'व्यक्तिगत नहीं, पार्टी लाइन पर था बयान'- टीएमसी से सस्पेंड नेता ने IPS से वीडियो जारी कर मांगी माफ़ी

घटनाक्रम की कड़ियाँ 4 मई के चुनावी नतीजों से जुड़ी हैं, जिसमें ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी को भाजपा के हाथों करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। हार के बाद से ही पार्टी के भीतर असंतोष के स्वर फूटने लगे थे। रिजू दत्ता ने आरोप लगाया था कि जब उनके

May 10, 2026 - 23:12
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'व्यक्तिगत नहीं, पार्टी लाइन पर था बयान'- टीएमसी से सस्पेंड नेता ने IPS से वीडियो जारी कर मांगी माफ़ी
'व्यक्तिगत नहीं, पार्टी लाइन पर था बयान'- टीएमसी से सस्पेंड नेता ने IPS से वीडियो जारी कर मांगी माफ़ी
  • धमकी के बाद माफीनामा: आईपीएस अजय पाल शर्मा पर रिजू दत्ता के बदले सुर
  • हार के बाद टीएमसी में दरार; विवादित बयान देने वाले पूर्व प्रवक्ता ने अब खुद को बताया 'साधारण व्यक्ति'

पश्चिम बंगाल की सत्ता परिवर्तन के बाद मची राजनीतिक उथल-पुथल के बीच एक नया मोड़ आया है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पूर्व राष्ट्रीय प्रवक्ता रिजू दत्ता, जिन्होंने हाल ही में उत्तर प्रदेश के चर्चित आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को खुलेआम चेतावनी दी थी, अब पूरी तरह से बैकफुट पर नजर आ रहे हैं। टीएमसी से 6 साल के लिए निलंबित किए जाने के तुरंत बाद, दत्ता ने एक वीडियो संदेश जारी कर आईपीएस अजय पाल शर्मा से सार्वजनिक और बिना शर्त माफी मांग ली है। इस बदलाव ने न केवल प्रदेश की राजनीति में गर्माहट पैदा कर दी है, बल्कि यह भी दर्शाया है कि चुनाव परिणामों के बाद किस प्रकार पुराने समीकरण धराशायी हो रहे हैं और नेता अपनी सुरक्षा एवं भविष्य को लेकर चिंतित हैं। रिजू दत्ता ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि उन्होंने आईपीएस अजय पाल शर्मा के विरुद्ध जो भी अपमानजनक या धमकी भरे शब्द कहे थे, वे उनकी व्यक्तिगत राय नहीं थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे एक राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में पार्टी मुख्यालय से और पार्टी लाइन का पालन करते हुए बोल रहे थे। दत्ता के अनुसार, वह वीडियो टीएमसी के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से जारी किया गया था और उसका उद्देश्य केवल पार्टी के रुख को सामने रखना था। अब जबकि उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया है, वे नहीं चाहते कि किसी अधिकारी के साथ उनका कोई व्यक्तिगत विवाद बना रहे। उन्होंने खुद को एक 'साधारण व्यक्ति' बताते हुए शांति से जीवन जीने की इच्छा व्यक्त की है।

क्या था वह विवादित बयान?

अप्रैल 2026 में चुनाव आयोग ने आईपीएस अजय पाल शर्मा को दक्षिण 24 परगना में पुलिस पर्यवेक्षक नियुक्त किया था। इस दौरान शर्मा ने टीएमसी के एक उम्मीदवार के घर जाकर सख्त चेतावनी दी थी, जिसके बाद रिजू दत्ता ने एक वीडियो जारी कर उन्हें 'योगी का ट्रिगर-हैप्पी काउबॉय' कहा था। दत्ता ने तब खुली चुनौती देते हुए कहा था कि '4 मई के बाद हम आपको यूपी से बंगाल खींच लाएंगे और कोई आपको नहीं बचा पाएगा'।

घटनाक्रम की कड़ियाँ 4 मई के चुनावी नतीजों से जुड़ी हैं, जिसमें ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी को भाजपा के हाथों करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा। हार के बाद से ही पार्टी के भीतर असंतोष के स्वर फूटने लगे थे। रिजू दत्ता ने आरोप लगाया था कि जब उनके परिवार पर हमला हुआ, तो पार्टी के किसी बड़े नेता ने उनकी मदद नहीं की, जबकि भाजपा नेताओं ने हस्तक्षेप कर स्थिति संभाली। इन्हीं बयानों और पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाने के कारण उन्हें 'अनुशासनहीनता' के आधार पर निलंबित कर दिया गया। निलंबन के बाद बदले हुए तेवर यह बताते हैं कि दत्ता अब उन कानूनी और प्रशासनिक पचड़ों से बचना चाहते हैं जो उनके पिछले बयानों के कारण उत्पन्न हो सकते थे। आईपीएस अजय पाल शर्मा, जिन्हें उत्तर प्रदेश में 'सिंघम' और 'एनकाउंटर स्पेशलिस्ट' के रूप में जाना जाता है, बंगाल चुनाव के दौरान अपनी सख्त कार्यशैली के लिए चर्चा में रहे थे। उनके खिलाफ टीएमसी के प्रवक्ता के रूप में दिए गए बयानों को भाजपा ने पुलिस बल का अपमान करार दिया था। अब रिजू दत्ता का माफीनामा इस बात का संकेत है कि सत्ता बदलने के साथ ही उन अधिकारियों का मनोबल बढ़ा है जिन्हें चुनाव के दौरान निशाना बनाया गया था। दत्ता ने अपने वीडियो में बार-बार इस बात पर ध्यान केंद्रित किया कि उनके साथ अधिकारी का कोई व्यक्तिगत मनमुटाव नहीं है और वे अब इस अध्याय को हमेशा के लिए बंद करना चाहते हैं।

टीएमसी के भीतर मचे इस घमासान ने पार्टी की आंतरिक एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिजू दत्ता अकेले नहीं हैं जिन्हें निलंबित किया गया है; उनके साथ दो अन्य प्रवक्ताओं को भी बाहर का रास्ता दिखाया गया है। यह स्थिति तब बनी है जब भाजपा के शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं और प्रशासन पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं। दत्ता का झुकाव अब भाजपा के प्रति बढ़ता हुआ दिख रहा है, क्योंकि उन्होंने हाल ही में भाजपा सरकार द्वारा हिंसा रोकने के प्रयासों की सराहना की थी। उनके माफीनामे को इसी व्यापक राजनीतिक बदलाव के एक हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज है कि क्या रिजू दत्ता का यह माफीनामा उनके भविष्य की किसी नई पारी का आधार है। उन्होंने अपने वीडियो में स्वीकार किया कि वह 'भयभीत' हैं और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। आईपीएस अजय पाल शर्मा से मांगी गई माफी को एक 'रणनीतिक कदम' माना जा रहा है ताकि भविष्य में किसी भी संभावित प्रतिशोध या कानूनी कार्रवाई से बचा जा सके। बंगाल की राजनीति में एक समय 'शेर' की तरह दहाड़ने वाले प्रवक्ता का यह रक्षात्मक रुख प्रदेश के बदलते सियासी मिजाज की गवाही दे रहा है, जहां अब पुरानी शत्रुताएं और अहंकार किनारे किए जा रहे हैं।

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