मौत बनकर नदी से निकला खूंखार शिकारी, पिता ने निहत्थे रहकर भी मगरमच्छ को दी शिकस्त, बेटे की सलामती के लिए लगा दी जान की बाजी।
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में तराई के जंगलों और नदियों के तटवर्ती इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों का जीवन अक्सर वन्य जीवों के संघर्ष

- पीलीभीत में पिता के अदम्य साहस की मिसाल, मगरमच्छ के जबड़ों से 14 साल के मासूम बेटे को मौत के मुंह से छीना
- तराई के जंगलों और नदियों के किनारे मगरमच्छों का खौफ, जानलेवा हमले के बाद ग्रामीण इलाकों में दहशत, वन्य विभाग ने जारी किया अलर्ट
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में तराई के जंगलों और नदियों के तटवर्ती इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों का जीवन अक्सर वन्य जीवों के संघर्ष के बीच बीतता है, लेकिन हाल ही में हुई एक घटना ने बहादुरी और पिता के प्रेम की एक ऐसी कहानी पेश की है जिसे सुनकर किसी के भी रोंगटे खड़े हो सकते हैं। पीलीभीत के कलीनगर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले एक गांव में, जहाँ देवहा और शारदा नदी का संगम क्षेत्र है, वहां एक पिता ने साक्षात काल बनकर आए मगरमच्छ से लोहा लिया। यह घटना उस समय घटी जब 14 वर्षीय बालक अपने पिता के साथ नदी किनारे दैनिक कार्यों या खेती-बाड़ी के सिलसिले में मौजूद था। शांत दिखने वाली नदी की सतह के नीचे छिपे एक विशालकाय मगरमच्छ ने अचानक हमला कर दिया और बालक का पैर अपने जबड़ों में जकड़ कर उसे गहरे पानी की ओर खींचने लगा।
जैसे ही बालक की चीख गूंजी, पास ही मौजूद उसके पिता की नजरें उस खौफनाक मंजर पर पड़ीं। सामान्य तौर पर ऐसे शिकारी को देखकर कोई भी व्यक्ति भयभीत हो सकता है, लेकिन एक पिता के लिए उसका बेटा उसकी आंखों के सामने मौत की ओर बढ़ रहा था। बिना एक पल की देरी किए और अपनी जान की परवाह किए बिना, पिता सीधे नदी के पानी में कूद गया। उसने मगरमच्छ की पीठ पर प्रहार करना शुरू किया और उसके संवेदनशील हिस्सों, विशेषकर आंखों और नाक के पास अपनी पूरी ताकत से हमला किया। यह संघर्ष पानी के भीतर और किनारे पर कुछ मिनटों तक चलता रहा, जहाँ एक तरफ विशालकाय सरीसृप की ताकत थी और दूसरी तरफ एक बेबस लेकिन साहसी पिता का संकल्प। इस रोंगटे खड़े कर देने वाले संघर्ष में पिता ने मगरमच्छ के मुंह को खोलने के लिए लकड़ी के डंडे या जो भी वस्तु हाथ लगी, उसका उपयोग किया। मगरमच्छ ने बालक को पानी के भीतर खींचने की पूरी कोशिश की, लेकिन पिता ने बालक के हाथों को मजबूती से पकड़ रखा था और उसे छोड़ने को तैयार नहीं था। अंततः, पिता के लगातार प्रहारों और शोर मचाने के कारण मगरमच्छ असहज हो गया और उसने बालक का पैर छोड़ दिया। शिकारी वापस गहरे पानी में ओझल हो गया, लेकिन पीछे छोड़ गया एक घायल बालक और एक लहूलुहान पिता। पिता ने तुरंत अपने बेटे को किनारे पर खींचा और उसकी गंभीर हालत को देखते हुए शोर मचाकर ग्रामीणों को मदद के लिए बुलाया।
बालक के पैर पर मगरमच्छ के दांतों के गहरे घाव थे और मांस के लोथड़े बाहर निकल आए थे। ग्रामीणों ने तुरंत एक निजी वाहन का इंतजाम किया और घायल बच्चे को जिला अस्पताल पहुँचाया। डॉक्टरों के अनुसार, बालक की स्थिति गंभीर थी क्योंकि मगरमच्छ के काटने से संक्रमण का खतरा बहुत अधिक होता है। आपातकालीन वार्ड में तैनात सर्जनों ने घंटों की मेहनत के बाद बालक के पैर की सर्जरी की और उसे खतरे से बाहर बताया। डॉक्टरों ने भी स्वीकार किया कि यदि पिता ने कुछ सेकंड की भी देरी की होती, तो मगरमच्छ बालक को गहरे पानी में ले जाकर अपना निवाला बना लेता या उसे ऐसी चोटें पहुँचाता जिससे बचना नामुमकिन होता।
इस घटना के बाद पूरे पीलीभीत जिले में इस जांबाज पिता की चर्चा हो रही है। वन विभाग के अधिकारियों ने भी अस्पताल पहुँचकर बालक का हालचाल जाना और पिता के साहस की सराहना की। विभाग ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दिलाने का आश्वासन दिया है और साथ ही नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी है। वन विभाग का कहना है कि नदियों में पानी कम होने और भोजन की तलाश में मगरमच्छ अक्सर किनारों पर धूप सेंकने या शिकार की तलाश में आते हैं, इसलिए ग्रामीणों को अकेले नदी किनारे जाने से बचना चाहिए, विशेषकर बच्चों को पानी के पास नहीं जाने देना चाहिए।
क्षेत्रीय निवासियों में इस घटना के बाद से काफी दहशत व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि नदियां उनके जीवन का अनिवार्य हिस्सा हैं, जहाँ वे मवेशियों को पानी पिलाने या खेती के काम से जाते हैं, लेकिन अब हर कदम पर मौत का साया मंडरा रहा है। स्थानीय प्रशासन से मांग की गई है कि नदी के उन हिस्सों पर बाड़ (Fencing) लगाई जाए जहाँ मगरमच्छों की संख्या अधिक है। इसके अतिरिक्त, संवेदनशील स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाने और वन रक्षकों की गश्त बढ़ाने की भी आवश्यकता महसूस की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी किसी जानलेवा स्थिति से बचा जा सके।
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