Trending News: पवन खेड़ा की तीखी प्रतिक्रिया- पीएम मोदी के बयानों पर क्यों भड़की कांग्रेस?
खेड़ा का दर्द: कांग्रेस प्रवक्ता ने पीएम के बयानों को "प्रेम चोपड़ा और परेश रावल" की तरह डायलॉगबाज़ी करार दिया, सवाल उठाए कि गंभीर मुद्दों पर जवाब क्यों नहीं?....
हाइलाइट्स:
- पवन खेड़ा का हमला: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने पीएम नरेंद्र मोदी के हालिया बयानों पर तंज कसते हुए उन्हें "फिल्मी डायलॉगबाज़ी" करने वाला बताया।
- मोदी का पाकिस्तान पर निशाना: पीएम मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर और PoK को लेकर सख्त बयान दिए, कहा- "न ट्रेड, न टॉक, अब सिर्फ PoK पर बात होगी।"
- राजनीतिक तनातनी: बीजेपी ने खेड़ा के बयान को "पाकिस्तान परस्त" बताकर पलटवार किया, कांग्रेस को "रावलपिंडी गठबंधन" करार दिया।
- ऑपरेशन सिंदूर: पहलगाम हमले के बाद भारत की जवाबी कार्रवाई ने पाकिस्तान को बैकफुट पर ला दिया, लेकिन विपक्ष ने उठाए सवाल।
भारत और पाकिस्तान के बीच हाल के तनाव और ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सख्त बयानों ने न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचाई है, बल्कि भारत के भीतर भी सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता पवन खेड़ा ने पीएम मोदी के बयानों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उन्हें "फिल्मी डायलॉगबाज़ी" करने वाला करार दिया। खेड़ा ने 27 मई 2025 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "पीएम मोदी कभी प्रेम चोपड़ा की तरह तो कभी परेश रावल की तरह डायलॉग मार रहे हैं। कभी कहते हैं कि 'सिंदूर मेरी रगों में बहता है,' तो कभी 'गोलियां खाओ, रोटियां खाओ।' लेकिन गंभीर सवालों के जवाब अब तक नहीं मिले हैं।" खेड़ा का यह बयान पीएम मोदी के हालिया गुजरात दौरे के दौरान दिए गए बयानों के जवाब में आया, जहां उन्होंने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और आतंकवाद के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, "हम चाहते हैं कि हमारे पड़ोसी भी चैन से जिएं, लेकिन अगर कोई हमें ललकारेगा, तो यह भूमि वीरों की है। एक कांटा चुभता है तो पूरे शरीर में दर्द होता है, और हमने तय कर लिया है कि यह कांटा निकाल कर रहेंगे।" मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि अब पाकिस्तान के साथ "न ट्रेड, न टॉक, सिर्फ PoK पर बात होगी।" उनके इस बयान ने पाकिस्तान में घबराहट पैदा कर दी, जिसके जवाब में पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने इसे "नफरत फैलाने वाला" और क्षेत्रीय शांति के लिए खतरा बताया।
- पवन खेड़ा को क्यों हुआ "दर्द"?
पवन खेड़ा की तीखी टिप्पणी के पीछे कई कारण नजर आते हैं। पहला, कांग्रेस का मानना है कि पीएम मोदी के बयान केवल जनता का ध्यान भटकाने के लिए हैं। खेड़ा ने कहा कि सरकार को NEET मेडिकल प्रवेश परीक्षा जैसे घरेलू मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए, न कि "फिल्मी डायलॉग" के जरिए जनता को गुमराह करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि ऑपरेशन सिंदूर और भारत-पाकिस्तान तनाव के बाद कई अहम सवाल अनुत्तरित हैं, जैसे कि सीजफायर की घोषणा सबसे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्यों की, और क्या भारत ने कश्मीर पर तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार कर ली है? खेड़ा ने बीएसएफ जवान पूर्णम साहू की रिहाई जैसे मुद्दों पर भी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए।
उन्होंने अपने एक्स पोस्ट में लिखा, "When will our BSF jawaan Purnam Sahu be released from Pakistani captivity @realDonaldTrump?" कांग्रेस का आरोप है कि सरकार इन संवेदनशील मुद्दों पर जवाब देने के बजाय "डायलॉगबाज़ी" में व्यस्त है। खेड़ा के बयानों पर बीजेपी ने तीखा पलटवार किया। बीजेपी सांसद तेजस्वी सूर्या ने कांग्रेस को "पाकिस्तान की सबसे बड़ी PR एजेंसी" करार दिया और कहा कि कांग्रेस का व्यवहार "रावलपिंडी गठबंधन" जैसा है। बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी कांग्रेस को "पाकिस्तान के यार" बताते हुए कहा कि उनकी सोच आतंकवादियों जैसी है।
बीजेपी ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पहलगाम हमले के बाद "PM गायब" जैसे पोस्टर लगाकर देश की एकता को कमजोर करने की कोशिश की, जिसे बाद में हटाना पड़ा। यह पूरा विवाद 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले से शुरू हुआ, जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई थी। इसके जवाब में भारत ने "ऑपरेशन सिंदूर" शुरू किया, जिसमें पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों पर मिसाइल हमले किए गए। भारत ने पाकिस्तान के कई एयरबेस को नष्ट कर दिया और सिंधु जल समझौते को निलंबित कर दिया। इन कार्रवाइयों ने पाकिस्तान को बैकफुट पर ला दिया, लेकिन विपक्ष ने सरकार की रणनीति पर सवाल उठाए।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, "यह समय एकता का है, लेकिन बीजेपी तय नहीं कर पा रही कि उसका निशाना कांग्रेस है, आतंकवादी हैं, या पाकिस्तान।" राहुल गांधी ने भी पहलगाम हमले के पीड़ितों से मुलाकात की और सरकार को हरसंभव समर्थन देने की बात कही, लेकिन साथ ही तनाव के लिए जिम्मेदार नीतियों पर सवाल उठाए। पाकिस्तान ने भारत के हमलों को "आक्रामक" बताते हुए परमाणु हमले की धमकी दी, लेकिन भारत ने इन धमकियों को नजरअंदाज करते हुए अपनी कार्रवाई जारी रखी।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने पीएम मोदी के बयानों को "उग्र" और "असंगत" बताया, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह उनकी बौखलाहट को दर्शाता है। पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री इशाक डार ने कहा, "हमारी सेना किसी भी चुनौती के लिए तैयार है," लेकिन भारत के कूटनीतिक और सैन्य दबाव ने उन्हें शांति की बात करने पर मजबूर कर दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पीएम मोदी के बयान और ऑपरेशन सिंदूर रणनीतिक रूप से भारत की "जीरो टॉलरेंस" नीति को दर्शाते हैं। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों जैसे अदिति फडणीस का कहना है कि इन बयानों में कुछ नया नहीं है और यह पुरानी नीतियों का ही हिस्सा है। दूसरी ओर, विपक्ष का मानना है कि सरकार इन बयानों के जरिए घरेलू राजनीति में फायदा उठाने की कोशिश कर रही है।
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