जम्मू-कश्मीर में आतंकी नेटवर्क पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी का बड़ा प्रहार, बारामूला में यूएपीए के तहत दो प्रमुख भूखंड कुर्क
इस कार्रवाई के दौरान बारामूला के कनिसपोरा इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि किसी भी संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटा जा सके। एनआईए के अधिकारियों ने स्थानीय राजस्व विभाग के अधिकारियों की मदद से जमीनों की पैमाइश की और कानूनी प्रक्रिया
- प्रतिबंधित संगठन हिजबुल मुजाहिदीन और पाकिस्तानी खुफिया तंत्र की गहरी साजिश के खिलाफ विशेष अदालत के आदेश पर हुई सख्त कार्रवाई
- आतंकियों के वित्तीय स्रोतों और अचल संपत्तियों को निशाना बनाकर घाटी में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को पूरी तरह से कुचलने का अभियान तेज
जम्मू-कश्मीर में देश विरोधी तत्वों और सीमा पार से संचालित होने वाले आंतकी नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त करने के अपने संकल्प के तहत राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने एक बार फिर एक बड़ी और निर्णायक कार्रवाई को अंजाम दिया है। आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहिष्णुता (जीरो टॉलरेंस) की नीति अपनाते हुए केंद्रीय एजेंसी की एक विशेष टीम ने उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले में बुधवार को गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत दो महत्वपूर्ण भूखंडों को कुर्क कर लिया है। सुरक्षा एजेंसियों द्वारा इस कदम को घाटी में सक्रिय आतंकवादियों और उनके मददगारों के वित्तीय तंत्र को पूरी तरह से पंगु बनाने के एक बड़े प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। पिछले कुछ समय से केंद्रीय जांच एजेंसियां जम्मू-कश्मीर में सक्रिय उन सभी संपत्तियों को चिन्हित कर रही हैं, जिनका उपयोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने या उनके वित्तपोषण के लिए किया जा रहा है।
इस हालिया कार्रवाई के तहत कुर्क की गई अचल संपत्तियों के बारे में विवरण देते हुए सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि बारामूला जिले के कनिसपोरा इलाके में स्थित दो अलग-अलग भूखंडों को एजेंसी ने अपने नियंत्रण में ले लिया है। इसमें से पहला भूखंड 7.5 मरला यानी लगभग 2,050 वर्ग फुट का है, जबकि दूसरा भूखंड छह मरला यानी करीब 1,632 वर्ग फुट का है। ये दोनों ही आवासीय और व्यावसायिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण भूमि खंड शाहीन अहमद लोन नाम के एक व्यक्ति के हैं, जो साल 2020 में एनआईए द्वारा दर्ज किए गए एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मामले में मुख्य आरोपियों में से एक है। इस कुर्की के बाद अब इन संपत्तियों पर किसी भी प्रकार का निर्माण, बिक्री, हस्तांतरण या व्यावसायिक उपयोग पूरी तरह से प्रतिबंधित हो गया है और इसके उल्लंघन पर कड़ी कानूनी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। सुरक्षा अधिकारियों के आधिकारिक बयानों के अनुसार, यह पूरी कुर्की कार्रवाई गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 33(1) के तहत अमल में लाई गई है। इसके लिए जम्मू स्थित एनआईए की विशेष अदालत द्वारा बाकायदा एक औपचारिक और कड़ा आदेश जारी किया गया था, जिसके बाद स्थानीय पुलिस और नागरिक प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में बुधवार सुबह इन संपत्तियों पर जब्ती के नोटिस बोर्ड लगा दिए गए।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी द्वारा की जा रही यह व्यापक कार्रवाई केवल एक व्यक्ति या एक संपत्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पाकिस्तान की सरकारी एजेंसियों और वहां से संचालित होने वाले प्रतिबंधित आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन की संलिप्तता वाली एक बेहद गहरी और अंतरराष्ट्रीय स्तर की साजिश की जांच का एक हिस्सा है। जांच अधिकारियों को इस बात के पुख्ता सबूत मिले हैं कि पड़ोसी देश में बैठे आतंकी आका भारतीय सीमा के भीतर अशांति फैलाने, युवाओं को गुमराह करने और घाटी में हथियारों तथा नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए एक बड़ा भूमिगत नेटवर्क चला रहे हैं। इस गहरी साजिश की तह तक जाने के लिए केंद्रीय एजेंसी कड़ियों को आपस में जोड़ रही है और यह कुर्की इसी श्रृंखला का एक बेहद महत्वपूर्ण चरण है, जिससे इस नेटवर्क के आर्थिक आधार को बड़ा झटका लगा है।
एनआईए की चार्जशीट और अब तक की तफ्तीश में यह बात भी पूरी तरह साफ हुई है कि आरोपी शाहीन अहमद लोन और उसके सहयोगियों का इस्तेमाल कश्मीर घाटी में सक्रिय हिजबुल मुजाहिदीन के कैडरों तक वित्तीय मदद पहुंचाने और उनके रहने-ठहरने की व्यवस्था करने के लिए किया जा रहा था। आतंकवादियों के लिए सुरक्षित ठिकानों का इंतजाम करना, सुरक्षा बलों की आवाजाही पर नजर रखना और देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने के उद्देश्य से रसद की आपूर्ति करना इस पूरे नेटवर्क का मुख्य काम था। साल 2020 में दर्ज इस मामले की गहन पड़ताल के दौरान कई डिजिटल साक्ष्य, बैंक खातों के विवरण और खुफिया इनपुट सामने आए थे, जिन्होंने इस बात की पुष्टि की कि इन संपत्तियों की खरीद-फरोख्त और रखरखाव में आतंकी फंड का इस्तेमाल किया गया था।
इस कार्रवाई के दौरान बारामूला के कनिसपोरा इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे ताकि किसी भी संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटा जा सके। एनआईए के अधिकारियों ने स्थानीय राजस्व विभाग के अधिकारियों की मदद से जमीनों की पैमाइश की और कानूनी प्रक्रिया को पूरा करते हुए वहां लाल अक्षरों में कुर्की के आदेश वाले बड़े-बड़े होर्डिंग्स लगा दिए। इन बोर्ड्स पर साफ तौर पर लिखा गया है कि यह संपत्ति अब भारत सरकार के अधीन है और इसके साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ करना एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध माना जाएगा। केंद्रीय जांच एजेंसी की इस सख्त और अचानक हुई कार्रवाई से बारामूला और उसके आस-पास के इलाकों में सक्रिय अन्य ओवर ग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) और आतंकवादियों के मददगारों के बीच भारी दहशत का माहौल देखा जा रहा है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन और केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों के तहत आने वाले दिनों में इस तरह की संपत्तियों के खिलाफ अभियानों को और अधिक तेज करने की योजना बनाई गई है। सुरक्षा बलों का मानना है कि जब तक आतंकवाद के मददगारों की रीढ़ यानी उनकी आर्थिक ताकत और अचल संपत्तियों को पूरी तरह से जब्त नहीं किया जाता, तब तक घाटी से आतंकवाद का पूर्ण सफाया संभव नहीं है। यही कारण है कि अब जांच का दायरा केवल सक्रिय आतंकवादियों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उन सफेदपोश मददगारों पर भी कसा जा रहा है जो समाज के बीच रहकर इन देशद्रोहियों को संसाधन मुहैया कराते हैं।
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