शेयर बाजार में ब्लैक मंडे: सेंसेक्स 1317 अंक टूटकर 73,000 के नीचे फिसला, निफ्टी में भी बड़ी गिरावट

ऑटो और पेंट सेक्टर के शेयरों पर भी कच्चे तेल की मार साफ दिखाई दी। मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा और टाटा मोटर्स जैसे ऑटो दिग्गजों के शेयर 4 प्रतिशत तक लुढ़क गए। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से इन कंपनियों की लागत बढ़ जाती है और मांग पर प्रतिकूल असर पड़ता है। पेंट सेक्टर की प्रमुख

Mar 23, 2026 - 11:49
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शेयर बाजार में ब्लैक मंडे: सेंसेक्स 1317 अंक टूटकर 73,000 के नीचे फिसला, निफ्टी में भी बड़ी गिरावट
शेयर बाजार में ब्लैक मंडे: सेंसेक्स 1317 अंक टूटकर 73,000 के नीचे फिसला, निफ्टी में भी बड़ी गिरावट

  • मध्य पूर्व में युद्ध की आहट और कच्चे तेल के उबाल से सहमा बाजार, निवेशकों के 8 लाख करोड़ डूबे
  • बैंकिंग और ऑटो शेयरों में सबसे बड़ी मार; एचडीएफसी बैंक, मारुति और एसबीआई के निवेशकों को भारी नुकसान

सप्ताह के पहले कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 1317 अंकों की भारी गिरावट के साथ खुला, जिससे बाजार का स्तर 73,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे चला गया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी इससे अछूता नहीं रहा और वह भी लगभग 400 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ 22,600 के करीब कारोबार करता देखा गया। बाजार में इस तरह की तेज गिरावट पिछले कई महीनों में नहीं देखी गई थी। जानकारों का मानना है कि यह गिरावट केवल एक तकनीकी सुधार नहीं है, बल्कि इसके पीछे वैश्विक अर्थव्यवस्था से जुड़े गहरे संकट और अनिश्चितताएं काम कर रही हैं, जिसने निवेशकों को 'पैनिक सेलिंग' (घबराहट में बिक्री) के लिए मजबूर कर दिया है।

बाजार में आई इस तबाही का सबसे बड़ा कारण मध्य पूर्व, विशेष रूप से ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर लगे प्रतिबंधों और संभावित सैन्य कार्रवाई की खबरों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को अस्थिर कर दिया है। चूंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में प्रति बैरल 110 डॉलर के पार जाने की खबर ने भारतीय बाजार के लिए खतरे की घंटी बजा दी। तेल महंगा होने का सीधा मतलब है देश में महंगाई का बढ़ना और कॉर्पोरेट जगत के मुनाफे में कमी आना। इसी डर ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को भारतीय बाजार से पैसा निकालने पर मजबूर कर दिया, जिससे बिकवाली का दबाव बढ़ता चला गया।

बैंकिंग क्षेत्र, जिसे भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, आज सबसे अधिक दबाव में दिखा। निफ्टी बैंक इंडेक्स में 2 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। निजी क्षेत्र के दिग्गज एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) के शेयरों में 3 प्रतिशत से ज्यादा की टूट देखी गई, जबकि आईसीआईसीआई बैंक और एक्सिस बैंक भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। वित्तीय शेयरों में गिरावट का मुख्य कारण डॉलर के मुकाबले रुपये का रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुँचना भी है। रुपया आज डॉलर के मुकाबले 93.90 के स्तर को छू गया, जिससे विदेशी निवेशकों में यह डर बैठ गया है कि आने वाले समय में भारतीय बाजार से डॉलर निकालना और भी महंगा हो सकता है। बाजार की इस गिरावट के बीच इंडिया विक्स (India VIX), जिसे 'फियर इंडेक्स' या डर का सूचकांक भी कहा जाता है, उसमें 15 प्रतिशत से अधिक का उछाल देखा गया। यह दर्शाता है कि बाजार में आने वाले दिनों में और अधिक उतार-चढ़ाव रहने की संभावना है। निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे फिलहाल जल्दबाजी में कोई भी बड़ा निवेश न करें और बाजार के स्थिर होने का इंतजार करें।

ऑटो और पेंट सेक्टर के शेयरों पर भी कच्चे तेल की मार साफ दिखाई दी। मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा और टाटा मोटर्स जैसे ऑटो दिग्गजों के शेयर 4 प्रतिशत तक लुढ़क गए। कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से इन कंपनियों की लागत बढ़ जाती है और मांग पर प्रतिकूल असर पड़ता है। पेंट सेक्टर की प्रमुख कंपनी एशियन पेंट्स के शेयरों में भी भारी गिरावट रही क्योंकि कच्चे तेल से बनने वाले कच्चे माल की कीमतें बढ़ने की आशंका ने निवेशकों को सतर्क कर दिया। इसके अलावा, आईटी क्षेत्र के दिग्गज जैसे इंफोसिस और टीसीएस भी वैश्विक मंदी की आहट के बीच बिकवाली के दबाव से नहीं बच सके। बाजार का कोई भी ऐसा प्रमुख सेक्टर नहीं था जो आज हरे निशान में टिक पाया हो।

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लेकर अपनाए गए कड़े रुख ने भी आग में घी डालने का काम किया है। अमेरिका में महंगाई दर उम्मीद के मुताबिक कम नहीं हो रही है, जिससे इस बात की संभावना बढ़ गई है कि आने वाले समय में ब्याज दरें ऊंची बनी रहेंगी। जब अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची होती हैं, तो निवेशक उभरते बाजारों जैसे भारत से पैसा निकालकर अमेरिकी बॉन्ड बाजार में लगाना सुरक्षित समझते हैं। यही कारण है कि पिछले एक पखवाड़े में विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार से 50,000 करोड़ रुपये से अधिक की निकासी की है, जिसका असर आज की इस ऐतिहासिक गिरावट के रूप में सामने आया है।

आज के सत्र में सबसे अधिक नुकसान उठाने वाले शेयरों में रिलायंस इंडस्ट्रीज और लार्सन एंड टुब्रो (L&T) भी शामिल थे। रिलायंस, जिसका सेंसेक्स में बड़ा वेटेज है, उसके गिरने से पूरे इंडेक्स पर दबाव बढ़ गया। सरकारी बैंकों में एसबीआई (SBI) और केनरा बैंक के शेयरों में भी 5 प्रतिशत तक की गिरावट देखी गई। हालांकि, इस चौतरफा बिकवाली के बीच रक्षा और तेल उत्पादन से जुड़ी कुछ कंपनियों जैसे ओएनजीसी (ONGC) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) में मामूली खरीदारी देखी गई। निवेशकों को लग रहा है कि युद्ध जैसी स्थितियों में इन क्षेत्रों की कंपनियों को फायदा मिल सकता है, लेकिन यह खरीदारी बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त नहीं थी।

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