MP Business News: मध्य प्रदेश में व्यापारियों का 'नो यूपीआई डे', डिजिटल पेमेंट छोड़ केवल नकद लेन-देन का आह्वान
मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों में व्यापारियों ने यूपीआई तकनीकी दिक्कतों, सर्वर फेलियर और कथित चार्ज के विरोध में 'नो यूपीआई डे' मनाते हुए केवल नकद लेन-देन करने का फैसला किया है।

- MP Business News: मध्य प्रदेश में व्यापारियों का 'नो यूपीआई डे', डिजिटल पेमेंट छोड़ केवल नकद लेन-देन का आह्वान
- Madhya Pradesh News: सर्वर फेलियर और तकनीकी झंझटों से परेशान व्यापारियों ने बुलाई हड़ताल, 'नो यूपीआई डे' से ग्राहक प्रभावित
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भोपाल। मध्य प्रदेश के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में खुदरा एवं थोक व्यापारियों ने डिजिटल भुगतान व्यवस्था की तकनीकी कमियों के खिलाफ एक अनूठा विरोध दर्ज कराते हुए 'नो यूपीआई डे' (No UPI Day) का आह्वान किया है। इस विरोध प्रदर्शन के तहत राजधानी भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर सहित कई शहरों के बाजारों में दुकानदारों ने अपनी दुकानों पर लगे क्यूआर कोड (QR Code) स्कैनर या तो हटा लिए या उन्हें कागज से ढक दिया। व्यापारियों ने ग्राहकों से ऑनलाइन भुगतान के बजाय केवल नकद (Cash) में लेन-देन करने का आग्रह किया, जिससे बाजारों में खरीदारी के लिए पहुंचे आम उपभोक्ताओं को खासी मशक्कत करनी पड़ी।व्यापारी संगठनों का कहना है कि यह कदम पूरी तरह से डिजिटल भुगतान के खिलाफ नहीं है, बल्कि बैंकों के लचर सर्वर, ट्रांजैक्शन अटकने की लगातार बढ़ती घटनाओं, साइबर धोखाधड़ी और भविष्य में लगने वाले संभावित शुल्कों को लेकर नीति-निर्माताओं का ध्यान आकर्षित करने के लिए उठाया गया एक सांकेतिक कदम है।
- पेमेंट अटकने और सर्वर फेलियर से बढ़ता तनाव
व्यापारियों के अनुसार, दैनिक व्यापार के दौरान यूपीआई के माध्यम से लेन-देन करते समय सबसे बड़ी समस्या बैंक सर्वर डाउन होने की आती है। भीड़भाड़ के समय जब कोई ग्राहक सामान खरीदकर भुगतान करता है, तो कई बार पैसा ग्राहक के खाते से कट जाता है लेकिन व्यापारी के खाते में क्रेडिट नहीं होता। ऐसी स्थिति में ग्राहक का दावा होता है कि उसने पैसे भेज दिए हैं, जबकि दुकानदार बिना बैंक मैसेज या खाते में राशि दिखे सामान सौंपने से हिचकिचाता है। यह स्थिति अक्सर काउंटर पर विवाद, बहस और समय की बर्बादी का कारण बनती है। बाद में फंसे हुए पैसे को वापस रिफंड होने में 24 से 72 घंटे या उससे भी अधिक का समय लग जाता है, जिससे छोटे दुकानदारों की कार्यशील पूंजी (वर्किंग कैपिटल) ब्लॉक हो जाती है।
- फर्जी मैसेज और साइबर फ्रॉड का नया खतरा
व्यापारी संघों के प्रतिनिधियों ने यह भी उजागर किया है कि बाजार में 'फेक यूपीआई पेमेंट ऐप्स' के जरिए ठगी की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। शातिर तत्व खरीदारी करने के बाद स्क्रीन पर सफल भुगतान का हूबहू फर्जी स्क्रीनशॉट दिखा देते हैं या साउंडबॉक्स जैसा नकली ऑडियो प्ले कर देते हैं। व्यस्त घंटों में दुकानदार तुरंत खाता चेक नहीं कर पाते और बाद में उन्हें पता चलता है कि खाते में पैसा आया ही नहीं। इसके अलावा, पुलिस और साइबर सेल द्वारा कई बार संदिग्ध लेन-देन के मामलों में जांच के नाम पर निर्दोष दुकानदारों के करंट और सेविंग्स अकाउंट फ्रीज कर दिए जाते हैं। किसी अनजान ग्राहक द्वारा भेजा गया विवादित पैसा यदि व्यापारी के खाते में पहुंच जाता है, तो बैंक खाता सीज होने से व्यापारी का पूरा कारोबार ठप हो जाता है।
- बैंक चार्ज और मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) की चिंता
विरोध का एक अन्य प्रमुख कारण डिजिटल लेन-देन पर भविष्य में लगने वाले शुल्क की आशंकाएं हैं। व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान में साउंडबॉक्स के मासिक किराये, पीओएस (POS) मशीनों के मेंटेनेंस चार्ज और वित्तीय कंपनियों द्वारा विभिन्न मदों में वसूले जाने वाले अतिरिक्त शुल्क से छोटे कारोबारियों का मुनाफा घट रहा है। व्यापारियों की मांग है कि जब सरकार डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा दे रही है, तो बैंकों और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) को ऐसी पुख्ता व्यवस्था करनी चाहिए कि तकनीकी खराबी के चलते किसी व्यापारी का नुकसान न हो और साइबर फ्रॉड के मामलों में दुकानदारों का उत्पीड़न बंद हो।
- ग्राहकों को झेलनी पड़ी नकदी की किल्लत
'नो यूपीआई डे' के चलते बाजारों में खरीदारी करने पहुंचे आम नागरिकों, विशेषकर युवाओं और उन लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा जो जेब में नकदी लेकर नहीं चलते। कई दुकानों पर ग्राहकों को एटीएम की तलाश में भटकना पड़ा, तो कई जगह नकद राशि न होने के कारण ग्राहकों को बिना सामान लिए ही लौटना पड़ा।व्यापारी संगठनों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी तकनीकी शिकायतों, बैंक सर्वर के त्वरित समाधान और खाता सीज होने जैसी समस्याओं पर प्रशासनिक स्तर पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे आगे भी इस तरह के सांकेतिक कदमों पर विचार करने के लिए विवश होंगे।
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