सोनभद्र में खौफनाक खेल: प्रशासन की बड़ी स्ट्राइक में गैस कालाबाजारी का नेटवर्क ध्वस्त, 32 से अधिक सिलेंडर बरामद
सोनभद्र के जिला पूर्ति अधिकारी ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि आरोपी के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) की धारा 3/7 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया
- उपभोक्ताओं की जेब पर डाका डालने वालों की खैर नहीं: ओबरा में आपूर्ति विभाग की छापेमारी से मचा हड़कंप, आरोपी गिरफ्तार
- लाल सोने की अवैध मंडी पर चला योगी सरकार का डंडा: सोनभद्र में भारी मात्रा में अवैध गैस स्टॉक जब्त, कड़ी कानूनी कार्रवाई शुरू
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक जिले सोनभद्र में प्रशासन ने गैस कालाबाजारी के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश करते हुए अवैध व्यापार पर जोरदार प्रहार किया है। जिले के ओबरा थाना क्षेत्र में लंबे समय से मिल रही शिकायतों के बाद आपूर्ति विभाग और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने बिजली की गति से छापेमारी की, जिसमें 32 से अधिक अवैध गैस सिलेंडर बरामद किए गए। यह कार्रवाई उस समय हुई जब पूरे प्रदेश में एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सरकार की ओर से सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। छापेमारी के दौरान मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया और कई अन्य संदिग्ध कारोबारी अपनी दुकानें छोड़कर भागने में सफल रहे। प्रशासन की इस सक्रियता ने उन सिंडिकेट्स के बीच डर पैदा कर दिया है जो संकट के समय का फायदा उठाकर आम जनता की जरूरतों का सौदा कर रहे थे।
सोनभद्र के ओबरा स्थित चोपन रोड पर एक गुप्त सूचना के आधार पर इस पूरी ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। आपूर्ति निरीक्षक और पूर्ति विभाग के अधिकारियों की अगुवाई वाली टीम ने जब एक संदिग्ध दुकान की तलाशी ली, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए। दुकान के भीतर अवैध रूप से भारी मात्रा में घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडरों को छिपाकर रखा गया था। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि ये सिलेंडर उन जरूरतमंद लोगों को ऊंचे दामों पर बेचे जाने थे, जो आधिकारिक बुकिंग के बावजूद सिलेंडर मिलने में देरी का सामना कर रहे थे। प्रशासन ने मौके से न केवल सिलेंडर जब्त किए, बल्कि एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ भी शुरू कर दी है, जिससे इस अवैध धंधे की अगली कड़ियों का पता लगाया जा सके।
जब्त किए गए सिलेंडरों के भंडार में केवल घरेलू उपयोग के ही नहीं, बल्कि भारी कमर्शियल सिलेंडर भी शामिल थे, जिनका उपयोग अक्सर होटलों और ढाबों में किया जाता है। टीम ने मौके से रिफिलिंग के उपकरण, छोटे सिलेंडर में गैस पलटने के लिए इस्तेमाल होने वाले पाइप, इलेक्ट्रॉनिक तराजू और पेट्रोमैक्स भी बरामद किए हैं। यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि वहां केवल सिलेंडरों की कालाबाजारी ही नहीं, बल्कि बड़े सिलेंडरों से छोटे सिलेंडरों में गैस भरने का खतरनाक खेल भी चल रहा था। इस तरह की रिफिलिंग न केवल गैरकानूनी है, बल्कि घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यह बड़े विस्फोट और जानलेवा आगजनी का कारण भी बन सकती है, जिसे लेकर प्रशासन ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। जांच टीम ने पाया कि जो सिलेंडर सरकारी रेट पर उपलब्ध होने चाहिए, उन्हें इस ठिकाने से 3500 से 4500 रुपये तक की अवैध कीमत पर बेचा जा रहा था। यह सीधे तौर पर उन गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के अधिकारों का हनन है जो उज्ज्वला योजना और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत सब्सिडी वाले गैस का लाभ पाने के हकदार हैं।
सोनभद्र के जिला पूर्ति अधिकारी ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि आरोपी के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) की धारा 3/7 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पकड़े गए व्यक्ति के पास न तो कोई वैध लाइसेंस था और न ही वह इन सिलेंडरों के स्टॉक का कोई संतोषजनक हिसाब दे पाया। प्रशासन अब इस बात की भी जांच कर रहा है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में सिलेंडर इन कालाबाजारी करने वालों तक कैसे पहुंच रहे हैं। क्या इसमें किसी अधिकृत गैस एजेंसी के कर्मचारियों या वितरकों की मिलीभगत है? इस कोण से जांच शुरू होने के बाद जिले की कई गैस एजेंसियों के मालिकों में भी खलबली मची हुई है।
इस कार्रवाई के बाद पूरे ओबरा और आसपास के इलाकों में हड़कंप मचा हुआ है। स्थानीय निवासियों का मानना है कि इस तरह की सख्त कार्रवाई से ही बाजार में सिलेंडरों की कृत्रिम किल्लत को खत्म किया जा सकता है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि जो भी व्यक्ति अवैध रूप से गैस का भंडारण करेगा या निर्धारित मूल्य से एक भी रुपया अधिक वसूलने की कोशिश करेगा, उसे बख्शा नहीं जाएगा। सोनभद्र जैसे आदिवासी बहुल जिले में, जहां लोग अपनी दैनिक जरूरतों के लिए कड़ी मेहनत करते हैं, वहां इस तरह की मुनाफाखोरी एक जघन्य अपराध है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत कंट्रोल रूम को दें ताकि अपराधियों को कानून के कटघरे में खड़ा किया जा सके।
वर्तमान में जिले के सभी आपूर्ति निरीक्षकों को अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय रहने और गैस वितरकों के स्टॉक की नियमित जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। यह छापेमारी केवल एक शुरुआत है, क्योंकि खुफिया विभाग उन अन्य ठिकानों की सूची भी तैयार कर रहा है जहां रात के अंधेरे में गैस सिलेंडरों की अवैध लोडिंग और अनलोडिंग की जाती है। तकनीकी साक्ष्यों और कॉल रिकॉर्ड्स के माध्यम से पुलिस उन बड़े मगरमच्छों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है जो छोटे दुकानदारों को मोहरा बनाकर इस करोड़ों के काले कारोबार को संचालित कर रहे हैं। प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि जब्त किए गए सिलेंडरों को तुरंत सरकारी गोदामों में जमा कराया जाए ताकि उन्हें नियमानुसार वैध उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा सके।
सोनभद्र में हुई यह कार्रवाई प्रदेश भर में चल रहे स्वच्छता अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति श्रृंखला से भ्रष्टाचार को उखाड़ फेंकना है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि जिले में गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है और उपभोक्ताओं को पैनिक बुकिंग करने की आवश्यकता नहीं है। यदि गैस वितरण में कोई समस्या आती है, तो उपभोक्ता सीधे टोल-फ्री नंबर पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। फिलहाल, ओबरा में हुई इस बरामदगी ने यह तो साबित कर दिया है कि कानून के लंबे हाथ उन लोगों तक पहुंचने के लिए पूरी तरह तैयार हैं जो समाज के हितों की बलि देकर अपनी तिजोरियां भरने में लगे हैं।
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