मुंबई में आंधी-तूफान के बीच चलती कैब पर गिरा विशालकाय पीपल का पेड़, बाल-बाल बची सवारियों की जान।

मुंबई की तेज रफ्तार जिंदगी में हर दिन लाखों लोग सड़कों पर अपने गंतव्य की ओर बढ़ते हैं, लेकिन कभी-कभी कुछ सेकंड का फासला

May 25, 2026 - 11:01
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मुंबई में आंधी-तूफान के बीच चलती कैब पर गिरा विशालकाय पीपल का पेड़, बाल-बाल बची सवारियों की जान।
मुंबई में आंधी-तूफान के बीच चलती कैब पर गिरा विशालकाय पीपल का पेड़, बाल-बाल बची सवारियों की जान।
  • रफ्तार पकड़ती जिंदगी के बीच अचानक मंडराई मौत, मुंबई की व्यस्त सड़क पर प्रकृति के प्रकोप से सहमे लोग
  • जर्जर पेड़ों और मानसूनी हवाओं के बीच सफर करने की मजबूरी, हादसे के बाद सुरक्षा उपायों को लेकर उठे बड़े सवाल

मुंबई की तेज रफ्तार जिंदगी में हर दिन लाखों लोग सड़कों पर अपने गंतव्य की ओर बढ़ते हैं, लेकिन कभी-कभी कुछ सेकंड का फासला जिंदगी और मौत के बीच की लकीर बन जाता है। देश की आर्थिक राजधानी के एक बेहद व्यस्त इलाके में उस समय चीख-पुकार मच गई, जब एक चलती हुई कैब पर अचानक एक विशालकाय पुराना पीपल का पेड़ जड़ से उखड़कर गिर गया। दोपहर के समय जब ट्रैफिक सामान्य रूप से चल रहा था, तब अचानक मौसम के बदले मिजाज और तेज हवाओं के झोंके ने इस भारी-भरकम पेड़ को सड़क की तरफ झुका दिया। चश्मदीदों के मुताबिक, पेड़ के गिरने की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास से गुजरने वाले अन्य वाहन चालक भी सहम गए और उन्होंने तुरंत अपने वाहनों के ब्रेक लगा दिए।

हादसे का शिकार हुई कैब में उस समय चालक के साथ कुछ सवारियां भी मौजूद थीं, जो रोजाना की तरह अपने दफ्तर या निजी काम से जा रही थीं। जैसे ही पेड़ का मुख्य तना और उसकी भारी शाखाएं कार की छत पर गिरीं, वाहन का अगला और बीच का हिस्सा बुरी तरह पिचक गया। कार के शीशे चकनाचूर हो गए और लोहे की चादरें मुड़कर अंदर की तरफ धंस गईं, जिससे ऐसा लगा कि अंदर बैठे लोगों का बचना नामुमकिन है। हालांकि, प्रकृति के इस भीषण प्रहार के बीच एक बड़ा चमत्कार हुआ और कार की मजबूत बनावट के कारण अंदर बैठे यात्रियों को गंभीर चोटें नहीं आईं। कार के दरवाजे पूरी तरह जाम हो चुके थे, जिससे अंदर फंसे लोग मदद के लिए चिल्लाने लगे और खिड़कियों के टूटे हुए कांच से बाहर निकलने का प्रयास करने लगे।

सड़क पर मौजूद स्थानीय लोगों, दुकानदारों और अन्य राहगीरों ने बिना वक्त गंवाए तुरंत साहस का परिचय दिया और राहत कार्य में जुट गए। लोगों ने अपनी गाड़ियों को किनारे खड़ा किया और कैब की तरफ दौड़े ताकि अंदर फंसे हुए सहमे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। भारी शाखाओं को हाथों से हटाना नामुमकिन था, इसलिए स्थानीय लोगों ने लोहे की रॉड और अन्य उपकरणों की मदद से कार के दरवाजों को जबरन खोलने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस और स्थानीय प्रशासन को भी सूचित किया गया, जिसके बाद आपातकालीन सेवाएं और आपदा प्रबंधन की टीमें क्रेन और आधुनिक कटर मशीनों के साथ मौके पर रवाना हुईं।

प्रशासनिक अधिकारियों और फायर ब्रिगेड के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर सबसे पहले गैस कटर की मदद से कार के हिस्सों को काटा ताकि फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके। इस दौरान कैब चालक और सवारियों को जब सुरक्षित बाहर निकाला गया, तो उनके चेहरों पर खौफ साफ देखा जा सकता था और उनके मुंह से बस यही निकला कि भगवान ने आज हमें नई जिंदगी दी है। सुरक्षित बचे यात्रियों को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें पूरी तरह स्वस्थ घोषित कर दिया। इस हादसे में किसी की जान न जाना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है, क्योंकि पेड़ का वजन कई टन था और वह सीधे चलती गाड़ी पर गिरा था।

इस अचानक हुए हादसे के कारण उस पूरे मार्ग पर यातायात पूरी तरह से ठप हो गया और कई किलोमीटर लंबा जाम लग गया। आपदा प्रबंधन की टीम ने पेड़ की भारी-भरकम शाखाओं को कटर से छोटे-छोटे हिस्सों में काटना शुरू किया और क्रेन की मदद से उन्हें सड़क के किनारे हटाया गया। मुंबई पुलिस के यातायात विभाग ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए वाहनों को वैकल्पिक मार्गों पर मोड़ दिया ताकि एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों को रास्ता मिल सके। सड़क को पूरी तरह साफ करने और क्षतिग्रस्त कैब को क्रेन से हटाने में प्रशासन को करीब तीन से चार घंटे का कड़ा परिश्रम करना पड़ा, जिसके बाद ही यातायात व्यवस्था बहाल हो सकी।

शहरी इलाकों में इस तरह के हादसों ने अब नगर निगम और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि मानसून की शुरुआत से पहले और तेज हवाओं के मौसम में जर्जर और कमजोर हो चुके पेड़ों की छंटाई का काम ठीक से नहीं किया जाता है। कई पेड़ कंक्रीट की सड़कों और फुटपाथों के निर्माण के कारण अपनी जड़ें कमजोर कर चुके हैं, जिससे हल्की सी आंधी में भी उनके गिरने का खतरा बना रहता है। इस घटना के बाद अब नागरिक प्रशासन से मांग की जा रही है कि वे शहर के सभी पुराने और खतरनाक पेड़ों का तुरंत ऑडिट करवाएं ताकि भविष्य में ऐसे जानलेवा हादसों को रोका जा सके।

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