Indian Army Tanks: और ताकतवर होंगे 'अजेय' और 'भीष्म', इंजन बंद रहने पर भी T-72 और T-90 टैंक दाग सकेंगे गोला

भारतीय सेना के T-72 'अजेय' और T-90 'भीष्म' टैंकों को अपग्रेड करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने ऑक्जिलरी पावर यूनिट (APU) की बड़ी डील साइन की है। इंजन बंद होने पर भी सिस्टम काम करेंगे।

Sep 22, 2026 - 11:11
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Indian Army Tanks: और ताकतवर होंगे 'अजेय' और 'भीष्म', इंजन बंद रहने पर भी T-72 और T-90 टैंक दाग सकेंगे गोला

नई दिल्ली। सीमावर्ती मोर्चों पर भारतीय थलसेना की बख्तरबंद ताकत को और अधिक घातक, ऊर्जा-कुशल और तकनीकी रूप से उन्नत बनाने की दिशा में रक्षा मंत्रालय ने एक बड़ा कदम उठाया है। भारतीय सेना के मुख्य युद्धक टैंकों (Main Battle Tanks) T-72 'अजेय' और T-90 'भीष्म' को अत्याधुनिक 'ऑक्जिलरी पावर यूनिट' (APU) से लैस करने के लिए रक्षा मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण खरीद समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर किए हैं। इस रणनीतिक समझौते के क्रियान्वयन के बाद भारतीय सेना के ये दोनों प्रमुख टैंक मुख्य इंजन बंद होने की स्थिति में भी अपने आधुनिक हथियारों, संचार प्रणालियों, रडार, नाइट विजन और फायर कंट्रोल सिस्टम को पूरी तरह सक्रिय रखकर सटीक गोला दागने में सक्षम होंगे।

लद्दाख के अत्यधिक ऊंचाई वाले बर्फीले इलाकों से लेकर राजस्थान के तपते रेगिस्तान तक अग्रिम मोर्चे पर तैनात बख्तरबंद रेजिमेंट्स के लिए यह अपग्रेड बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब तक टैंक के सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और तोप नियंत्रण प्रणालियों को चालू रखने के लिए मुख्य डीजल इंजन को लगातार चालू (स्टार्ट) रखना पड़ता था। नई प्रणाली से न केवल टैंकों की परिचालन दक्षता कई गुना बढ़ जाएगी, बल्कि युद्धक्षेत्र में उनकी सुरक्षा और घात लगाकर हमला करने की क्षमता भी अभूतपूर्व स्तर पर पहुंच जाएगी।

'साइलेंट वॉच' मोड: छिपकर वार करने की घातक तकनीक

टैंक विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी बख्तरबंद युद्ध में टैंक की उत्तरजीविता (सरवाइवेबिलिटी) इस बात पर निर्भर करती है कि वह दुश्मन की नजरों, थर्मल सेंसर और रडार से कितना सुरक्षित रहता है। जब टैंक का मुख्य भारी-भरकम इंजन चालू रहता है, तो वह भारी आवाज करने के साथ-साथ बहुत अधिक मात्रा में गर्मी (थर्मल सिग्नेचर) उत्सर्जित करता है। आधुनिक युद्धक्षेत्र में दुश्मन के ड्रोन और गाइडेड मिसाइलें इस थर्मल सिग्नेचर को दूर से ही पहचानकर सटीक निशाना बना लेते हैं।

ऑक्जिलरी पावर यूनिट (APU) अनिवार्य रूप से एक द्वितीयक और अत्यंत शांत छोटा जेनरेटर सिस्टम होता है। इसकी मदद से टैंक 'साइलेंट वॉच' (शांत निगरानी) मोड में चला जाता है। मुख्य इंजन बंद होने के बावजूद टैंक के भीतर कमांडर का थर्मल साइट, गनर का डिस्प्ले, लेजर रेंज फाइंडर, रेडियो संचार उपकरण और तोप का स्वचालित स्टेबलाइजर पूरी तरह काम करते रहते हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि टैंक किसी टीले या बंकर की आड़ में बिल्कुल शांत खड़ा रहकर दुश्मन की हलचल पर नजर रख सकेगा और जरूरत पड़ने पर बिना मुख्य इंजन चलाए तुरंत सटीक गोला दाग सकेगा।

मुख्य इंजन के जीवनकाल में वृद्धि और ईंधन की भारी बचत

इस तकनीकी सुधार का दूसरा सबसे बड़ा लाभ टैंकों के रखरखाव और परिचालन लागत में कमी के रूप में सामने आएगा। T-72 और T-90 टैंकों के मुख्य इंजन उच्च हॉर्सपावर वाले होते हैं, जिनका निर्माण त्वरित गति और भारी कवच को खींचने के लिए किया गया है। केवल बिजली आपूर्ति के लिए मुख्य इंजन को कई घंटों तक 'आइडल' (खाली) चलाए रखने से उनका इंजन तेजी से घिसता है और उनके ओवरहालिंग की अवधि जल्दी नजदीक आ जाती है।

सैन्य अधिकारियों के मुताबिक, लंबे समय तक गश्त या मोर्चे पर तैनाती के दौरान केवल इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को चलाने के लिए मुख्य इंजन का उपयोग करने से हजारों लीटर ईंधन व्यर्थ जलता था। ऑक्जिलरी पावर यूनिट के लगने से ईंधन की भारी बचत होगी और टैंक के मुख्य इंजन के कार्यकारी जीवनकाल (इंजन लाइफ) में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे सेना के लॉजिस्टिक्स प्रबंधन पर भी दबाव काफी कम होगा।

'मेक इन इंडिया' और स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को बल

रक्षा मंत्रालय द्वारा संपन्न किया गया यह समझौता केंद्र सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' और 'मेक इन इंडिया' विजन के अनुरूप है। यह खरीद अनुबंध 'बाय (इंडियन-आईडीडीएम)' यानी स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित श्रेणी के तहत निष्पादित किया गया है। इसके तहत घरेलू रक्षा कंपनियों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के सहयोग से देश में ही इन ऑक्जिलरी पावर यूनिट्स का निर्माण और एकीकरण किया जाएगा।

यह परियोजना भारतीय सेना की आधुनिकीकरण योजना का हिस्सा है, जिसके तहत रूस से आयातित पुराने प्लेटफॉर्म्स को स्वदेशी तकनीक के जरिए 21वीं सदी के नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध के अनुकूल बनाया जा रहा है। रक्षा जानकारों का कहना है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और नियंत्रण रेखा (LoC) दोनों मोर्चों पर दो-मोर्चे की चुनौतियों के बीच यह समझौता भारतीय सेना के आर्मर्ड कोर की युद्ध-तैयारी को नई ऊंचाई प्रदान करेगा।

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