दिल्ली में तेज रफ्तार कार ने छीना परिवार का इकलौता सहारा, 25 वर्षीय डिलीवरी एजेंट हेम शंकर की मौत, मां रुक्मिणी सदमे में
हेम शंकर परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनके पिता नंद किशोर की मौत 12 साल पहले यानी 2015 में बीमारी के कारण हो गई थी। उस समय हेम शंकर सहित तीनों बेटे छो

दिल्ली के सुभाष नगर इलाके में शनिवार तड़के एक भयानक सड़क हादसे में 25 वर्षीय डिलीवरी एजेंट हेम शंकर की मौत हो गई। हेम शंकर रघुबीर नगर के निवासी थे और वे एक क्विक कॉमर्स कंपनी के लिए डिलीवरी पार्टनर के रूप में काम करते थे। वे इलेक्ट्रिक स्कूटी पर सवार थे जब नजफगढ़ रोड पर सुभाष नगर मेट्रो रेड लाइट के पास एक तेज रफ्तार वर्ना कार ने पीछे से उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी। हादसे में हेम शंकर की मौके पर ही मौत हो गई।
हादसे के बाद पुलिस ने कार चालक मोहित कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। मोहित कुमार एक एमसीडी ठेकेदार हैं और रिपोर्ट्स के अनुसार वे नशे की हालत में थे। चश्मदीदों ने दावा किया कि कार की रफ्तार 100 से 150 किलोमीटर प्रति घंटा के बीच थी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार टक्कर मारने के बाद भी नहीं रुकी और आगे बढ़ गई। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज की है और जांच जारी है।
हेम शंकर परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य थे। उनके पिता नंद किशोर की मौत 12 साल पहले यानी 2015 में बीमारी के कारण हो गई थी। उस समय हेम शंकर सहित तीनों बेटे छोटे थे। पिता के जाने के बाद मां रुक्मिणी ने घरों में बर्तन साफ करने, झाड़ू-पोछा लगाने जैसे घरेलू काम करके परिवार का पालन-पोषण किया। उन्होंने तीनों बेटों को पढ़ाया-लिखाया और बड़ा किया। पिछले तीन सालों से रुक्मिणी का स्वास्थ्य बिगड़ने लगा था। उन्होंने हाल ही में अपनी मां की आंखों का इलाज भी करवाया था। हेम शंकर ने मां को काम करने से रोक दिया और खुद पूरे परिवार की जिम्मेदारी उठा ली। वे डिलीवरी का काम करके घर चलाते थे। हेम शंकर का एक बड़ा भाई देवेंद्र है, जो शादी के बाद अलग रहता है और उसके पास स्थिर काम नहीं है। परिवार में छोटा भाई समर भी है, जो अभी 12 वर्ष का है।
मां रुक्मिणी हादसे की सूचना मिलते ही अस्पताल पहुंचीं। वहां बेटे का शव देखकर वे बेसुध हो गईं। उन्होंने रोते हुए कहा कि अब परिवार का इकलौता कमाने वाला चला गया। उन्होंने बताया कि भगवान ने जैसे ही बेटा कमाने लगा, उसे छीन लिया। रुक्मिणी ने आगे कहा कि अब परिवार भूखे मर जाएगा क्योंकि बड़े बेटे के पास कोई काम नहीं है। हेम शंकर ने परिवार की जिम्मेदारियां पूरी तरह से संभाली हुई थीं। वे छोटे भाई को इंजीनियर बनाना चाहते थे और उसकी पढ़ाई पर ध्यान देते थे। पड़ोसियों ने बताया कि हेम शंकर ने सबसे पहले अपनी मां का काम छुड़वाया था ताकि वह आराम से रह सके। उनकी मौत से परिवार में गहरा सदमा है और आर्थिक संकट पैदा हो गया है।
मां रुक्मिणी ने न्याय की मांग की है। उन्होंने कहा कि उन्होंने रात को बेटे को डिनर कराकर भेजा था लेकिन उसके बाद कोई कॉल नहीं आई। अस्पताल पहुंचकर पता चला कि बेटा नहीं रहा। परिवार अब अंधेरे में है क्योंकि कोई स्थिर आय का स्रोत नहीं बचा है। यह हादसा दिल्ली में सड़क सुरक्षा को लेकर फिर सवाल खड़े करता है। नशे में गाड़ी चलाने और तेज रफ्तार के मामलों में सख्त कार्रवाई की जरूरत है। हेम शंकर जैसे युवा जो परिवार की कमान संभालते हैं, उनकी ऐसी मौत से कई परिवार प्रभावित होते हैं। पुलिस जांच में कार चालक के नशे में होने की पुष्टि हुई है। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की आगे की जांच की जा रही है। परिवार न्याय की उम्मीद कर रहा है।
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