बढ़ती एलपीजी की कीमतों के बीच इंडक्शन कुकटॉप बना किचन का नया साथी, दाल बनाने की तकनीक में आया बड़ा बदलाव
आजकल के आधुनिक युग में जिस तरह से रसोई गैस यानी एलपीजी की कीमतों में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है, उसने आम मध्यमवर्गीय परिवारों के
- इंडक्शन पर दाल की सीटी से खराब नहीं होगा कीमती इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, यूट्यूबर ने साझा किए स्मार्ट कुकिंग टिप्स और घरेलू जुगाड़
- रसोई में तकनीक का सही इस्तेमाल: दाल का पानी बाहर आने की समस्या का स्थाई समाधान, अब बिना किसी डर के करें इंडक्शन का उपयोग
आजकल के आधुनिक युग में जिस तरह से रसोई गैस यानी एलपीजी की कीमतों में निरंतर वृद्धि देखी जा रही है, उसने आम मध्यमवर्गीय परिवारों के बजट पर काफी प्रभाव डाला है। इस आर्थिक दबाव और साथ ही समय की बचत को देखते हुए भारतीय रसोईघरों में इंडक्शन कुकटॉप का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है। इंडक्शन न केवल बिजली की खपत के मामले में किफायती साबित हो रहा है, बल्कि यह पारंपरिक चूल्हों की तुलना में खाना बनाने की प्रक्रिया को काफी तेज कर देता है। हालांकि, इंडक्शन के बढ़ते उपयोग के साथ गृहणियों के मन में कुछ विशेष प्रकार की चिंताएं भी पैदा हो गई हैं। विशेष रूप से जब बात भारतीय भोजन के मुख्य आधार यानी 'दाल' को बनाने की आती है, तो लोग अक्सर हिचकिचाते हैं। इंडक्शन के शीशे वाली सतह पर कुकर की सीटी से निकलने वाले गर्म पानी और झाग के गिरने का डर हमेशा बना रहता है, जिससे उपकरण के खराब होने का खतरा रहता है।
दाल बनाते समय कुकर की सीटी से पानी बाहर आना एक आम समस्या है, लेकिन इंडक्शन के मामले में यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है क्योंकि यह एक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है। यदि सीटी से निकला पानी इंडक्शन के अंदरूनी सर्किट या बटन वाले हिस्से में चला जाए, तो शॉर्ट सर्किट होने की संभावना बनी रहती है। इसी समस्या का समाधान करते हुए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कुकिंग विशेषज्ञ उर्मिला तोमर ने कुछ बेहद प्रभावी तरीके साझा किए हैं। उन्होंने विस्तार से बताया है कि कैसे इंडक्शन पर दाल बनाते समय सुरक्षा और स्वच्छता दोनों का ख्याल रखा जा सकता है। उनके द्वारा बताए गए सुझावों में सबसे प्रमुख यह है कि इंडक्शन पर दाल बनाते समय कभी भी 'हाई पावर' का इस्तेमाल लगातार नहीं करना चाहिए। इंडक्शन की हीटिंग प्रक्रिया बहुत तीव्र होती है, इसलिए तापमान नियंत्रण ही इस समस्या को रोकने की पहली सीढ़ी है।
इंडक्शन को गंदा होने से बचाने और उसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए एक विशेष घरेलू तकनीक का उपयोग किया जा सकता है। दाल को कुकर में चढ़ाने से पहले उसमें एक छोटा स्टील का चम्मच डालना एक बहुत ही पुराना और कारगर तरीका है, जिसे इंडक्शन कुकिंग के लिए भी अपनाया जा सकता है। यह चम्मच कुकर के अंदर बनने वाले झाग के दबाव को कम करता है, जिससे पानी सीटी के रास्ते बाहर नहीं आता। इसके अलावा, एक और महत्वपूर्ण तकनीक यह है कि कुकर की सीटी वाले हिस्से और ढक्कन के किनारों पर थोड़ा सा खाद्य तेल लगा दिया जाए। ऐसा करने से पानी के कण आपस में चिपकते नहीं हैं और सीटी आने पर केवल भाप ही बाहर निकलती है, जिससे इंडक्शन की सतह बिल्कुल साफ रहती है। इंडक्शन कुकटॉप का उपयोग करते समय हमेशा 'इंडक्शन बेस' वाले बर्तनों का ही चुनाव करें। यदि आप कुकर का उपयोग कर रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि उसका तल पूरी तरह से समतल हो। असमान तल वाले बर्तन न केवल ऊर्जा की बर्बादी करते हैं, बल्कि वे इंडक्शन की कांच की सतह पर खरोंच भी पैदा कर सकते हैं, जिससे भविष्य में पानी रिसने का खतरा बढ़ जाता है।
कुकिंग के दौरान इंडक्शन के पैनल को सुरक्षित रखने के लिए एक और अनोखा 'जुगाड़' काफी लोकप्रिय हो रहा है। इसमें इंडक्शन की सतह और कुकर के बीच एक पतला सूती कपड़ा या किचन टिश्यू पेपर बिछाया जा सकता है। चूंकि इंडक्शन चुंबकीय तकनीक (मैग्नेटिक इंडक्शन) पर काम करता है, इसलिए यह कपड़े को जलाता नहीं है, बल्कि बर्तन को सीधा गर्म करता है। यदि सीटी से थोड़ा बहुत पानी गिरता भी है, तो वह कपड़ा या टिश्यू उसे तुरंत सोख लेता है और इंडक्शन की मशीनरी सुरक्षित रहती है। हालांकि, यह करते समय इस बात का ध्यान रखना अनिवार्य है कि कपड़ा बहुत ज्यादा मोटा न हो और वह इंडक्शन के एयर वेंट (हवा निकलने वाले छिद्रों) को न ढके, वरना उपकरण ओवरहीट होकर बंद हो सकता है।
दाल बनाने के लिए इंडक्शन के फंक्शन बटनों का सही चयन करना भी एक कला है। अधिकांश आधुनिक इंडक्शन में 'करी' या 'सूप' जैसे प्री-सेट विकल्प होते हैं, जो मध्यम आंच पर खाना पकाते हैं। उर्मिला तोमर के अनुसार, दाल को सीधे तेज आंच पर पकाने के बजाय शुरुआत के कुछ मिनट 800 से 1000 वाट पर रखना चाहिए और जैसे ही कुकर में दबाव बनना शुरू हो, इसे घटाकर 400 या 500 वाट कर देना चाहिए। कम तापमान पर दाल न केवल बेहतर तरीके से गलती है, बल्कि सीटी आने पर पानी के बाहर छलकने की गुंजाइश भी लगभग शून्य हो जाती है। यह तकनीक बिजली की बचत करने में भी काफी सहायक सिद्ध होती है।
स्वच्छता के दृष्टिकोण से देखा जाए तो इंडक्शन को साफ करना गैस चूल्हे की तुलना में कहीं अधिक आसान है, लेकिन दाल के पानी के दाग अगर सूख जाएं, तो उन्हें हटाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यदि खाना बनाते समय गलती से पानी गिर जाए, तो कुकिंग पूरी होने के बाद इंडक्शन को पूरी तरह ठंडा होने दें और फिर एक नम माइक्रोफाइबर कपड़े से उसे पोंछ दें। कभी भी गर्म इंडक्शन पर सीधे पानी न डालें या उसे रगड़ने के लिए धातु के स्क्रब का उपयोग न करें। उर्मिला तोमर के सुझावों ने उन लाखों लोगों को राहत दी है जो केवल सफाई और खराबी के डर से इंडक्शन का पूरा लाभ नहीं ले पा रहे थे। इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखकर रसोई का काम बेहद सुलभ और तनावमुक्त बनाया जा सकता है।
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