Ram Mandir Donation Theft Case: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में बड़ा खुलासा, आरोपी ने माना- गबन की रकम से उड़ाए 19 लाख रुपए
Ram Mandir Theft Case: अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले के आरोपी अविनाश शुक्ला ने पुलिस पूछताछ में गबन की राशि से 19 लाख रुपए खर्च करने की बात स्वीकार की है।

- Ayodhya Ram Mandir Theft Update: पूछताछ में आरोपी अविनाश शुक्ला का कबूलनामा, दान राशि के 19 लाख रुपए किए खर्च, पीटीआई का दावा
- राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में पुलिस के हाथ लगा बड़ा सुराग, आरोपी ने कबूली 19 लाख रुपए खर्च करने की बात
- AYODHYA EXCLUSIVE: राम मंदिर दान गबन मामले में बड़ा खुलासा, आरोपी अविनाश शुक्ला ने स्वीकारी 19 लाख रुपए खर्च करने की बात
अयोध्या के प्रसिद्ध राम मंदिर में हुए चढ़ावा चोरी और वित्तीय हेरफेर के मामले में जांच एजेंसियों के हाथ एक बड़ी सफलता लगी है। पुलिस हिरासत में चल रही पूछताछ के दौरान इस मामले के मुख्य आरोपी अविनाश शुक्ला ने कथित तौर पर गबन की गई राशि में से 19 लाख रुपए निजी तौर पर खर्च करने की बात स्वीकार कर ली है। समाचार एजेंसी पीटीआई (PTI) ने पुलिस सूत्रों के हवाले से इस महत्वपूर्ण प्रगति की जानकारी सार्वजनिक की है। यह खुलासा ऐसे समय में हुआ है जब मंदिर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां आंतरिक व्यवस्था को लेकर कड़े कदम उठा रही हैं। पुलिस अब इस बात की तफ्तीश कर रही है कि यह पूरी रकम कहां और किन मदों में खर्च की गई है। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ अन्य लोगों से भी पूछताछ होने की संभावना जताई जा रही है।
अयोध्या स्थित राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले दान और चढ़ावे की राशि में वित्तीय अनियमितता का मामला सामने आया था। इस प्रकरण में अविनाश शुक्ला नाम के व्यक्ति को मुख्य संदिग्ध के तौर पर नामजद किया गया था, जिसे पुलिस ने हिरासत में लेकर कानूनी प्रक्रिया शुरू की थी। इस पूरे वित्तीय अपराध की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस की विशेष टीम गठित की गई थी। हालिया घटनाक्रम के अनुसार, पुलिस की सघन पूछताछ के दौरान आरोपी ने यह स्वीकार किया है कि उसने गबन किए गए कोष से 19 लाख रुपए की एक बड़ी धनराशि व्यक्तिगत आवश्यकताओं और अन्य गतिविधियों पर खर्च कर दी है।
राम मंदिर में ऑडिट और आंतरिक खातों के मिलान के दौरान कुछ विसंगतियां पाई गई थीं, जिसके बाद इस वित्तीय गड़बड़ी का आधिकारिक तौर पर पता चला। मंदिर प्रबंधन की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने मामला दर्ज किया और प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी अविनाश शुक्ला को गिरफ्तार किया था।
न्यूज एजेंसी पीटीआई द्वारा दी गई रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस रिमांड के दौरान जब आरोपी के सामने बैंक खातों के विवरण और वित्तीय दस्तावेज रखे गए, तो उसने अपने कृत्य को स्वीकार किया। सूत्रों के अनुसार, आरोपी ने पुलिस के सामने माना कि उसने व्यवस्था में मौजूद खामियों का फायदा उठाकर दान राशि को धीरे-धीरे अलग किया और उसमें से 19 लाख रुपए की नकदी को विभिन्न जगहों पर ठिकाने लगा दिया या अपने निजी उपयोग में ले लिया। पुलिस अब उन खातों, संपत्तियों या लेन-देन की कड़ियों को खंगाल रही है, जहां यह पैसा ट्रांसफर किया गया था।
इस मामले में पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि आरोपी का यह बयान प्राथमिक पूछताछ का हिस्सा है। एक आधिकारिक बयान में पुलिस ने स्पष्ट किया कि, "आरोपी द्वारा दी गई जानकारी को सत्यापित करने के लिए बैंक स्टेटमेंट और डिजिटल लेन-देन के रिकॉर्ड्स की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है। कानून के मुताबिक मामले की निष्पक्ष विवेचना जारी है।" हालांकि, यह स्पष्ट किया जाता है कि कानूनी नियमों के तहत अदालत द्वारा दोष सिद्ध होने तक आरोपी को केवल संदिग्ध माना जाएगा।
वहीं, राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े अधिकारियों ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि मंदिर परिसर के भीतर दान संग्रह और उसके रख-रखाव की प्रणालियों को पूरी तरह डिजिटल और फुलप्रूफ बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि भविष्य में इस तरह की किसी भी वित्तीय चूक की पुनरावृत्ति न हो सके।
इस खुलासे के बाद मंदिर की सुरक्षा और वित्तीय प्रबंधन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कई बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं:
सख्त निगरानी प्रणाली: दान पेटियों से लेकर मुख्य बैंक खातों तक पैसे ट्रांसफर करने की पूरी प्रक्रिया की अब सीसीटीवी (CCTV) और डिजिटल ऑडिटिंग के जरिए दोहरी निगरानी की जा रही है।
कर्मचारियों का वेरिफिकेशन: मंदिर के वित्तीय कार्यों में लगे सभी संविदा और नियमित कर्मचारियों के बैकग्राउंड की दोबारा कड़ाई से जांच की जा रही है।
श्रद्धालुओं का भरोसा: इस तरह के मामलों से श्रद्धालुओं की भावनाएं आहत न हों, इसके लिए पारदर्शिता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
अयोध्या पुलिस इस मामले में जल्द ही एक विस्तृत चार्जशीट (आरोप पत्र) अदालत के समक्ष पेश करने की तैयारी में है। आरोपी अविनाश शुक्ला के कबूलनामे के बाद पुलिस उन संपत्तियों और वस्तुओं को जब्त करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर सकती है, जिन्हें कथित तौर पर गबन की गई राशि से खरीदा गया था। इसके साथ ही, इस बात की भी गहनता से जांच की जा रही है कि क्या इस वित्तीय अपराध में परिसर के अंदर या बाहर का कोई अन्य व्यक्ति भी सह-आरोपी के रूप में शामिल था।
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