UP News: बलिया में पुलिस मुठभेड़, 25 हजार के इनामी बदमाश दीपक पासवान घायल, साथी सतीश सैनी फरार।
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में बीती की देर रात एक सनसनीखेज पुलिस मुठभेड़ ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया। भीमपुरा थाना क्षेत्र के सबदलपुर चट्टी...
उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में बीती की देर रात एक सनसनीखेज पुलिस मुठभेड़ ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया। भीमपुरा थाना क्षेत्र के सबदलपुर चट्टी के पास पुलिस की चेकिंग के दौरान 25 हजार रुपये के इनामी बदमाश दीपक पासवान ने पुलिस पर फायरिंग की, जिसके जवाब में पुलिस की कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी। घायल दीपक को तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। हालांकि, उसका साथी सतीश सैनी अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया। इस मुठभेड़ में पुलिस ने एक तमंचा, कारतूस, और चोरी की मोटरसाइकिल बरामद की है। यह घटना बलिया पुलिस की अपराधियों के खिलाफ चल रही मुहिम का हिस्सा है, जिसे स्थानीय लोग "ऑपरेशन लंगड़ा" के नाम से भी जानते हैं।
बीती की रात करीब 12:30 बजे, भीमपुरा थाना पुलिस सबदलपुर चट्टी के पास वाहनों की चेकिंग कर रही थी। अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) कृपा शंकर के अनुसार, इस दौरान एक काली मोटरसाइकिल पर सवार दो संदिग्ध व्यक्तियों को रुकने का इशारा किया गया। मोटरसाइकिल चालक ने रुकने के बजाय तेजी से भागने की कोशिश की और सबदलपुर चट्टी की ओर मुड़ गया। पुलिस ने तुरंत पीछा शुरू किया और घेराबंदी की कोशिश की।
खुद को घिरता देख, मोटरसाइकिल सवारों में से एक, जिसकी बाद में पहचान दीपक पासवान के रूप में हुई, ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोली चलाई, जिसमें दीपक पासवान के दाहिने पैर में गोली लगी। वह लहूलुहान होकर मोटरसाइकिल सहित जमीन पर गिर गया। पुलिस ने तत्काल उसे काबू में किया और जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, उसकी हालत खतरे से बाहर है।
इस मुठभेड़ में दीपक का साथी सतीश सैनी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया। पुलिस ने उसके खिलाफ तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। मुठभेड़ स्थल से पुलिस ने एक तमंचा, कुछ कारतूस, और चोरी की मोटरसाइकिल बरामद की, जिसका उपयोग बदमाशों ने भागने के लिए किया था।
- दीपक पासवान का आपराधिक इतिहास
दीपक पासवान बलिया और आसपास के क्षेत्रों में एक कुख्यात अपराधी के रूप में जाना जाता है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें लूट, चोरी, और हत्या का प्रयास जैसे गंभीर अपराध शामिल हैं। हाल ही में, उसने पकड़ी में एक शराब दुकान और गड़वार में मोटरसाइकिल चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया था। इन वारदातों के बाद बलिया के पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने उस पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।
पूछताछ में दीपक ने कबूल किया कि वह और उसका साथी सतीश सैनी एक बड़ी वारदात की योजना बना रहे थे। पुलिस के अनुसार, दोनों बदमाश बिहार की ओर भागने की फिराक में थे। दीपक के पास से बरामद मोटरसाइकिल के बारे में पता चला कि यह बलिया रेलवे स्टेशन से चोरी की गई थी।
- पुलिस की रणनीति और "ऑपरेशन लंगड़ा"
यह मुठभेड़ बलिया पुलिस के "ऑपरेशन लंगड़ा" का हिस्सा मानी जा रही है, जिसके तहत पुलिस जिले में सक्रिय अपराधियों को पकड़ने या निष्क्रिय करने के लिए आक्रामक रणनीति अपना रही है। इस ऑपरेशन के तहत हाल के महीनों में कई इनामी बदमाशों को या तो गिरफ्तार किया गया है या मुठभेड़ में घायल किया गया है।
उदाहरण के लिए, 5 जून 2025 को बलिया शहर कोतवाली पुलिस ने दवा व्यापारी अरुण गुप्ता पर हमले के आरोपी 25 हजार के इनामी बदमाश रोहित वर्मा उर्फ सरल को मुठभेड़ में गिरफ्तार किया था। उस मुठभेड़ में भी रोहित के पैर में गोली लगी थी। इसी तरह, 28 मई 2025 को माल्देपुर तिराहे के पास हुई मुठभेड़ में एक अन्य बदमाश मुकेश सिंह उर्फ रुद्रा घायल हुआ था, जबकि रोहित वर्मा फरार हो गया था।
पुलिस अधीक्षक ओमवीर सिंह ने कहा, "हमारी प्राथमिकता जिले में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अपराधियों के खिलाफ हमारी कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी।" उन्होंने यह भी बताया कि फरार सतीश सैनी की तलाश के लिए विशेष टीमें गठित की गई हैं।
इस मुठभेड़ ने एक बार फिर पुलिस मुठभेड़ों की प्रासंगिकता और वैधता पर सवाल उठाए हैं। कुछ स्थानीय लोगों ने पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना की, उनका मानना है कि इससे अपराधियों में डर पैदा होगा। एक स्थानीय दुकानदार ने कहा, "पुलिस का यह कदम सही है। इन बदमाशों की वजह से लोग रात में घर से निकलने में डरते हैं।"
हालांकि, कुछ मानवाधिकार संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मुठभेड़ों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि पुलिस को अपराधियों को गिरफ्तार करने के लिए गैर-हिंसक तरीकों का उपयोग करना चाहिए। एक कार्यकर्ता ने टिप्पणी की, "हर बार मुठभेड़ में बदमाश के पैर में गोली लगना संदेह पैदा करता है। यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कानून का पालन हो।"
कानूनी दृष्टिकोण से, पुलिस ने दावा किया है कि यह मुठभेड़ आत्मरक्षा में हुई थी, क्योंकि बदमाश ने पहले फायरिंग की। पुलिस ने इस मामले में भारतीय दंड संहिता (बीएनएस) की धारा 109(1) के तहत मुकदमा दर्ज किया है, जो हत्या के प्रयास से संबंधित है। इसके अलावा, दीपक के खिलाफ चोरी और लूट के अन्य मामलों में भी कार्रवाई की जा रही है।
बलिया जिला, जो उत्तर प्रदेश और बिहार की सीमा पर स्थित है, लंबे समय से अपराध का गढ़ रहा है। इस क्षेत्र में लूट, चोरी, और हत्या जैसी घटनाएं आम हैं। पुलिस के अनुसार, कई अपराधी बिहार से आकर बलिया में वारदात को अंजाम देते हैं और फिर सीमा पार कर फरार हो जाते हैं। इस मुठभेड़ से पहले भी बलिया में कई हाई-प्रोफाइल आपराधिक घटनाएं हो चुकी हैं, जैसे दवा व्यापारी अरुण गुप्ता पर हमला और शिवजी गुप्ता की हत्या की साजिश।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की सक्रियता से अपराध में कमी आई है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। एक ग्रामीण ने कहा, "पुलिस की कार्रवाई से डर तो पैदा हुआ है, लेकिन जब तक इन बदमाशों के पीछे का नेटवर्क खत्म नहीं होगा, अपराध रुकेगा नहीं।"
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