Jharkhand BJP Protest: छात्रों पर लाठीचार्ज के खिलाफ सड़क पर उतरी बीजेपी, पूरे झारखंड में बंद का असर
Jharkhand BJP Protest: रांची में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षार्थियों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज के खिलाफ बीजेपी ने पूरे झारखंड में राज्यव्यापी बंद और प्रदर्शन का आह्वान किया है।

- Jharkhand Bandh Today: रांची में परीक्षार्थियों पर पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में बीजेपी का प्रदर्शन, जानें पूरा मामला
- रांची में छात्रों पर लाठीचार्ज के खिलाफ बीजेपी का राज्यव्यापी प्रदर्शन, सड़क से लेकर विधानसभा तक गरमाई राजनीति
- Jharkhand News: छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में बीजेपी का प्रदर्शन, झारखंड बंद का दिखा व्यापक असर
झारखंड की राजधानी रांची में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की परीक्षाओं में कथित धांधली के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में भारतीय जनता पार्टी ने 11 अगस्त 2026 को पूरे राज्य में व्यापक प्रदर्शन और 'झारखंड बंद' का आह्वान किया है। मानसून सत्र के दौरान विधानसभा घेराव करने जा रहे अभ्यर्थियों पर आंसू गैस के गोले छोड़े जाने, वाटर कैनन के इस्तेमाल और लाठीचार्ज में कई छात्रों के घायल होने के बाद राजनीति गरमा गई है। बीजेपी कार्यकर्ताओं ने राज्य के विभिन्न जिलों में सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की है। इस राजनीतिक टकराव से न केवल प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हुई है, बल्कि राज्य में युवाओं के रोजगार और परीक्षा में पारदर्शिता को लेकर बहस छिड़ गई है।
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता, पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में गड़बड़ी को लेकर बीते कई दिनों से छात्र आंदोलनरत थे। 10 अगस्त को जेपीएससी-जेएसएससी सुधार मोर्चा और छात्र संगठनों के बैनर तले हजारों अभ्यर्थियों ने रांची में 'विधानसभा घेराव' मार्च निकाला। जैसे ही प्रदर्शनकारी सुरक्षा बैरिकेड्स तोड़कर विधानसभा की ओर बढ़ने लगे, पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पानी की बौछारें कीं, आंसू गैस के गोले दागे और लाठीचार्ज कर दिया। इस पुलिस कार्रवाई में कई छात्र-छात्राएं और पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस की इस कार्रवाई को बर्बर बताते हुए भारतीय जनता पार्टी ने 11 अगस्त को पूरे राज्य में बंद का ऐलान कर दिया और प्रदेशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
यह पूरा विवाद जेपीएससी और जेएसएससी द्वारा आयोजित संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) जैसी प्रमुख भर्ती परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के आरोपों से जुड़ा हुआ है। अभ्यर्थी पिछले कई दिनों से आमरण अनशन और शांतिपूर्ण धरने पर बैठे थे। 10 अगस्त को राज्य विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान छात्रों का एक विशाल हुजूम विधानसभा की ओर बढ़ा। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो, जो कई दिनों से भूख हड़ताल पर थे, एंबुलेंस में वहां पहुंचे और मार्च में शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों ने तीन स्तरीय बैरिकेड्स को तोड़कर आगे बढ़ने का प्रयास किया, जिसके बाद स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए पहले वाटर कैनन का उपयोग किया और फिर लाठियां भांजीं। देर शाम तक चले इस घटनाक्रम में कई आंदोलनकारी गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। रात में ही झारखंड बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आपात स्थिति में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हेमंत सोरेन सरकार पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया और 11 अगस्त को 'झारखंड बंद' की घोषणा कर दी।
लाठीचार्ज और प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी चरम पर पहुंच गई है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि अपने हक और नौकरी की मांग कर रहे निहत्थे युवाओं पर लाठियां बरसाना और आंसू गैस के गोले छोड़ना हेमंत सरकार की हताशा को दर्शाता है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि यह लाठीचार्ज सोरेन सरकार के ताबूत में आखिरी कील साबित होगा।
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पुलिस प्रशासन द्वारा स्थिति को जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ संभालने की बात कही है। रांची के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का दावा है कि प्रदर्शनकारियों की ओर से पत्थरबाजी की गई थी, जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए, जिसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए न्यूनतम बल प्रयोग करना पड़ा। इस बीच कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने भी छात्रों पर बल प्रयोग को गलत ठहराते हुए सरकार को बातचीत से समाधान निकालने की सलाह दी है।
इस लाठीचार्ज और बीजेपी के बंद के आह्वान का व्यापक सामाजिक और राजनीतिक असर देखने को मिल रहा है। राजधानी रांची समेत धनबाद, जमशेदपुर, बोकारो और हजारीबाग जैसे प्रमुख शहरों में व्यावसायिक प्रतिष्ठान, सार्वजनिक परिवहन और शैक्षणिक संस्थान आंशिक रूप से प्रभावित हुए हैं। राज्यभर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। इस घटना ने राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के असंतोष को राष्ट्रीय स्तर पर ला दिया है, जिससे सरकार पर परीक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शी जांच का दबाव बढ़ गया है।
आगामी दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक तल्खी और बढ़ने के आसार हैं। छात्र संगठन और विपक्षी दल जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा को रद्द करने तथा पूरी प्रक्रिया की सीबीआई जांच की मांग पर अड़े हुए हैं। पुलिस प्रशासन का कहना है कि सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग के जरिए उपद्रव फैलाने वालों की पहचान की जाएगी। वहीं, बीजेपी ने साफ किया है कि जब तक युवाओं को न्याय नहीं मिलता और लाठीचार्ज के दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगा।
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