Jaipur School Student Death: जयपुर में कैंटीन की पेटीज गले में फंसने से छात्र की मौत, परिजनों ने स्कूल पर लगाया लापरवाही का आरोप
जयपुर के झोटवाड़ा स्थित स्कूल में 12वीं के छात्र प्रिंस सोनी की कैंटीन में पेटीज खाने के बाद मौत हो गई। परिजनों ने स्कूल पर इलाज में देरी का गंभीर आरोप लगाया है।

- 100 मीटर दूर अस्पताल फिर भी नहीं ले गया स्कूल प्रशासन: जयपुर के झोटवाड़ा में 12वीं के छात्र प्रिंस सोनी की मौत, भारी हंगामा
- जयपुर में दर्दनाक हादसा: स्कूल कैंटीन में पेटीज खाने के बाद बिगड़ी 12वीं के छात्र की तबीयत, अस्पताल न ले जाने पर भड़के परिजन
- Jaipur News: झोटवाड़ा के स्कूल में पेटीज अटकने से 12वीं के छात्र की मौत, परिजनों का स्कूल प्रबंधन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन
राजस्थान की राजधानी जयपुर के झोटवाड़ा क्षेत्र स्थित एक निजी विद्यालय में दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहां 12वीं कक्षा के 17 वर्षीय छात्र प्रिंस सोनी की कैंटीन से खरीदी गई पेटीज खाने के बाद संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। परिजनों का आरोप है कि पेटीज गले में अटकने से छात्र का दम घुटने लगा और वह बेहोश हो गया, लेकिन विद्यालय से महज 100 मीटर की दूरी पर अस्पताल होने के बावजूद प्रबंधन ने उसे तत्काल चिकित्सा सुविधा दिलाने के बजाय परिजनों के आने की प्रतीक्षा की। समय पर उपचार न मिलने के कारण जब तक परिजन उसे अस्पताल ले गए, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद आक्रोशित परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने विद्यालय के बाहर भारी प्रदर्शन किया, जिसके बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
जयपुर के झोटवाड़ा इलाके में कांटा चौराहा स्थित महाराणा प्रताप स्कूल में बुधवार को लंच के समय यह अत्यंत दुखद घटना घटी। बृजमंडल कॉलोनी निवासी 17 वर्षीय प्रिंस सोनी अपनी कक्षा 12वीं की पढ़ाई कर रहा था। लंच ब्रेक के दौरान उसने विद्यालय परिसर के भीतर स्थित कैंटीन से खाद्य सामग्री के रूप में पेटीज खरीदकर खाई थी।
परिजनों के अनुसार, पेटीज खाते ही उसका एक हिस्सा गले में अटक गया, जिससे छात्र को सांस लेने में भारी तकलीफ होने लगी और कुछ ही मिनटों में वह जमीन पर गिरकर अचेत हो गया। गंभीर आपात स्थिति होने के बाद भी उसे मौके पर कोई प्रभावी प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड या सीपीआर) नहीं दिया गया, जिससे उसकी हालत तेजी से बिगड़ती चली गई।
छात्र के चाचा अनुराग सोनी द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, लंच समय में जब प्रिंस की तबीयत बिगड़ी तो विद्यालय स्टाफ ने आपातकालीन एंबुलेंस बुलाने या निकटतम अस्पताल पहुंचाने के बजाय परिजनों को फोन करना शुरू कर दिया। विद्यालय प्रशासन लगातार परिजनों से आग्रह करता रहा कि वे चार पहिया वाहन लेकर तुरंत स्कूल पहुंचें।
प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों का कहना है कि विद्यालय भवन से मात्र सौ मीटर की दूरी पर एक निजी चिकित्सालय मौजूद था, जहां छात्र को पैदल या दोपहिया वाहन के सहारे भी दो मिनट के भीतर पहुंचाया जा सकता था। विद्यालय कर्मियों ने केवल छात्र को बेंच पर लिटाकर उसकी पीठ सहलाने में समय गंवा दिया। जब परिजन बदहवास हालत में स्कूल पहुंचे, तब वे छात्र को नजदीकी अस्पताल ले गए, जहां से गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे मणिपाल अस्पताल रेफर किया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के उपरांत उसे मृत घोषित कर दिया।
छात्र की असामयिक मृत्यु की खबर फैलते ही परिवार में कोहराम मच गया। गुरुवार को बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक और परिजन कांटा चौराहा स्थित विद्यालय पहुंचे और मुख्य द्वार पर जमकर नारेबाजी करते हुए घेराव किया। परिजनों का स्पष्ट कहना है कि यदि प्रबंधन ने समय रहते गोल्डेन ऑवर में छात्र को 100 मीटर दूर अस्पताल पहुंचा दिया होता, तो प्रिंस की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने कैंटीन में बिकने वाली खाद्य सामग्री की गुणवत्ता की जांच और लापरवाह प्रबंधन के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।
मामले की सूचना मिलते ही झोटवाड़ा थाना पुलिस का दल मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित किया। झोटवाड़ा थाने के सहायक उपनिरीक्षक (ASI) नरेंद्र कुमार ने बताया कि परिजनों की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया गया है। शव का कांवटिया राजकीय अस्पताल में मेडिकल बोर्ड से पोस्टमॉर्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है और रिपोर्ट आने के बाद मौत के वास्तविक मेडिकल कारणों की पुष्टि होगी।
इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर शैक्षणिक संस्थानों में आपातकालीन चिकित्सा प्रबंधन, प्राथमिक उपचार की व्यवस्था और छात्र सुरक्षा प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजधानी के अभिभावकों में इस बात को लेकर भारी चिंता है कि आपात स्थिति में स्कूल प्रबंधन किस प्रकार निर्णय लेते हैं।
सामाजिक स्तर पर भी यह मांग तेज हो गई है कि सभी विद्यालयों के शिक्षकों और कर्मचारियों को चोकिंग (गले में खाना फंसना) से निपटने के लिए अनिवार्य हेइमलिक मैन्यूवर (Heimlich Maneuver) तथा सीपीआर का प्राथमिक प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी मासूम की जान त्वरित प्राथमिक चिकित्सा के अभाव में न जाए। साथ ही स्कूल कैंटीनों में खाद्य सुरक्षा मानकों की नियमित जांच का मुद्दा भी गरमा गया है।
पुलिस प्रशासन ने विद्यालय परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे लंच टाइम के दौरान घटी घटनाओं के वास्तविक समय और स्टाफ की गतिविधियों का सटीक क्रम पता लगाया जा सके। कैंटीन संचालक और घटना के समय मौके पर मौजूद अध्यापकों से भी पूछताछ की जा रही है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी मामले का संज्ञान लिया है और प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही की जांच के लिए रिपोर्ट तलब की जा सकती है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि विसरा और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट प्राप्त होने तथा बयानों की समीक्षा के बाद कानून सम्मत कठोर कदम उठाए जाएंगे।
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