Greater Noida Hospital News: ग्रेटर नोएडा के फलक लाइफ लाइन अस्पताल पर गंभीर आरोप, डॉक्टर का दावा- टेक्नीशियन से कराई जाती थी सिजेरियन डिलीवरी

Greater Noida News: ग्रेटर नोएडा के फलक लाइफ लाइन अस्पताल के डॉक्टर ने प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। दावा है कि अस्पताल में विशेषज्ञ की जगह टेक्नीशियन से सिजेरियन डिलीवरी कराई जाती थी।

Aug 10, 2026 - 13:03
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Greater Noida Hospital News: ग्रेटर नोएडा के फलक लाइफ लाइन अस्पताल पर गंभीर आरोप, डॉक्टर का दावा- टेक्नीशियन से कराई जाती थी सिजेरियन डिलीवरी
  • Falak Life Line Hospital Allegations: फलक लाइफ लाइन हॉस्पिटल के डॉक्टर के खुलासे से हड़कंप, बिना विशेषज्ञ टेक्नीशियन करते थे सी-सेक्शन सर्जरी!
  • ग्रेटर नोएडा के अस्पताल में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़? डॉक्टर का बड़ा आरोप- टेक्नीशियन करते थे सिजेरियन डिलीवरी
  • Greater Noida Hospital Case: फलक लाइफ लाइन अस्पताल पर लगा गंभीर आरोप, डॉक्टर का दावा- टेक्नीशियन से कराई जा रही थी डिलीवरी

ग्रेटर नोएडा स्थित फलक लाइफ लाइन अस्पताल के एक चिकित्सक द्वारा अस्पताल प्रबंधन पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। चिकित्सक का दावा है कि अस्पताल प्रशासन गर्भवती महिलाओं की जान जोखिम में डालकर योग्य डॉक्टरों की बजाय ओटी टेक्नीशियन से सिजेरियन (सी-सेक्शन) डिलीवरी करवाता था। यह मामला स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन के संज्ञान में आने के बाद जांच की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पीड़ित चिकित्सक ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की मांग की है, जिसके बाद जिले के स्वास्थ्य महकमे ने पूरे मामले की पड़ताल की तैयारी शुरू कर दी है।

ग्रेटर नोएडा के बिसरख/सूरजपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले फलक लाइफ लाइन अस्पताल की कार्यप्रणाली को लेकर एक डॉक्टर ने कई चौंकाने वाले दावे किए हैं। डॉक्टर का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन में बैठे लोग व्यावसायिक लाभ कमाने के उद्देश्य से मरीजों की सेहत और जीवन से खिलवाड़ कर रहे थे। आरोप के अनुसार, जब अस्पताल में किसी गर्भवती महिला की सिजेरियन डिलीवरी की आवश्यकता होती थी, तो वरिष्ठ या योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ को बुलाने के बजाय ऑपरेशन थिएटर के तकनीशियन ही सर्जरी की प्रक्रिया को अंजाम देते थे।

शिकायतकर्ता डॉक्टर के मुताबिक, वे जब इस अस्पताल से जुड़े तो उन्हें धीरे-धीरे वहां जारी अनियमितताओं का पता चला। उन्होंने देखा कि कई मामलों में कागजी दस्तावेजों पर तो डिग्री धारक डॉक्टरों के नाम दर्ज कर दिए जाते थे, लेकिन धरातल पर ऑपरेशन थिएटर के भीतर अप्रशिक्षित या गैर-योग्य टेक्नीशियन ही गंभीर शल्य चिकित्सा (ऑपरेशन) पूरा कर रहे थे। डॉक्टर ने जब इस प्रक्रिया का विरोध किया और प्रबंधन से नियमानुसार योग्य विशेषज्ञों की उपस्थिति अनिवार्य करने को कहा, तो उनके साथ मतभेद शुरू हो गए।

चिकित्सक का कहना है कि जब उन्होंने इस तरह के गलत तौर-तरीकों में भागीदार बनने से मना किया, तो उनके खिलाफ प्रबंधन का रवैया सख्त हो गया। इसके बाद डॉक्टर ने जनहित और मरीजों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस पूरे मामले का भंडाफोड़ करने का निर्णय लिया और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों व मीडिया के सामने अपने तथ्य रखे। इस मामले में आरोप लगाने वाले डॉक्टर ने मांग की है कि अस्पताल के ओटी रजिस्टर, सीसीटीवी फुटेज और मरीजों की केस फाइलों की निष्पक्ष जांच की जाए ताकि सच सामने आ सके। दूसरी ओर, अस्पताल प्रबंधन की तरफ से इन आरोपों पर प्रारंभिक प्रतिक्रिया में इन्हें मनगढ़ंत, बेबुनियाद और आपसी विवाद का नतीजा बताया गया है।

मामला सामने आने के बाद गौतमबुद्ध नगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने संज्ञान लिया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि लिखित शिकायत और साक्ष्य प्रस्तुत किए जाते हैं, तो एक जांच समिति गठित कर अस्पताल की एनओसी, डॉक्टरों की उपस्थिति और ओटी रिकॉर्ड्स की गहनता से जांच की जाएगी। दोषी पाए जाने पर अस्पताल का पंजीकरण रद्द करने और वैधानिक कानूनी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया गया है।

ग्रेटर नोएडा और आसपास के ग्रामीण व शहरी इलाकों से रोजाना सैकड़ों मरीज निजी अस्पतालों का रुख करते हैं। इस प्रकार के गंभीर आरोप सामने आने से आम जनता के मन में निजी चिकित्सा केंद्रों के प्रति अविश्वास और भय का माहौल पैदा होता है। विशेषकर प्रसूति और नवजात देखभाल जैसे संवेदनशील मामलों में इस तरह की लापरवाही जच्चा और बच्चा दोनों की जान के लिए अत्यंत घातक साबित हो सकती है। इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों के नियमित निरीक्षण और मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) के कड़ाई से पालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट के आधार पर इस मामले की आगामी दिशा तय होगी। यदि स्वास्थ्य विभाग की शुरुआती पड़ताल में डॉक्टर द्वारा लगाए गए आरोपों में सत्यता पाई जाती है, तो अस्पताल प्रबंधन पर क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत कड़ी कार्रवाई हो सकती है। पुलिस भी एफआईआर दर्ज कर मामले की आपराधिक पहलुओं से जांच कर सकती है। इस मामले के बाद क्षेत्र के अन्य निजी अस्पतालों में भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा औचक निरीक्षण अभियान चलाए जाने की संभावना जताई जा रही है।

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