मऊ में SDM पर महिलाओं का हमला- पुलिस के सामने SDM का कॉलर पकड़ा, इंटरलॉकिंग निर्माण के विरोध में भारी हंगामा।
उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में एक विवादास्पद घटना सामने आई है जहां मधुबन तहसील के एसडीएम राजेश कुमार अग्रवाल के साथ कुछ महिलाओं ने
उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में एक विवादास्पद घटना सामने आई है जहां मधुबन तहसील के एसडीएम राजेश कुमार अग्रवाल के साथ कुछ महिलाओं ने अभद्रता की। यह घटना काठतराव गांव की है जहां सरकारी आदेश पर गांव के रास्ते में इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाने का कार्य शुरू कराया जा रहा था। एसडीएम भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे थे लेकिन महिलाओं ने निर्माण कार्य का विरोध करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। विवाद इतना बढ़ गया कि पुलिस की मौजूदगी में ही महिलाओं ने एसडीएम का कॉलर पकड़ लिया और धक्का-मुक्की की। घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो गया जिसमें महिलाएं एसडीएम को घेरकर कॉलर खींचते और धक्का देते दिख रही हैं जबकि पुलिसकर्मी उन्हें अलग करने की कोशिश कर रहे हैं।
यह पूरा मामला गांव में पुराने कच्चे रास्ते को पक्का करने से जुड़ा है। गांव में पिछले काफी समय से रास्ते को लेकर विवाद चल रहा था। एक पक्ष का कहना था कि रास्ते पर कुछ लोगों ने कब्जा कर लिया है और बाउंड्रीवॉल बना दी है जिससे आने-जाने में दिक्कत हो रही है। सरकारी स्तर पर आदेश जारी होने के बाद इंटरलॉकिंग का कार्य शुरू कराने के लिए एसडीएम राजेश कुमार अग्रवाल को जिम्मेदारी सौंपी गई। उनके पास उच्च अधिकारियों के निर्देश थे कि 30 मीटर लंबे रास्ते पर खड़ंजा या इंटरलॉकिंग टाइल्स लगवाई जाए। एसडीएम पुलिस फोर्स के साथ 15 दिसंबर को मौके पर पहुंचे और निर्माण कार्य शुरू कराया लेकिन जैसे ही कार्य शुरू हुआ महिलाओं का एक समूह वहां जमा हो गया और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। महिलाएं निर्माण रोकने की मांग करने लगीं। उनका कहना था कि यह रास्ता उनके उपयोग में है और यहां निर्माण नहीं होना चाहिए। एसडीएम ने महिलाओं को समझाने की कोशिश की और बताया कि उनके पास सभी आवश्यक आदेश हैं तथा यह कार्य सरकारी योजना के तहत हो रहा है। लेकिन महिलाएं नहीं मानीं और विरोध तेज हो गया। देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई और महिलाओं ने एसडीएम को घेर लिया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि कुछ महिलाएं एसडीएम के करीब पहुंचीं और उनका कॉलर पकड़कर खींचने लगीं। धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। पुलिसकर्मी बीच-बचाव करते नजर आए और किसी तरह एसडीएम को महिलाओं के घेरे से बाहर निकाला।
पुलिस ने मौके पर हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया और महिलाओं को समझाकर शांत कराया। इसके बाद निर्माण कार्य फिर से शुरू करा दिया गया। एसडीएम राजेश कुमार अग्रवाल ने घटना के बाद बताया कि महिलाओं ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया और कॉलर पकड़ लिया। उन्होंने कहा कि यह सरकारी कार्य में बाधा डालने की कोशिश है और इसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि विरोध करने वाले पक्ष से जुड़े लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। ग्राम सचिव की तहरीर पर चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई। एसडीएम को इस घटना में चोट भी आई लेकिन पुलिस ने उन्हें सुरक्षित निकाल लिया। यह घटना मधुबन थाना क्षेत्र की है और रामपुर थाना क्षेत्र से भी जुड़ी बताई जा रही है। गांव में रास्ते का विवाद दो साल पुराना है और इसमें एक परिवार पर दबंगई का आरोप लगा है कि उन्होंने आबादी की जमीन पर कब्जा कर रास्ता रोक दिया है। मामला निचली अदालत में भी विचाराधीन है लेकिन सरकारी आदेश पर निर्माण कार्य कराया जा रहा था। एसडीएम के पहुंचने पर विरोध करने वाली महिलाएं उसी पक्ष से जुड़ी बताई जा रही हैं। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लाठीचार्ज की स्थिति तक नहीं आने दी लेकिन हल्का बल प्रयोग कर人群 को分散 किया। अंततः पुलिस की मदद से एसडीएम सुरक्षित रहे और कार्य पूरा कराया गया।
घटना के वीडियो में पुलिसकर्मी एसडीएम को बचाते दिख रहे हैं जबकि महिलाएं गुस्से में नारे लगा रही हैं और निर्माण मशीनों के पास खड़ी होकर रोकने की कोशिश कर रही हैं। एसडीएम ने स्पष्ट किया कि उनके पास एडीएम और एसपी सहित सभी अधिकारियों के आदेश थे और कार्य कानूनी रूप से सही था। विरोध के बावजूद इंटरलॉकिंग का कार्य शुरू हो गया और आगे बढ़ाया गया। इस घटना ने क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है क्योंकि सरकारी अधिकारी के साथ इस तरह की अभद्रता दुर्लभ मानी जाती है। पुलिस ने मामला शांत कराकर निर्माण कार्य सुनिश्चित किया। यह पूरा विवाद गांव के विकास कार्य से जुड़ा है जहां एक पुराना कच्चा रास्ता पक्का किया जा रहा था। महिलाओं का विरोध इतना तीव्र था कि पुलिस के सामने ही एसडीएम पर हाथ उठाने की स्थिति बन गई। वीडियो में धक्का-मुक्की और कॉलर खींचने के दृश्य स्पष्ट हैं। एसडीएम ने शिकायत दर्ज कराने की बात कही और कहा कि दुर्व्यवहार करने वालों पर कार्रवाई होगी। पुलिस ने हस्तक्षेप कर एसडीएम को बचाया और स्थिति नियंत्रित की। निर्माण कार्य बिना रुके आगे बढ़ा। यह घटना 15 दिसंबर की है और इसके बाद वीडियो वायरल होने से पूरे जिले में चर्चा हो रही है। गांव में रास्ते का विवाद सुलझाने की कोशिश में यह हंगामा हुआ। पुलिस ने सभी पक्षों को समझाया और कार्य पूरा कराया।
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