पठानकोट में ISI की खतरनाक साजिश- 15 वर्षीय नाबालिग ने ISI से एक साल तक संवेदनशील जानकारी साझा की।

पठानकोट पुलिस ने एक गंभीर जासूसी मामले को उजागर किया है जिसमें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने एक नाबालिग बच्चे

Jan 6, 2026 - 12:40
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पठानकोट में ISI की खतरनाक साजिश- 15 वर्षीय नाबालिग ने ISI से एक साल तक संवेदनशील जानकारी साझा की।
पठानकोट में ISI की खतरनाक साजिश- 15 वर्षीय नाबालिग ने ISI से एक साल तक संवेदनशील जानकारी साझा की।

पठानकोट पुलिस ने एक गंभीर जासूसी मामले को उजागर किया है जिसमें पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने एक नाबालिग बच्चे को अपना माध्यम बनाया। पुलिस ने 15 वर्षीय एक किशोर को हिरासत में लिया है जो जम्मू के सांबा जिले का निवासी है। जांच में पता चला है कि यह नाबालिग पिछले करीब एक साल से आईएसआई के संपर्क में था और मोबाइल फोन के माध्यम से भारत की संवेदनशील जानकारियां पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स को भेज रहा था।

पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई में बच्चे के मोबाइल से महत्वपूर्ण सबूत बरामद हुए हैं। इनमें चैट रिकॉर्डिंग, कॉल डिटेल्स और अन्य संदिग्ध डेटा शामिल हैं जो यह साबित करते हैं कि वह लगातार पाकिस्तानी एजेंटों के साथ संवाद में था। प्रारंभिक पूछताछ से यह भी सामने आया है कि नाबालिग ने संवेदनशील रक्षा स्थलों की तस्वीरें और अन्य गोपनीय जानकारियां साझा की थीं। पुलिस के अनुसार बच्चा एक ऑनलाइन चैट रूम के माध्यम से संपर्क में आया था जहां आईएसआई के हैंडलर्स युवाओं को आकर्षित करते थे। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच को व्यापक बनाया गया है। पठानकोट के एसएसपी दलजिंदर सिंह ढिल्लों ने बताया कि जांच अभी जारी है और सभी पहलुओं की गहन पड़ताल की जा रही है। उन्होंने कहा कि बच्चे की उम्र मात्र 15 वर्ष है और वह आईएसआई के संपर्क में था। पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क में अन्य नाबालिग भी शामिल हो सकते हैं। जांच के आधार पर पंजाब के विभिन्न जिलों में सतर्कता बरती जा रही है और वहां की पुलिस को अलर्ट जारी किया गया है ताकि ऐसे प्रयासों को समय रहते रोका जा सके।

सुरक्षा एजेंसियों का मुख्य फोकस इस बात पर है कि देश की सुरक्षा से जुड़ी कोई भी जानकारी गलत हाथों में न पहुंचे। साथ ही ऐसे नाबालिगों को इस खतरनाक नेटवर्क से बाहर निकालना और उनके परिवारों को जागरूक करना भी प्राथमिकता है। पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों के मोबाइल उपयोग पर नजर रखें क्योंकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए युवाओं को लक्षित किया जा रहा है। प्रारंभिक जांच से संकेत मिले हैं कि पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर के कुछ अन्य इलाकों में भी इसी तरह के संपर्क हो सकते हैं। यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद चिंताजनक है क्योंकि इसमें नाबालिगों का इस्तेमाल कर संवेदनशील जानकारी प्राप्त करने की कोशिश की गई है। पुलिस ने बच्चे को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है और आगे की जांच में इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि कितनी जानकारी लीक हुई और उसका कितना नुकसान हुआ। बच्चे के मोबाइल में क्लोनिंग की आशंका भी जताई गई है जिससे प्राप्त जानकारी सीधे पाकिस्तान पहुंच रही थी।

इस घटना ने सीमा क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी है। पठानकोट जैसे संवेदनशील इलाके में पहले से ही सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है लेकिन अब ऑनलाइन माध्यमों से होने वाले प्रयासों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जांच एजेंसियां इस मामले को गंभीरता से ले रही हैं और जल्द ही अन्य संभावित नाबालिगों की पहचान कर उन्हें सुरक्षित करने की योजना बना रही हैं। पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में युवाओं को प्रलोभन देकर या भावनात्मक रूप से जोड़कर शामिल किया जाता है। इसीलिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी साजिशों को रोका जा सके। जांच पूरी होने के बाद इस मामले में कानूनी कार्रवाई की जाएगी और नाबालिग होने के कारण उसे किशोर न्याय प्रणाली के तहत ही आगे की प्रक्रिया में रखा जाएगा।

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