लेबनान युद्ध विराम के बीच मध्य पूर्व में भड़का महासंग्राम, ईरान और हिज्बुल्लाह ने इजरायल पर दागीं ताबड़तोड़ मिसाइलें
मध्य पूर्व में जारी भीषण तनाव के बीच एक बार फिर युद्ध की लपटें तेजी से भड़क उठी हैं, जब ईरान और उसके सहयोगी संगठन
- हवाई हमलों से दहल उठे इजरायली शहर, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दी तबाही मचाने और अमेरिकी ठिकानों को उड़ाने की सीधी चेतावनी
- जवाबी कार्रवाई के लिए इजरायली सेना प्रमुख ने मांगी हरी झंडी, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध रोकने की कूटनीतिक कोशिशें तेज
मध्य पूर्व में जारी भीषण तनाव के बीच एक बार फिर युद्ध की लपटें तेजी से भड़क उठी हैं, जब ईरान और उसके सहयोगी संगठन हिज्बुल्लाह ने मिलकर इजरायल के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त मिसाइल हमला बोल दिया। इस अचानक हुए भीषण हमले के बाद पूरे इजरायल में सुरक्षा सायरन गूंज उठे, जिसके कारण लाखों नागरिकों को अपनी जान बचाने के लिए बंकरों और सुरक्षित स्थानों की ओर भागना पड़ा। युद्ध के मैदान से आ रही शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, यह हमला इतनी तेजी और बड़ी संख्या में मिसाइलों के साथ किया गया कि इजरायल की अत्याधुनिक हवाई रक्षा प्रणालियों को भी उन्हें रोकने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ा। इस हमले ने पिछले कुछ समय से चल रहे बेहद नाजुक और अस्थिर युद्ध विराम को पूरी तरह से मलबे में तब्दील कर दिया है और पूरे क्षेत्र को एक ऐसे विनाशकारी क्षेत्रीय युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है, जिसकी चपेट में कई और देश भी आ सकते हैं।
इस नए और बड़े सैन्य संकट की शुरुआत तब हुई जब हिज्बुल्लाह ने उत्तरी इजरायल के सीमावर्ती इलाकों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर रॉकेटों की बौछार कर दी। हिज्बुल्लाह द्वारा किए गए इस हमले के जवाब में इजरायली वायुसेना ने लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में मौजूद हिज्बुल्लाह के मुख्य नियंत्रण केंद्रों को निशाना बनाते हुए बेहद आक्रामक हवाई हमले किए। इस जवाबी कार्रवाई में भारी तबाही हुई, जिसके तुरंत बाद ईरान सीधे तौर पर इस युद्ध में कूद पड़ा। ईरान की सेना ने अपने सहयोगी संगठन पर हुए हमले का बदला लेने और इजरायल को पीछे हटने पर मजबूर करने के उद्देश्य से एक के बाद एक कई बैलिस्टिक मिसाइलें इजरायल के महत्वपूर्ण हवाई ठिकानों, विशेष रूप से रामत डेविड एयरबेस की ओर रवाना कर दीं। इस संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद स्थिति इतनी बेकाबू हो चुकी है कि तेल अवीव से लेकर हाइफा तक के आसमान में केवल मिसाइलों और इंटरसेप्टर के टकराने के धमाके सुनाई दे रहे हैं।
ईरान की शक्तिशाली अर्धसैनिक बल 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स' ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए एक बेहद आक्रामक और सख्त आधिकारिक बयान जारी किया है। सेना की ओर से स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि यह मिसाइल हमला इजरायल द्वारा बेरूत में की गई बमबारी और संप्रभुता के उल्लंघन के खिलाफ महज एक शुरुआती चेतावनी है। इस बयान में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि इजरायल ने इस हमले के जवाब में ईरान की धरती या उसके सहयोगियों पर कोई भी नया सैन्य कदम उठाने का दुस्साहस किया, तो आगामी हमले कहीं अधिक व्यापक, विनाशकारी और घातक होंगे। ईरान ने अपनी इस चेतावनी के दायरे को बढ़ाते हुए इस बात को भी साफ कर दिया है कि भविष्य में होने वाली किसी भी बड़ी सैन्य कार्रवाई के दौरान केवल इजरायली ठिकाने ही नहीं, बल्कि समूचे क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने और जलमार्गों पर तैरते युद्धपोत भी सीधे निशाने पर होंगे। इस बड़े मिसाइल हमले के बाद वैश्विक बाजारों में हड़कंप मच गया है और अंतरराष्ट्रीय बाजार खुलते ही कच्चे तेल की कीमतों में तीन प्रतिशत से अधिक का भारी उछाल देखा गया है। इसके साथ ही इजरायल ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए गाजा पट्टी से लगी अपनी सभी प्रमुख सीमाओं और व्यापारिक क्रॉसिंग को अनिश्चितकाल के लिए बंद कर दिया है, जिससे राहत सामग्री की आपूर्ति पूरी तरह ठप हो गई है।
इस भीषण मिसाइल हमले के तुरंत बाद इजरायल के शीर्ष सैन्य नेतृत्व ने एक आपातकालीन सुरक्षा समीक्षा बैठक बुलाई, जिसमें मौजूदा हालात और जवाबी रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। इजरायली सेना के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल ने देश के राजनीतिक नेतृत्व को जमीनी हकीकत से अवगत कराते हुए कड़ा रुख अपनाया है और साफ किया है कि देश की सेना दुश्मन को उसकी इस जुर्रत का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। सैन्य प्रमुख ने बयान जारी करते हुए कहा कि जैसे ही सरकार की ओर से हरी झंडी दिखाई जाएगी, वैसे ही सेना पूरी ताकत के साथ ईरान और उसके सहयोगियों पर अब तक का सबसे भीषण और निर्णायक हमला करेगी ताकि भविष्य में कोई ऐसा दुस्साहस न कर सके। इजरायली रक्षा अधिकारियों का कहना है कि ईरान ने एक बार फिर आतंक का रास्ता चुनकर बहुत बड़ी ऐतिहासिक भूल की है, जिसकी कीमत उसे और उसकी अर्थव्यवस्था को चुकानी पड़ेगी।
वैश्विक स्तर पर इस भयंकर सैन्य टकराव को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर भी बेहद नाटकीय और तेज घटनाक्रम देखने को मिल रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति प्रशासन ने इस हमले के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री से सीधे फोन पर संपर्क साधने और उन्हें इस हमले का तुरंत सैन्य जवाब न देने के लिए मनाने की रणनीति अपनाई है। वाशिंगटन से आ रही खबरों के मुताबिक, अमेरिकी नेतृत्व का मानना है कि दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर हमले करके अपने सैन्य दांव खेल लिए हैं, इसलिए अब इस सिलसिले को यहीं रोक देना चाहिए ताकि युद्ध और अधिक न फैले। अमेरिकी प्रशासन इस बात को लेकर बेहद चिंतित है कि अगर इजरायल ने ईरान पर दोबारा बड़ा पलटवार किया, तो मध्य पूर्व में जारी दीर्घकालिक शांति वार्ता और कूटनीतिक समझौतों की कोशिशें हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगी, जिसे बहाल करना किसी भी अंतरराष्ट्रीय महाशक्ति के लिए असंभव हो जाएगा।
तनाव की इस बेहद नाजुक घड़ी में ईरान के विदेश मंत्रालय ने भी अपनी कूटनीतिक सक्रियता को काफी बढ़ा दिया है और संकट के समाधान के लिए विभिन्न देशों के साथ सीधे संवाद के चैनल खोल दिए हैं। ईरानी राजनयिकों ने ब्रिटेन, तुर्की और इस मामले में मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तानी प्रतिनिधियों से अलग-अलग दौर की लंबी बातचीत की है, जिसमें उन्होंने इजरायल द्वारा लेबनान में किए जा रहे संघर्ष विराम के लगातार उल्लंघनों को इस तनाव की मुख्य वजह बताया है। ईरान का स्पष्ट रुख है कि जब तक इजरायल लेबनान से अपनी सेनाएं पूरी तरह वापस नहीं बुलाता और वहां हवाई हमले बंद नहीं करता, तब तक क्षेत्र में स्थायी शांति की स्थापना की कल्पना भी नहीं की जा सकती। हालांकि, इजरायल इस बात पर अड़ा हुआ है कि वह अपनी उत्तरी सीमा पर रहने वाले नागरिकों की सुरक्षा के लिए हिज्बुल्लाह के बुनियादी ढांचे को नेस्तनाबूद करना जारी रखेगा, जिससे दोनों पक्षों के बीच सहमति का कोई रास्ता निकलता नहीं दिख रहा है।
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