IAS Deepti Gaur Mukerjee: जानिए कौन हैं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दीप्ति गौड़ मुखर्जी, जिन्हें सौंपी गई उच्च शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी
IAS Deepti Gaur Mukerjee: 1993 बैच की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दीप्ति गौड़ मुखर्जी को देश का नया उच्च शिक्षा सचिव नियुक्त किया गया है। जानिए उनका प्रशासनिक सफर और प्रोफाइल।

- IAS Deepti Gaur Mukerjee: कौन हैं दीप्ति गौड़ मुखर्जी? जिन्हें बनाया गया नया उच्च शिक्षा सचिव, जानें पूरी जानकारी
- दीप्ति गौड़ मुखर्जी बनीं नई उच्च शिक्षा सचिव: जानें मध्य प्रदेश कैडर की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी का पूरा प्रोफाइल
- Deepti Gaur Mukerjee Appointed Higher Education Secretary: वरिष्ठ IAS दीप्ति गौड़ मुखर्जी बनीं देश की नई उच्च शिक्षा सचिव
केन्द्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) तथा कैबिनेट की नियुक्ति समिति द्वारा वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दीप्ति गौड़ मुखर्जी को भारत सरकार के उच्च शिक्षा विभाग (Ministry of Education) का नया सचिव नियुक्त किया गया है। 1993 बैच की मध्य प्रदेश कैडर की इस वरिष्ठ अधिकारी को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी शीर्ष प्रशासनिक फेरबदल के तहत नई दिल्ली स्थित शिक्षा मंत्रालय में सौंपी गई है। उच्च शिक्षा क्षेत्र में नीतिगत सुधारों, नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के प्रभावी क्रियान्वयन और विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए यह प्रशासनिक फेरबदल किया गया है। इस नियुक्ति के बाद अब देश भर के केंद्रीय विश्वविद्यालयों, उच्च शिक्षण संस्थानों और तकनीकी शिक्षा नीति के संचालन का दायित्व उनके कंधों पर आ गया है।
केन्द्र सरकार ने एक प्रशासनिक आदेश जारी करते हुए वरिष्ठ आईएएस अधिकारी दीप्ति गौड़ मुखर्जी को उच्च शिक्षा विभाग, शिक्षा मंत्रालय का सचिव नियुक्त किया है। वे मध्य प्रदेश कैडर की 1993 बैच की प्रशासनिक सेवा अधिकारी हैं और इससे पहले केंद्र तथा राज्य सरकार के विभिन्न महत्वपूर्ण मंत्रालयों और विभागों में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। केंद्रीय प्रतिनिधिमंडल (Central Deputation) के तहत उन्हें यह शीर्ष पदभार सौंपा गया है। उच्च शिक्षा सचिव के रूप में उनकी यह नियुक्ति भारतीय उच्च शिक्षा तंत्र में चल रहे विविध सुधार कार्यक्रमों को नई दिशा देने की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) द्वारा अनुमोदित आदेशों के तहत केंद्र सरकार के शीर्ष प्रशासनिक स्तर पर नौकरशाही में फेरबदल की प्रक्रिया पूरी की गई। इसी प्रशासनिक कवायद के तहत दीप्ति गौड़ मुखर्जी के नाम को उच्च शिक्षा विभाग के नए सचिव के रूप में मंजूरी दी गई। अपने तीन दशक से अधिक लंबे प्रशासनिक करियर में दीप्ति गौड़ मुखर्जी ने राज्य और केंद्र स्तर पर कई कठिन और नीतिगत भूमिकाएं निभाई हैं। मध्य प्रदेश में पदस्थापन के दौरान उन्होंने स्वास्थ्य, वित्त, कार्मिक तथा महिला एवं बाल विकास जैसे प्रमुख विभागों की कमान संभाली है।
केंद्रीय स्तर पर भी वे विभिन्न मंत्रालयों में सचिव व संयुक्त सचिव स्तर की जिम्मेदारियां संभाल चुकी हैं, जिससे उनके पास केंद्रीय प्रशासनिक प्रक्रियाओं और अंतर-मंत्रालयी समन्वय का गहरा अनुभव है। शिक्षा मंत्रालय में उच्च शिक्षा सचिव का पद देश के सभी प्रमुख शैक्षणिक निकायों जैसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE), भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IITs), भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIMs) और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कामकाज की देखरेख और नीति निर्धारण से सीधा जुड़ा होता है।
इस उच्च स्तरीय नियुक्ति पर प्रशासनिक हलकों और शैक्षणिक गलियारों से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। नौकरशाही के विशेषज्ञों का मानना है कि दीप्ति गौड़ मुखर्जी का व्यापक प्रशासनिक अनुभव उच्च शिक्षा क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों से निपटने में काफी मददगार साबित होगा। केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह प्रशासनिक कदम विभागीय दक्षता को बढ़ाने और शिक्षा क्षेत्र में चल रही प्रमुख परियोजनाओं में तेजी लाने के उद्देश्य से उठाया गया है। वहीं, विभिन्न केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपतियों और शैक्षणिक प्रशासकों ने इस नियुक्ति का स्वागत करते हुए उम्मीद जताई है कि उनके नेतृत्व में उच्च शिक्षा में अनुसंधान, डिजिटल लर्निंग और वैश्विक रैंकिंग सुधारने की दिशा में तेज प्रगति होगी।
दीप्ति गौड़ मुखर्जी का उच्च शिक्षा सचिव के रूप में पदभार संभालना देश के पूरे उच्च शिक्षा परिदृश्य को प्रभावित करेगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत उच्च शिक्षा में बहु-विषयक अध्ययन, क्रेडिट ट्रांसफर सिस्टम, स्वायत्तता और अंतरराष्ट्रीयकरण से जुड़े जो नए मानक तय किए गए हैं, उनके क्रियान्वयन में तेजी आने की संभावना है। इसके अलावा, देश के प्रमुख तकनीकी और केंद्रीय संस्थानों में संकाय सदस्यों की भर्ती, बुनियादी ढांचे के विकास और वित्तीय आवंटन जैसे मुद्दों का समयबद्ध निस्तारण आसान होगा। उनकी नियुक्ति से राज्य स्तर के अनुभवों और केंद्रीय नीतियों के बीच बेहतर तालमेल बैठने की उम्मीद जताई जा रही है।
नवनियुक्त उच्च शिक्षा सचिव दीप्ति गौड़ मुखर्जी के सामने कई प्राथमिकताएं और चुनौतियां होंगी। सबसे मुख्य कार्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों को राज्यों और विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर जमीनी स्तर पर पूरी तरह लागू करना होगा। इसके साथ ही, भारत को वैश्विक शिक्षा हब के रूप में विकसित करने के लिए विदेशी विश्वविद्यालयों के भारतीय परिसरों की स्थापना, डिजिटल यूनिवर्सिटी मॉडल को गति देने और शोध एवं विकास (R&D) के बजट को सुदृढ़ बनाने पर उनका विशेष ध्यान रहेगा। आने वाले समय में वे यूजीसी और एआईसीटीई के पुनर्गठन और उच्च शिक्षा आयोग (HECI) जैसे नियामक निकायों के गठन की प्रक्रिया की समीक्षा करेंगी।
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