Tech Corporate Reality: बिना काम किए 2 साल तक मिले 4.5 करोड़ रुपये, टेक दिग्गज कंपनी के कर्मचारी का दावा- 'सपना नहीं, बुरे सपने जैसा था'
एक बड़ी टेक कंपनी के कर्मचारी ने दावा किया है कि कंपनी में फेरबदल के बाद लगभग दो साल तक उसने कोई काम नहीं किया और सालाना 2.75 लाख डॉलर वेतन पाता रहा। सोशल मीडिया पर इसे लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

वैश्विक टेक जगत में बड़े पैमाने पर जारी छंटनी और वर्कप्लेस कल्चर के बीच एक कर्मचारी का चौंकाने वाला अनुभव सोशल मीडिया पर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। एक प्रमुख टेक दिग्गज कंपनी में काम करने वाले कर्मचारी ने साझा किया कि कंपनी में हुए बड़े आंतरिक पुनर्गठन (Reorganization) के चलते वह लगभग दो वर्षों तक बिना किसी ठोस काम और जिम्मेदारी के पद पर बना रहा। इस दौरान उसे सालाना करीब 2,75,000 डॉलर (भारतीय मुद्रा में लगभग 2.3 करोड़ रुपये प्रति वर्ष, यानी दो साल में लगभग 4.5 करोड़ रुपये से अधिक) का वेतन बिना किसी रुकावट के मिलता रहा।
कर्मचारी के अनुसार, कई लोगों को यह स्थिति किसी 'ड्रीम जॉब' की तरह लग सकती है, लेकिन वास्तव में यह उसके लिए मानसिक तनाव और करियर के लिहाज से एक बुरे सपने जैसा अनुभव साबित हुआ।
पदोन्नति के साथ न्यूयॉर्क ट्रांसफर, फिर बदल गई पूरी व्यवस्था
कर्मचारी ने ऑनलाइन फोरम पर अपनी कहानी साझा करते हुए बताया कि वह पिछले करीब एक दशक से संबंधित टेक कंपनी का हिस्सा है और अलग-अलग भूमिकाएं निभा चुका है। उसे एक बड़ी पदोन्नति के साथ नई टीम में शामिल होने का अवसर मिला, जिसके लिए उसने अपने परिवार को वेस्ट कोस्ट से न्यूयॉर्क शिफ्ट कर लिया।
जिस दिन उसने नई टीम में योगदान दिया, उसी दिन कंपनी में बड़े पैमाने पर पुनर्गठन की घोषणा हो गई। इस फेरबदल में उस मैनेजर और डायरेक्टर दोनों को कंपनी से बाहर कर दिया गया, जिन्होंने उसे हायर किया था। इसके बाद न तो कोई नया कार्यभार सौंपा गया और न ही नए नेतृत्व की ओर से कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए।
'कैफे में वीडियो देखना और शहर में घूमना ही रह गया था काम'
कर्मचारी का दावा है कि यह स्थिति केवल कुछ ईमेल भेजने या औपचारिक बैठकों तक सीमित नहीं थी, बल्कि व्यावहारिक रूप से उसे कोई भी प्रोजेक्ट आवंटित नहीं किया गया था। वह दफ्तर जाता, कंपनी के कैफे में बैठकर वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म देखता और लंच के लिए नए-नए स्थानों पर जाता था।
उसने लिखा कि उसने मैनहट्टन का कोना-कोना पैदल नाप लिया। शुरुआत में उसे अपनी उपयोगिता पर संदेह हुआ और उसने काम मांगने की कोशिश भी की, लेकिन व्यवस्था इतनी अव्यवस्थित थी कि किसी ने ध्यान नहीं दिया। उसे यह भी लगा कि वह कंपनी पर एक 'अनुपयोगी खर्च' बन चुका है। लंबे समय तक काम से दूर रहने के कारण उसकी पेशेवर कार्यकुशलता और आत्मविश्वास पर भी गहरा असर पड़ा।
इस खुलासे के बाद ऑनलाइन मंचों पर मिली-जुली और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई यूजर्स का मानना है कि यह पूरी तरह से बड़ी टेक कंपनियों के भीतर प्रबंधन की विफलता और नौकरशाही की खामियों को दर्शाता है, जहां कर्मचारियों को प्रोजेक्ट्स में सही तरीके से शामिल नहीं किया जाता।
वहीं, कुछ लोगों ने टिप्पणी की कि बिना उत्पादकता के इतना बड़ा वेतन लेते रहना अनैतिक है और कर्मचारी को स्वयं आगे बढ़कर प्रबंधन को सचेत करना चाहिए था। इसके विपरीत, कई अन्य पेशेवरों का तर्क था कि जब बड़ी कंपनियां बिना सोचे-समझे छंटनी करती हैं, तो सिस्टम की खामी का लाभ उठाने के लिए कर्मचारी को दोष नहीं दिया जा सकता। कर्मचारी ने अंततः बताया कि अब वह एक नई भूमिका में आ चुका है, लेकिन दो साल की अकर्मण्यता के बाद दोबारा लय हासिल करना उसके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
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