भारत में बकरीद यानी ईद उल-अजहा की सटीक तारीख को लेकर असमंजस दूर, देश के अधिकांश हिस्सों में इस दिन मनाया जाएगा त्योहार।

इस्लामी कैलेंडर के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक ईद उल-अजहा यानी बकरीद की सटीक तारीख को लेकर देश

May 27, 2026 - 12:11
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भारत में बकरीद यानी ईद उल-अजहा की सटीक तारीख को लेकर असमंजस दूर, देश के अधिकांश हिस्सों में इस दिन मनाया जाएगा त्योहार।
भारत में बकरीद यानी ईद उल-अजहा की सटीक तारीख को लेकर असमंजस दूर, देश के अधिकांश हिस्सों में इस दिन मनाया जाएगा त्योहार।
  • चांद दिखने और इस्लामी कैलेंडर के अनुसार हुआ अंतिम फैसला, नई दिल्ली की जामा मस्जिद और प्रमुख उलेमाओं ने तारीख का किया औपचारिक ऐलान
  • केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों ने सार्वजनिक अवकाश की तिथियों में किया बड़ा बदलाव, अब इस दिन बंद रहेंगे दफ्तर और बाजार

इस्लामी कैलेंडर के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक ईद उल-अजहा यानी बकरीद की सटीक तारीख को लेकर देश भर के आम नागरिकों और मुस्लिम समुदाय के बीच पिछले कुछ दिनों से बना हुआ असमंजस अब पूरी तरह से समाप्त हो गया है। भारत के अधिकांश राज्यों और प्रमुख शहरों में इस बार बकरीद का यह पावन पर्व 28 मई 2026 को बेहद अकीदत और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया जाएगा। शुरुआत में विभिन्न सरकारी कैलेंडरों और सामान्य अनुमानों के आधार पर इस त्योहार के 27 मई को मनाए जाने की संभावना जताई जा रही थी, जिससे आम लोगों के बीच इस बात को लेकर लगातार ऊहापोह की स्थिति बनी हुई थी कि त्योहार वास्तव में किस दिन मनाया जाए। हालांकि, इस्लामी चंद्र कैलेंडर की अनूठी व्यवस्था और चांद देखने की पारंपरिक गवाहियों के बाद अब इसकी अंतिम और प्रामाणिक तारीख पर पूरी तरह से मुहर लग चुकी है।

इस बड़े धार्मिक त्योहार की तारीख में हुए इस आंशिक बदलाव के पीछे मुस्लिम समुदाय द्वारा अपनाई जाने वाली चंद्र गणना प्रणाली का एक बहुत ही महत्वपूर्ण नियम काम करता है। इस्लामी कैलेंडर का 12वां और अंतिम महीना, जिसे जुल्हिज्जा या जिलहिज कहा जाता है, उसकी शुरुआत पूरी तरह से आकाश में दिखने वाले नए वर्धमान चांद यानी क्रेसेंट मून की दृश्यता पर निर्भर करती है। भारत की केंद्रीय हिलाल कमेटियों, नई दिल्ली की ऐतिहासिक जामा मस्जिद और फतेहपुरी मस्जिद के शाही इमामों के साथ-साथ इमारत-ए-शरिया हिंद जैसी बड़ी मजहबी संस्थाओं ने पिछले दिनों देशव्यापी स्तर पर चांद देखने की प्रामाणिक कोशिशें की थीं। उस दौरान देश के किसी भी हिस्से से नए चांद के दिखने की कोई भी पुख्ता या विश्वसनीय गवाही प्राप्त नहीं हो सकी थी, जिसके कारण जिलहिज महीने की पहली तारीख एक दिन आगे बढ़ गई और उसी गणना के अनुसार यह साफ हो गया कि बकरीद का मुख्य पर्व अब 28 मई को ही होगा।

धार्मिक विद्वानों और उलेमाओं ने इस विषय पर वैधानिक स्थिति को स्पष्ट करते हुए बताया है कि ईद उल-अजहा का त्योहार हमेशा जिलहिज महीने की 10वीं तारीख को मनाया जाता है। चूंकि भारत में चांद न दिखने के कारण जिलहिज महीने की पहली तारीख 19 मई को निर्धारित की गई थी, इसलिए गणितीय और धार्मिक रूप से इस महीने की 10वीं तारीख स्वतः ही 28 मई को पड़ रही है। इस घोषणा के सामने आते ही देश भर की तमाम बड़ी मस्जिदों, ईदगाहों और स्थानीय धार्मिक कमेटियों ने अपनी-अपनी तैयारियों के समय और सारणी में आवश्यक सुधार कर लिए हैं। आम जनता को भी यह सूचित कर दिया गया है कि वे अपनी मजहबी इबादत, नमाज के समय और कुर्बानी की रस्मों का पूरा खाका 28 मई के दिन के अनुसार ही तैयार करें ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से बचा जा सके।  बकरीद का त्योहार पूरी तरह से चांद की गवाही पर आधारित जुल्हिज्जा महीने की 10वीं तारीख को तय होता है, जिसके कारण सौर कैलेंडर की तारीखों में अक्सर 1 से 2 दिनों का अंतर आ जाता है।

चांद देखने की इस नई और संशोधित घोषणा का सीधा और व्यापक असर देश की प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी छुट्टियों के कैलेंडर पर भी देखने को मिला है। केंद्र सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय ने इस धार्मिक निर्णय के तुरंत बाद एक नया आधिकारिक आदेश जारी करते हुए केंद्रीय प्रशासनिक कार्यालयों के लिए अवकाश की सूची को संशोधित कर दिया है। दिल्ली और नई दिल्ली स्थित सभी केंद्रीय सरकारी दफ्तरों में पहले जो छुट्टी 27 मई को घोषित की गई थी, उसे अब आधिकारिक तौर पर बदलकर 28 मई कर दिया गया है। इसके साथ ही, देश की सर्वोच्च अदालत ने भी अपनी कार्य सूची में बदलाव करते हुए स्पष्ट किया है कि 28 मई को न्यायालय में अवकाश रहेगा और उस दिन के नियमित मुकदमों की सुनवाई एक दिन पहले यानी 27 मई को ही संपन्न कर ली जाएगी।

केंद्रीय स्तर पर हुए इस प्रशासनिक फेरबदल के समानांतर देश के कई बड़े राज्यों ने भी अपने-अपने स्तर पर सार्वजनिक छुट्टियों के कैलेंडरों में इसी तरह के जरूरी संशोधन जारी किए हैं। पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों की सरकारों ने अपनी पुरानी अधिसूचनाओं को वापस लेते हुए 28 मई को बकरीद के उपलक्ष्य में पूर्ण राजकीय अवकाश की घोषणा कर दी है। इन राज्यों में शिक्षा विभागों ने भी स्कूलों और कॉलेजों की परीक्षाओं को री-शेड्यूल किया है जो पहले 28 मई को आयोजित होने वाली थीं। इसके विपरीत, केरल जैसे राज्य ने अपनी स्थानीय चांद देखने की परंपराओं और विशिष्ट भौगोलिक स्थिति के कारण अपने यहाँ 27 और 28 मई दोनों ही दिनों को सार्वजनिक अवकाश के रूप में अधिसूचित किया है, जिससे वहां के नागरिकों को त्योहार मनाने के लिए दो दिनों का लंबा समय मिल सकेगा।

इस बीच, भारत और खाड़ी देशों के बीच त्योहार मनाने के दिनों में आने वाले पारंपरिक अंतर को लेकर भी हर साल की तरह इस बार भी एक स्पष्ट अंतर देखा जा रहा है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और अन्य खाड़ी देशों के साथ-साथ मलेशिया और इंडोनेशिया जैसे मुस्लिम बहुल राष्ट्रों में बकरीद का त्योहार भारत से ठीक 1 दिन पहले, यानी 27 मई को ही मनाया जा रहा है। खाड़ी देशों में चांद देखने की समितियां भारत से समय क्षेत्र और भौगोलिक स्थिति में आगे होने के कारण चांद को पहले ही देख लेती हैं, जिसके कारण वहां मक्का की पवित्र हज यात्रा के मुख्य अनुष्ठानों के साथ ही बकरीद की शुरुआत हो जाती है। भारत और उपमहाद्वीप के अन्य देशों में यह त्योहार हमेशा खाड़ी देशों के अगले दिन ही मनाने की एक स्थापित और पुरानी परंपरा रही है।

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