पैरा एशियाई खेल 2026: नागोया में नहीं मिले हर्डल रिंग्स, निषाद कुमार ने देसी जुगाड़ से वॉर्मअप कर जीता गोल्ड
जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियाई पैरा खेल 2026 में अभ्यास उपकरण न मिलने पर निषाद कुमार ने बोतलों व पट्टियों के जुगाड़ से वॉर्मअप किया और टी47 लंबी कूद में स्वर्ण पदक हासिल किया।

- जापान में अभ्यास के उपकरण न मिलने पर भी नहीं थमे निषाद कुमार, लंबी कूद स्पर्धा में रचा स्वर्णिम इतिहास
- बोतल और पट्टियों से नापा ट्रैक: निषाद कुमार ने 7.11 मीटर की छलांग लगाकर भारत की झोली में डाला दूसरा स्वर्ण
- सुविधाओं की कमी पर भारी पड़ा भारतीय जज्बा, पैरा एथलीट निषाद कुमार ने देसी तकनीक से तय किया जीत का सफर
जापान के आइची-नागोया में आयोजित एशियाई पैरा खेल 2026 से भारतीय खेल जगत के लिए एक प्रेरक और अनोखी कहानी सामने आई है। भारतीय पैरा एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की टी47 लंबी कूद स्पर्धा में 7.11 मीटर की शानदार छलांग लगाकर देश के लिए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इस जीत का सबसे उल्लेखनीय पहलू वह परिस्थिति रही, जिसमें निषाद ने मुकाबले से ठीक पहले अभ्यास किया। मुख्य इवेंट से पहले जब उन्हें अभ्यास स्थल पर निर्धारित 'हर्डल रिंग्स' उपलब्ध नहीं कराए गए, तो उन्होंने हार मानने या शिकायत करने के बजाय पारंपरिक 'देसी जुगाड़' से ट्रैक पर ही अपना वॉर्मअप पूरा किया।
- सोशल मीडिया पर साझा किया था अभ्यास का वीडियो
प्रतियोगिता से पूर्व अभ्यास सत्र के दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें निषाद कुमार एथलेटिक्स ट्रैक पर अभ्यास के लिए जरूरी उपकरण न होने की स्थिति समझाते दिखे। वीडियो में निषाद ने स्थिति को सकारात्मक रूप में लेते हुए कहा कि आज उनका हर्डल रिंग्स वर्कआउट तय था, लेकिन आयोजकों के पास रिंग्स उपलब्ध नहीं थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपकरण का न होना अभ्यास रोकने का कारण नहीं बन सकता, इसलिए वे बिना हर्डल रिंग्स के ही अपना सत्र पूरा करेंगे।
- बोतल, स्ट्रेचेबल पट्टियों और डंबल से मापा ट्रैक
हर्डल रिंग्स दरअसल प्लास्टिक के समतल छल्ले होते हैं, जिनका उपयोग एथलीट अपने पैरों के तालमेल, गति और शारीरिक संतुलन (फुटवर्क और एजिलिटी) को साधने के लिए करते हैं। इनकी अनुपस्थिति में निषाद ने मैदान पर पानी की बोतलें, स्ट्रेचेबल पट्टियां, डंबल और गेंद को निश्चित दूरी पर कदमों से नापकर रखा। इसके बाद उन्होंने इसी देसी व्यवस्था के सहारे अपनी तीन श्रेणियों की हर्डल जंप्स ड्रिल पूरी की। मैदान पर उनका यह व्यावहारिक समाधान ट्रैक पर मौजूद अन्य लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया।
- पदक मुकाबले में दिखाया तकनीकी दबदबा
अभ्यास की इस बाधा को पार करने के बाद जब निषाद टी47 लंबी कूद के फाइनल में उतरे, तो उन्होंने शुरुआत से ही बढ़त बना ली। उन्होंने अपनी पहली ही छलांग 6.95 मीटर की लगाई, जिसने उन्हें सीधे तालिका में शीर्ष पर पहुंचा दिया। इसके बाद अपने तीसरे और पांचवें प्रयास में उन्होंने 7.11 मीटर की दूरी तय कर स्वर्ण पदक सुनिश्चित किया। इस स्पर्धा में उज्बेकिस्तान के ओमादबेक खासानाव 6.99 मीटर के साथ रजत पदक पर रहे, जबकि श्रीलंका के मोहम्मदु सफरन ने 6.55 मीटर की छलांग के साथ कांस्य पदक हासिल किया।
- ऊंची कूद के विशेषज्ञ का लंबी कूद में सफल पदार्पण
हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले के अंब उपमंडल अंतर्गत बदायूं गांव के रहने वाले निषाद कुमार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊंची कूद (हाई जंप) के स्थापित एथलीट रहे हैं। वे टोक्यो 2020 और पेरिस 2024 पैरालिंपिक में भारत के लिए ऊंची कूद में दो बार रजत पदक जीत चुके हैं। बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर लंबी कूद स्पर्धा में यह उनका पहला प्रमुख मुकाबला था, जहां उन्होंने सीधे स्वर्ण पदक जीतकर अपनी तकनीकी क्षमता और मानसिक दृढ़ता को साबित किया।
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