लखनऊ के कैसरबाग में दुखद हादसा- ट्रांसफार्मर से करंट लगने से 8 वर्षीय बच्चे की मौत, प्रशासन पर लापरवाही का आरोप।
Lucknow News: लखनऊ के कैसरबाग इलाके में 27 जुलाई 2025 को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। फूल बाग की शंकर पूरी कॉलोनी में क्रिकेट खेलते ....
लखनऊ के कैसरबाग इलाके में 27 जुलाई 2025 को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। फूल बाग की शंकर पूरी कॉलोनी में क्रिकेट खेलते समय 8 वर्षीय बच्चा फहद ट्रांसफार्मर से करंट लगने के कारण अपनी जान गंवा बैठा। बच्चा अपने दोस्तों के साथ पार्क में क्रिकेट खेल रहा था, जब उनकी गेंद ट्रांसफार्मर के पास चली गई। गेंद को उठाने के प्रयास में फहद ने ट्रांसफार्मर को छू लिया, जिसके कारण उसे तेज करंट लगा और उसकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। इस हादसे ने स्थानीय लोगों में गुस्सा और दुख पैदा कर दिया है, और उन्होंने बिजली विभाग की लापरवाही को इसका जिम्मेदार ठहराया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, और बिजली विभाग ने ट्रांसफार्मर के रखरखाव के लिए जिम्मेदार फीडर मैनेजर को निलंबित कर दिया है।
27 जुलाई 2025 को सुबह करीब 10 बजे, कैसरबाग के फूल बाग क्षेत्र में शंकर पूरी कॉलोनी के एक पार्क में यह दुखद घटना घटी। फहद, जो 8 साल का था, अपने दोस्तों के साथ क्रिकेट खेल रहा था। खेल के दौरान उनकी गेंद पार्क में लगे 440 केवीए ट्रांसफार्मर के पास चली गई। ट्रांसफार्मर का सुरक्षा घेरा टूटा हुआ था, और वहां कोई चेतावनी बोर्ड भी नहीं था। फहद जब गेंद उठाने गया, तो उसका शरीर ट्रांसफार्मर के फ्यूज यूनिट के संपर्क में आ गया। तेज करंट के कारण वह तुरंत गिर गया और उसकी मृत्यु हो गई।
स्थानीय लोगों ने बताया कि हादसे के समय आसपास मौजूद बच्चे और अन्य लोग घबरा गए। फहद के दोस्तों ने शोर मचाया, जिसके बाद स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि बिजली की आपूर्ति तुरंत बंद नहीं की गई, जिसके कारण बच्चे को बचाने में देरी हुई। फहद को सिविल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
फहद की मृत्यु ने उसके परिवार और दोस्तों को गहरे सदमे में डाल दिया। फहद के चाचा, मोहम्मद रईस, ने बताया कि वह एक होनहार बच्चा था, जो बड़ा होकर डॉक्टर बनना चाहता था। उन्होंने बिजली विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया और कहा, “ट्रांसफार्मर की जाली टूटी थी, और हमने कई बार इसकी शिकायत की थी। अगर समय पर मरम्मत कर दी जाती, तो मेरा भतीजा आज जिंदा होता।” फहद के दोस्तों ने भी दुख जताया। एक दोस्त ने कहा, “हमारा दोस्त चला गया। वह हमेशा हमारे साथ खेलता था और कोल्ड ड्रिंक पीने में मस्ती करता था। अब कुछ भी अच्छा नहीं लगता।”
स्थानीय समुदाय में इस हादसे को लेकर गुस्सा है। लोगों ने बताया कि पहले भी इस ट्रांसफार्मर के पास कई जानवरों की करंट से मृत्यु हो चुकी है, लेकिन बिजली विभाग ने कोई कदम नहीं उठाया। एक निवासी ने कहा, “कम से कम 14 जानवर इस ट्रांसफार्मर के कारण मर चुके हैं। अगर पहले कार्रवाई हो जाती, तो यह हादसा टल सकता था।”
- पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
हादसे की सूचना मिलते ही वाशी पुलिस स्टेशन की टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने फहद के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा और मामले की जांच शुरू की। अभी तक कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है, लेकिन पुलिस ने प्रारंभिक जांच में ट्रांसफार्मर की टूटी जाली और सुरक्षा उपायों की कमी को नोट किया है।
हुसैनगंज केंद्र के अधिशासी अभियंता अरुण कुमार ने बताया कि ट्रांसफार्मर के रखरखाव के लिए जिम्मेदार फीडर मैनेजर अमरजीत को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उन्होंने कहा, “यह एक दुखद घटना है। हमने परिवार को मुआवजे की प्रक्रिया शुरू कर दी है और इसकी पूरी जांच की जा रही है।” हालांकि, बिजली विभाग ने दावा किया कि ट्रांसफार्मर सुरक्षित था, लेकिन टूटी जाली ने उनके दावे पर सवाल उठाए।
- बिजली विभाग की लापरवाही
स्थानीय लोगों और फहद के परिवार ने बिजली विभाग पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनके अनुसार, ट्रांसफार्मर का गेट कई दिनों से खुला था, और टूटी जाली की मरम्मत के लिए बार-बार शिकायत की गई थी। मोहम्मद रईस ने कहा, “हमने कई बार बिजली विभाग को सूचित किया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।” सोशल मीडिया पर भी लोगों ने बिजली विभाग को “मौत का सौदागर” कहकर निशाना बनाया। एक यूजर ने लिखा, “स्मार्ट सिटी के दावों के बीच हर गली में खुले तार और ट्रांसफार्मर मौत बांट रहे हैं।”
पिछले कुछ वर्षों में लखनऊ में इस तरह की कई घटनाएं सामने आई हैं। उदाहरण के लिए, 2 सितंबर 2024 को गुडंबा में एक 16 वर्षीय लड़के की हाई मास्ट पोल से करंट लगने से मृत्यु हो गई थी। उस घटना के बाद नगर निगम ने चार कर्मचारियों को निलंबित किया था।
इस हादसे ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “योगी राज में बिजली विभाग मौत बांट रहा है। न कोई घेराबंदी, न चेतावनी बोर्ड।” स्थानीय लोग और विपक्षी दलों ने मांग की है कि बिजली विभाग के अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
लखनऊ के निवासियों ने इस घटना को स्मार्ट सिटी के दावों पर सवाल उठाने का मौका माना। एक यूजर ने लिखा, “लखनऊ को स्मार्ट सिटी कहते हैं, लेकिन बुनियादी सुरक्षा तक नहीं है।” विपक्षी दलों ने सरकार से मांग की है कि सभी सार्वजनिक स्थानों पर ट्रांसफार्मरों की सुरक्षा जांच की जाए।
यह हादसा बिजली विभाग की लापरवाही और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा की कमी को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाने चाहिए:
नियमित जांच: सभी ट्रांसफार्मरों की नियमित जांच होनी चाहिए, और टूटी जालियों या खुले गेट की तुरंत मरम्मत की जानी चाहिए।
चेतावनी बोर्ड: ट्रांसफार्मरों के पास स्पष्ट चेतावनी बोर्ड और सुरक्षा घेरे होने चाहिए।
जागरूकता अभियान: बच्चों और आम लोगों को बिजली के उपकरणों के खतरों के बारे में जागरूक करना जरूरी है।
तेज कार्रवाई: शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।
फहद की मृत्यु एक दुखद और टालने योग्य हादसा है, जिसने लखनऊ के बिजली विभाग की लापरवाही को सामने ला दिया। इस घटना ने न केवल एक परिवार को तोड़ दिया, बल्कि समाज में सुरक्षा उपायों की कमी को भी उजागर किया। बिजली विभाग ने फीडर मैनेजर को निलंबित कर प्रारंभिक कार्रवाई की है, लेकिन यह काफी नहीं है। सरकार और प्रशासन को चाहिए कि वे सभी सार्वजनिक स्थानों पर बिजली उपकरणों की सुरक्षा सुनिश्चित करें। फहद जैसे मासूम बच्चों की जान बचाने के लिए त्वरित और प्रभावी कदम उठाए जाने की जरूरत है। यह हादसा हमें याद दिलाता है कि लापरवाही की कीमत कितनी भारी हो सकती है।
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