संजय राउत का राहुल गांधी के बयान को खुला समर्थन: कहा- भाजपा और आरएसएस की नीतियां संविधान के अस्तित्व के लिए बड़ा संकट।
सांसद राउत ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि विशिष्ट जातियों और धर्मों के लोगों को निशाना बनाकर उन्हें मतदान प्रक्रिया से दूर रखना एक बेहद खतरनाक प्रवृत्ति है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस देश के आधि
- संवैधानिक मूल्यों पर प्रहार और चुनावी निष्पक्षता पर सवाल: शिवसेना (UBT) सांसद ने पश्चिम बंगाल की घटनाओं को लोकतंत्र की हत्या बताया।
- वोटिंग अधिकारों के हनन पर भड़के संजय राउत: विशिष्ट जातियों और धर्मों को निशाना बनाने का लगाया आरोप, विपक्षी एकजुटता का दिया संदेश।
देश के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में संवैधानिक संस्थाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों के संरक्षण को लेकर बहस तेज हो गई है। इसी क्रम में शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उन दावों का पुरजोर समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर संविधान को कमजोर करने का आरोप लगाया था। संजय राउत ने स्पष्ट रूप से कहा कि राहुल गांधी जो कुछ भी कह रहे हैं, वह जमीनी हकीकत है और देश की वर्तमान परिस्थितियां इस बात की गवाही दे रही हैं कि संवैधानिक ढांचे के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने देश भर में चल रही राजनीतिक गतिविधियों का हवाला देते हुए इस बात पर चिंता जताई कि अगर इसी तरह संस्थाओं पर दबाव बनाया गया, तो आम नागरिक का लोकतंत्र से भरोसा उठ जाएगा। राउत के इस बयान ने विपक्षी गठबंधन की एकजुटता को तो बल दिया ही है, साथ ही सत्ता पक्ष के लिए एक नई चुनौती भी पेश कर दी है।
संजय राउत ने पश्चिम बंगाल में हाल के दिनों में हुए घटनाक्रमों और चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल में लाखों लोगों के वोट देने के अधिकार को जिस तरह से प्रभावित किया गया है, वह सीधे तौर पर भारत के संविधान के खिलाफ है। उनके अनुसार, लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत मतदान है और जब नागरिकों को उनके इस बुनियादी अधिकार से वंचित किया जाता है, तो वह केवल एक चुनावी हार-जीत का मुद्दा नहीं रह जाता, बल्कि पूरे राष्ट्र के लिए एक खतरे की घंटी बन जाता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि चुनाव प्रक्रिया की शुचिता और नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करना चुनाव आयोग और सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है, लेकिन वर्तमान परिदृश्य में ऐसा प्रतीत होता है कि सत्ता को बनाए रखने के लिए किसी भी हद तक जाने की कोशिशें की जा रही हैं।
सांसद राउत ने अपनी चिंता व्यक्त करते हुए इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि विशिष्ट जातियों और धर्मों के लोगों को निशाना बनाकर उन्हें मतदान प्रक्रिया से दूर रखना एक बेहद खतरनाक प्रवृत्ति है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस देश के आधिकारिक नागरिक हैं और जिनके पास वैध पहचान पत्र हैं, उन्हें केवल उनकी पहचान के आधार पर वोट देने से रोकना संविधान की मूल भावना 'समानता के अधिकार' का उल्लंघन है। उन्होंने इसे एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा बताया, जिसके माध्यम से देश की लोकतांत्रिक विविधता को समाप्त करने का प्रयास किया जा रहा है। राउत के अनुसार, यह केवल एक राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि उन करोड़ों लोगों की आवाज है जो खुद को इस व्यवस्था में ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं और जिनके संवैधानिक अधिकारों का खुलेआम हनन किया जा रहा है।
संवैधानिक संकट पर विशेष टिप्पणी
संजय राउत ने चर्चा के दौरान इस बात पर जोर दिया कि संविधान केवल एक किताब नहीं है, बल्कि देश के हर नागरिक का सुरक्षा कवच है। जब शासन करने वाली संस्थाएं ही इस कवच में छेद करने लगें, तो समाज में अराजकता का माहौल पैदा हो जाता है। उन्होंने आगाह किया कि विश्व पटल पर भारत की छवि एक जीवंत लोकतंत्र की है, जिसे संकीर्ण राजनीतिक लाभ के लिए दांव पर नहीं लगाया जाना चाहिए।
सत्ताधारी दल की कार्यप्रणाली की आलोचना करते हुए संजय राउत ने कहा कि आज देश की तमाम स्वतंत्र एजेंसियां और संस्थाएं एक विशेष विचारधारा के दबाव में काम कर रही हैं। उन्होंने राहुल गांधी के उस पक्ष को सही ठहराया जिसमें उन्होंने कहा था कि आरएसएस और भाजपा मिलकर उन स्तंभों को गिराने की कोशिश कर रहे हैं जिन पर यह देश खड़ा है। राउत के अनुसार, संविधान के प्रति निष्ठा केवल कागजों पर नहीं बल्कि व्यवहार में दिखनी चाहिए। उन्होंने वर्तमान सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि एक तरफ संविधान का सम्मान करने का दावा किया जाता है, तो दूसरी तरफ उन नागरिकों की आवाज दबाई जाती है जो सरकार की नीतियों से असहमत होते हैं। यह दोहरा मापदंड लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए घातक सिद्ध हो सकता है।
संजय राउत ने विपक्षी दलों की भूमिका को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि जब संविधान पर खतरा मंडरा रहा हो, तो सभी मतभेदों को भुलाकर देश के हित में खड़ा होना जरूरी है। उन्होंने पश्चिम बंगाल की स्थिति को केवल एक राज्य का मामला न मानकर इसे पूरे देश के लिए एक परीक्षण बताया। उनके अनुसार, अगर आज बंगाल में वोटिंग अधिकारों का हनन हो रहा है, तो कल यह देश के किसी भी अन्य हिस्से में दोहराया जा सकता है। इसलिए, संविधान के रक्षकों को अब सड़क से लेकर संसद तक अपनी आवाज बुलंद करनी होगी। उन्होंने जनता से भी अपील की कि वे अपने अधिकारों के प्रति सचेत रहें और ऐसी किसी भी कोशिश का विरोध करें जो उनके लोकतांत्रिक मूल्यों को कम करती हो।
आगामी चुनावों और राजनीतिक भविष्य की चर्चा करते हुए राउत ने कहा कि सत्ता में बैठे लोग यह भूल रहे हैं कि जनता सब कुछ देख रही है। उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जब-जब जनता के मौलिक अधिकारों को कुचलने का प्रयास किया गया है, तब-तब लोगों ने बैलेट के माध्यम से अपना कड़ा जवाब दिया है। राउत ने भाजपा और आरएसएस को निशाने पर लेते हुए कहा कि वे भले ही खुद को सबसे बड़ा देशभक्त कहें, लेकिन असली देशभक्ति देश के संविधान और उसके हर नागरिक के सम्मान की रक्षा करने में है। उन्होंने दोहराया कि राहुल गांधी के आरोपों को केवल राजनीतिक बयानबाजी मानकर खारिज नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसके पीछे ठोस तथ्य और वर्तमान की भयावह तस्वीरें मौजूद हैं।
What's Your Reaction?





