चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव: पांच साल में पांच मेयर के बाद भी भाजपा का मुख्य चुनावी चेहरा होंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में पांच साल में पांच मेयर बदलने के बाद भाजपा एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे और राष्ट्रीय मुद्दों के सहारे चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में है।

- स्थानीय एंटी-इंकंबेंसी से निपटने को राष्ट्रीय मुद्दों का सहारा, चंडीगढ़ निगम चुनाव में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने
- चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव का रण: भाजपा का दांव मोदी के नाम पर, कांग्रेस स्थानीय मुद्दों की घेराबंदी में जुटी
- पांच साल-पांच मेयर का रिकॉर्ड: चंडीगढ़ में भाजपा फिर राष्ट्रीय चेहरे के सहारे, विपक्ष ने बनाया स्थानीय विफलता का मुद्दा
चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव की सरगर्मियां तेज होते ही प्रमुख राजनीतिक दलों की चुनावी बिसात स्पष्ट होने लगी है। पिछले पांच वर्षों के कार्यकाल के दौरान शहर में पांच अलग-अलग मेयर बनने के बाद भी भारतीय जनता पार्टी इस चुनाव में किसी स्थानीय चेहरे के बजाय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्र सरकार की नीतियों को ही अपना प्रमुख प्रचार आधार बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। दूसरी तरफ, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस स्थानीय स्तर पर सत्ता विरोधी रुझान (Anti-Incumbency), विकास कार्यों में गतिरोध और पार्षदों के असंतोष को भुनाने की रणनीति पर काम कर रही है।
चंडीगढ़ नगर निगम का प्रशासनिक ढांचा इस मायने में अनूठा रहा है कि यहां प्रतिवर्ष मेयर का चुनाव होता है, जिसके चलते किसी एक नेता को पूरे पांच साल के कार्यकाल की कमान नहीं मिलती। भाजपा के पिछले कार्यकाल में भी हर साल नए मेयर के कार्यभार संभालने की व्यवस्था रही। इस व्यवस्था के चलते स्थानीय स्तर पर किसी एक मजबूत नगर नेतृत्व की पहचान उभरने के बजाय दलगत निर्णय ज्यादा प्रभावी रहे हैं।
- भाजपा की राष्ट्रीय बनाम स्थानीय रणनीति
भाजपा रणनीतिकारों का मानना है कि केंद्र शासित प्रदेश होने के कारण चंडीगढ़ का विकास सीधे तौर पर केंद्र सरकार की नीतियों और बजटीय आवंटन से जुड़ा हुआ है। पार्टी नेतृत्व का आकलन है कि शहर के शहरी और मध्यमवर्गीय मतदाताओं के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि सबसे बड़ा सकारात्मक कारक है। इसी आधार पर स्थानीय कमियों या व्यक्तिगत पार्षदों के खिलाफ संभावित नाराजगी को राष्ट्रीय विकास योजनाओं, सुशासन के दावों और केंद्र की उपलब्धियों के जरिए साधने की तैयारी की जा रही है। चुनावी सभाओं और वार्ड स्तर के संपर्क अभियानों में भी केंद्रीय परियोजनाओं, आधारभूत ढांचे के आधुनिकीकरण और केंद्र शासित प्रदेश को मिलने वाले विशेष सहयोग को प्रमुखता से रखा जाएगा।
- विपक्ष का स्थानीय विफलता और नागरिक समस्याओं पर ध्यान
विपक्षी खेमे में कांग्रेस ने अपनी रणनीति को पूरी तरह स्थानीय समस्याओं पर केंद्रित रखने का फैसला किया है। कांग्रेस का आरोप है कि पिछले पांच वर्षों में बार-बार नेतृत्व बदलने से निगम के कामकाज की निरंतरता प्रभावित हुई है और नागरिक बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझते रहे हैं।
पानी और सीवरेज के बिल, पार्किंग व्यवस्था, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट), सड़कों की मरम्मत और गांवों व कॉलोनियों में बुनियादी ढांचे की स्थिति जैसे मुद्दे विपक्ष के प्रचार का मुख्य हिस्सा बनने जा रहे हैं। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि नगर निगम का काम स्थानीय साफ-सफाई और नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है, इसलिए चुनाव को राष्ट्रीय विमर्श में भटकाने के बजाय वार्ड स्तर की जवाबदेही पर लड़ा जाना चाहिए।
चंडीगढ़ में वार्डों का सामाजिक और भौगोलिक स्वरूप काफी विविधतापूर्ण है। एक तरफ सुनियोजित सेक्टर हैं तो दूसरी तरफ पुनर्वास कॉलोनियां और ग्रामीण क्षेत्र शामिल हैं। पिछले चुनाव में आम आदमी पार्टी के प्रवेश के बाद यह मुकाबला पहले से ही त्रिकोणीय और कड़ा हो चुका है। ऐसे में भाजपा द्वारा शीर्ष राष्ट्रीय नेतृत्व के प्रभाव का उपयोग करना और कांग्रेस द्वारा वार्ड-वार स्थानीय असंतोष को संगठित करना आने वाले दिनों में मुकाबले को काफी दिलचस्प बनाने वाला है।
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