scheme) के तहत आधिकारिक कंप्लेंट मैनेजमेंट सिस्टम पोर्टल (cms.rbi.org.in) पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है। पोर्टल पर बैंक का नाम, ट्रांजैक्शन का विवरण और पूर्व में की गई शिकायत की प्रति अपलोड करके विधिक राहत और मुआवजे का दावा किया जा सकता है।

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