कुशीनगर में विवादित जमीन पर कब्जे को लेकर भारी हंगामा, पुलिसकर्मियों और महिलाओं के बीच तीखी झड़प
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद के कसया थाना क्षेत्र अंतर्गत महुई खुर्द गांव में उस समय स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई, जब
- न्यायालय के स्थगनादेश के बाद भी पैमाइश कराने पहुंची प्रशासनिक टीम, धक्का-मुक्की में बुजुर्ग महिला का हाथ टूटा
- पुलिसिया कार्रवाई पर सत्तापक्ष के जन प्रतिनिधियों ने उठाए गंभीर सवाल, सैकड़ों ग्रामीणों पर मुकदमा दर्ज होने से तनाव
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जनपद के कसया थाना क्षेत्र अंतर्गत महुई खुर्द गांव में उस समय स्थिति बेहद तनावपूर्ण हो गई, जब एक विवादित जमीन पर पट्टा धारक को कब्जा दिलाने और पैमाइश कराने पहुंची पुलिस व राजस्व विभाग की टीम के सामने स्थानीय महिलाएं सुरक्षा दीवार बनकर खड़ी हो गईं। यह पूरा विवाद दो पक्षों के बीच लंबे समय से चली आ रही भूमि संबंधी रंजिश का परिणाम है। प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में देखते ही देखते माहौल इतना गरमा गया कि खाकी वर्दीधारियों और गांव की महिलाओं के बीच जमकर धक्का-मुक्की शुरू हो गई। इस झड़प में दोनों तरफ से तीखी बहस हुई और कानून व्यवस्था बनाए रखने के दावे पूरी तरह से ध्वस्त होते नजर आए। महिलाएं प्रशासनिक टीम की इस कार्रवाई का पुरजोर विरोध कर रही थीं, जिससे स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा और यह साधारण विवाद एक बड़े संघर्ष में तब्दील हो गया।
महुई खुर्द गांव के रहने वाले दो पक्षों के बीच जिस भूखंड को लेकर यह पूरा बवाल खड़ा हुआ, उस पर मालिकाना हक और कब्जेदारी को लेकर पूर्व से ही विवाद चल रहा है। प्रथम पक्ष का दावा है कि उक्त भूमि का पट्टा उनके नाम पर आवंटित है, इसलिए वे इस पर अपना वैधानिक निर्माण कार्य कराने का अधिकार रखते हैं। दूसरी ओर, द्वितीय पक्ष का स्पष्ट मत है कि इस पूरी विवादित भूमि पर देश की दीवानी अदालत द्वारा स्थगन आदेश यानी स्टे जारी किया गया है, जिसके तहत मुकदमे के अंतिम निस्तारण तक यथास्थिति बनाए रखनी अनिवार्य है। जब प्रथम पक्ष के लोगों ने विवादित स्थल पर निर्माण कार्य आरंभ करने का प्रयास किया, तो द्वितीय पक्ष के परिवारों ने वहां पहुंचकर काम को बीच में ही रुकवा दिया था। इसके बाद प्रथम पक्ष द्वारा जिला प्रशासन और तहसील स्तर पर शिकायत दर्ज कराई गई, जिस पर संज्ञान लेते हुए स्थानीय उपजिलाधिकारी और भारी पुलिस बल मौके पर यथास्थिति का आकलन करने और कब्जा सुनिश्चित कराने के लिए पहुंच गया।
प्रशासनिक टीम जब गांव में दाखिल हुई, तो द्वितीय पक्ष के महिलाओं और पुरुषों ने उन्हें अदालत द्वारा जारी किया गया स्थगनादेश का दस्तावेज दिखाया। ग्रामीणों का आरोप है कि मौके पर मौजूद तहसील कर्मियों और पुलिस अधिकारियों ने न्यायिक आदेश की प्रतियों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया और जबरन पैमाइश की प्रक्रिया शुरू करने की कोशिश की। अदालती आदेश की अवहेलना होते देख गांव की महिलाएं आक्रोशित हो गईं और उन्होंने पैमाइश करने वाले उपकरणों के आगे खड़े होकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। इसी दौरान कानून व्यवस्था संभालने के नाम पर तैनात पुरुष पुलिसकर्मियों और प्रदर्शनकारी महिलाओं के बीच हिंसक धक्का-मुक्की शुरू हो गई। देखते ही देखते पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा महिलाओं के साथ कथित तौर पर बदसलूकी की जाने लगी, जिससे वहां मौजूद अन्य ग्रामीण भी प्रशासनिक अमले के खिलाफ लामबंद होने लगे। स्थानीय निवासियों द्वारा बनाए गए कुछ वीडियो में यह स्पष्ट रूप से देखा गया कि पुरुष पुलिसकर्मियों और महिलाओं के बीच हाथापाई हो रही है। इस विवाद के दौरान एक बुजुर्ग महिला गंभीर रूप से चोटिल हो गई, जिसका हाथ टूट गया। बुजुर्ग महिला को चोट लगने की खबर जैसे ही गांव में फैली, वैसे ही पूरा इलाका रणक्षेत्र में तब्दील हो गया और आक्रोशित ग्रामीणों ने ईंट-पत्थर उठाकर प्रशासनिक टीम को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
इस पूरे हिंसक टकराव के बाद पुलिस प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिस टीम पर हमला करने और शांति भंग करने के गंभीर आरोपों के तहत कार्रवाई शुरू कर दी। स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए नामजद और अज्ञात सहित कुल एक सौ चौंतीस लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस मुकदमे के दर्ज होने के बाद से ही महुई खुर्द गांव में भय और सन्नाटे का माहौल व्याप्त है, क्योंकि पुलिस की टीमें आरोपियों की धरपकड़ के लिए लगातार दबिश दे रही हैं। गांव के अधिकांश पुरुष गिरफ्तारी के डर से घरों से बाहर चले गए हैं, जबकि महिलाएं पुलिस की एकपक्षीय और बर्बर कार्रवाई के खिलाफ न्याय की गुहार लगा रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस ने अपनी गलती छिपाने के लिए पूरे गांव पर सामूहिक रूप से कानूनी शिकंजा कस दिया है।
इस संवेदनशील मामले ने उस समय राजनीतिक और सामाजिक रूप से तूल पकड़ लिया, जब क्षेत्र के स्थानीय लोकसभा सांसद और सत्ताधारी दल के जिला पदाधिकारी पीड़ित परिवारों से मिलने उनके घर पहुंचे। जनप्रतिनिधियों ने पीड़ित पक्ष के लोगों से मुलाकात कर पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी ली और घायल बुजुर्ग महिला की स्थिति को देखा। पीड़ित परिवार की आपबीती सुनने के बाद सांसद ने इस पूरी कार्रवाई पर गहरा क्षोभ व्यक्त किया और जिला मजिस्ट्रेट तथा पुलिस अधीक्षक से सीधे संपर्क साधकर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। जनप्रतिनिधियों का स्पष्ट आरोप है कि कसया तहसील प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने इस मामले में पूरी तरह से निष्पक्षता को ताक पर रखकर एकपक्षीय भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि जब मामला देश की अदालत में विचाराधीन था और स्थगनादेश प्रभावी था, तब पुलिस को इस तरह से बल प्रयोग करके किसी भी पक्ष को लाभ पहुंचाने का प्रयास नहीं करना चाहिए था।
इस घटना के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी सफाई में कहा है कि वे केवल मौके पर कानून व्यवस्था की स्थिति का जायजा लेने और दोनों पक्षों के दावों की सत्यता जांचने गए थे। उपजिलाधिकारी के अनुसार, प्रशासनिक टीम को देखते ही कुछ असामाजिक तत्वों ने महिलाओं को आगे कर दिया और पुलिस बल पर अचानक हमला बोल दिया, जिसके कारण आत्मरक्षार्थ और शांति व्यवस्था बहाल रखने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा। प्रशासन ने अदालत के आदेश की अवहेलना के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि मामले की पूरी रिपोर्ट तैयार की जा रही है। हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के कड़े रुख के बाद अब इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग जोर पकड़ रही है, ताकि यह साफ हो सके कि आखिर किस स्तर पर लापरवाही हुई और किसके आदेश पर अदालती आदेश के बावजूद यह कदम उठाया गया।
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