नवी मुंबई में भाषा विवाद- मराठी बोलने पर छात्र पर हॉकी स्टिक से हमला, चार के खिलाफ केस दर्ज।
Navi Mumbai: महाराष्ट्र में मराठी और हिंदी को लेकर चल रहा भाषा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। नवी मुंबई के वाशी इलाके में स्थित आईसीएलईएस मोतीलाल....
महाराष्ट्र में मराठी और हिंदी को लेकर चल रहा भाषा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। नवी मुंबई के वाशी इलाके में स्थित आईसीएलईएस मोतीलाल झुनझुनवाला कॉलेज के बाहर एक गंभीर घटना सामने आई। इस घटना में 20 वर्षीय छात्र सूरज विट्ठल पवार पर मराठी में बात करने को लेकर उनके सहपाठी फैजान नाइक और तीन अन्य छात्रों ने कथित तौर पर हॉकी स्टिक से हमला कर दिया। इस हमले में सूरज को गंभीर चोटें आईं, और वाशी पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 118(1) के तहत केस दर्ज किया है। सूरज पवार, जो बीएससी आईटी के तीसरे वर्ष के छात्र हैं, कॉलेज के बाहर फुटपाथ पर थे। पुलिस के अनुसार, यह विवाद एक व्हाट्सएप ग्रुप में शुरू हुआ, जिसका नाम SYIT (ICL) था। सूरज ने इस ग्रुप में अपने परिवार के एक विवाह समारोह का निमंत्रण मराठी में साझा किया था। उनके सहपाठी फैजान नाइक ने इस निमंत्रण का जवाब हिंदी में दिया, जिस पर सूरज ने मजाकिया लहजे में पूछा कि वह मराठी में क्यों नहीं बोल रहे। सूरज ने कथित तौर पर यह भी कहा, “मराठी में बोलो, वरना राज ठाकरे आ जाएंगे,” जो महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेता राज ठाकरे के भाषा समर्थन वाले रुख का हवाला था।
इस टिप्पणी से फैजान नाइक नाराज हो गए, और ग्रुप में दोनों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। अगले दिन सुबह, फैजान और उनके तीन अन्य सहपाठियों ने सूरज को कॉलेज के बाहर घेर लिया। पुलिस के अनुसार, फैजान ने सूरज के सिर पर हॉकी स्टिक से वार किया, जबकि अन्य तीन छात्रों ने उन्हें घूंसे मारे और गाली-गलौज की। इस हमले में सूरज को गंभीर चोटें आईं, और उन्हें खून बहने की हालत में छोड़ दिया गया।
सूरज ने शुरू में डर के कारण शिकायत दर्ज नहीं की। उन्होंने नवी मुंबई म्यूनिसिपल हॉस्पिटल में इलाज के दौरान डॉक्टरों को बताया कि वह गिर गए थे। हालांकि, बाद में उन्हें धमकी भरे फोन कॉल आए, जिसमें पुलिस में शिकायत न करने की चेतावनी दी गई। इसके बावजूद, सूरज ने हिम्मत दिखाई और वाशी पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज की।
वाशी पुलिस ने फैजान नाइक को गिरफ्तार कर लिया है और तीन अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 118(1) (खतरनाक हथियारों से चोट पहुंचाना), 352 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान), 351(2) और 351(3) (आपराधिक धमकी), और धारा 3(5) (साझा इरादा) के तहत केस दर्ज किया है। वाशी डिवीजन के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) आदिनाथ बुद्धवंत ने बताया कि जांच में प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और कॉलेज के बाहर लगे सीसीटीवी फुटेज की मदद ली जा रही है।
यह घटना महाराष्ट्र में मराठी और हिंदी को लेकर चल रहे भाषाई तनाव का हिस्सा है। हाल ही में, महाराष्ट्र सरकार ने कक्षा 1 से 5 तक के स्कूलों में मराठी और अंग्रेजी के साथ हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में लागू करने का फैसला किया था। इस फैसले का विपक्षी दलों और मराठी भाषा समर्थकों, खासकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने तीखा विरोध किया। MNS के नेता राज ठाकरे ने गैर-मराठी भाषियों को मराठी सीखने की सलाह दी थी, लेकिन हिंसा से बचने की भी अपील की थी।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमारा विवाद मराठी और हिंदी को लेकर नहीं है। मराठी के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओं को भी स्वीकार करना चाहिए। महाराष्ट्र में मराठी पर जोर देना स्वाभाविक है, इसमें कोई गलत बात नहीं। लेकिन भाषा के नाम पर किसी की पिटाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हमने पहले भी कार्रवाई की है और भविष्य में भी करेंगे।”
- MNS की प्रतिक्रिया
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने इस घटना को गंभीरता से लिया और 24 जुलाई को उनके कार्यकर्ता वाशी पुलिस स्टेशन पहुंचे। MNS के प्रवक्ता गजानन काले ने पुलिस से मुलाकात की और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने सूरज और उनके परिवार से भी मुलाकात की। MNS ने चेतावनी दी कि अगर इस मामले में न्याय में देरी हुई, तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे।
हालांकि, MNS की ओर से पहले भी मराठी न बोलने वालों के खिलाफ हिंसक घटनाएं सामने आई हैं। उदाहरण के लिए, ठाणे में एक गुजराती दुकानदार को मराठी न बोलने पर पीटा गया था, और नांदेड़ में एक शौचालय कर्मचारी पर हमला हुआ था। इन घटनाओं ने भाषाई तनाव को और बढ़ाया है।
इस घटना ने महाराष्ट्र में भाषा विवाद को और गहरा कर दिया है। सोशल मीडिया पर लोगों ने इस मामले में अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। कुछ लोगों ने सूरज के पक्ष में मराठी भाषा के सम्मान की बात की, जबकि अन्य ने हिंसा की निंदा की और सभी भाषाओं के सह-अस्तित्व की वकालत की। एक यूजर ने लिखा, “मराठी हमारी पहचान है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम दूसरी भाषाओं का अपमान करें।”
विपक्षी दलों ने सरकार पर इस मुद्दे को ठीक करने में नाकामी का आरोप लगाया है। कुछ नेताओं का कहना है कि सरकार की नीतियां भाषाई तनाव को बढ़ावा दे रही हैं। इस बीच, विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं सामाजिक एकता को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
यह घटना न केवल कॉलेज के छात्रों, बल्कि पूरे समाज पर प्रभाव डाल रही है। मराठी भाषा के प्रति गर्व स्वाभाविक है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अन्य भाषाओं को दबाया जाए। इस घटना ने युवाओं में डर पैदा किया है, खासकर उन लोगों में जो कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर खुलकर अपनी बात रखना चाहते हैं। सूरज को मिली धमकियां इस बात का सबूत हैं कि हिंसा का डर लोगों को अपनी आवाज उठाने से रोक सकता है।
- इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कुछ कदम उठाए जा सकते हैं:
जागरूकता अभियान: स्कूलों और कॉलेजों में सभी भाषाओं के सम्मान और सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम चलाए जाएं।
सख्त कानूनी कार्रवाई: भाषा के नाम पर हिंसा करने वालों के खिलाफ त्वरित और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
संवाद और शिक्षा: भाषा नीतियों को लागू करने से पहले सभी समुदायों के साथ संवाद करना जरूरी है ताकि गलतफहमियां दूर हों।
पुलिस की सक्रियता: पुलिस को ऐसी घटनाओं की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए ताकि पीड़ितों को समय पर न्याय मिले।
नवी मुंबई में सूरज पवार पर हुए हमले ने महाराष्ट्र में भाषा विवाद की गंभीरता को सामने ला दिया है। यह घटना न केवल मराठी और हिंदी के बीच तनाव को दर्शाती है, बल्कि सामाजिक एकता की आवश्यकता पर भी जोर देती है। वाशी पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए फैजान नाइक को गिरफ्तार किया है, और अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। मुख्यमंत्री फडणवीस और MNS ने इस घटना की निंदा की है, लेकिन समाज को यह समझना होगा कि भाषा एकता का माध्यम होनी चाहिए, न कि विवाद का कारण।
What's Your Reaction?







