Special : 'जब शहर सोता है या जश्न मना रहा होता है, तब मैं उसके इस सुकून को कायम रखने में मदद कर रही होती हूं', पढिये 33 वर्षीय मेट्रो ऑपरेटर प्रीति कहानी।
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन में ट्रेन ऑपरेटर के रूप में कार्यरत 33 वर्षीय प्रीति दिल्ली की लाखों यात्रियों की रोजमर्रा की जिंदगी को सुचारू
दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन में ट्रेन ऑपरेटर के रूप में कार्यरत 33 वर्षीय प्रीति दिल्ली की लाखों यात्रियों की रोजमर्रा की जिंदगी को सुचारू रूप से चलाने वाली महत्वपूर्ण कड़ी हैं। साइंस स्ट्रीम से स्नातक प्रीति ने अपनी मेहनत और निपुणता से न केवल पुरुष-प्रधान क्षेत्र में अपनी जगह बनाई बल्कि 2025 में DMRC के 31वें फाउंडेशन डे पर 'मेट्रो वुमन ऑफ द ईयर' अवॉर्ड से सम्मानित हुईं। यह पुरस्कार उन्हें सीनियर स्टेशन कंट्रोलर/ट्रेन ऑपरेटर के रूप में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिया गया। प्रीति शादीशुदा हैं और एक बच्चे की मां हैं, इसलिए उनके सामने काम और परिवार के बीच संतुलन बनाए रखने की बड़ी चुनौती रहती है। फिर भी वे अपनी ड्यूटी को पूरे समर्पण से निभाती हैं और शहर के जश्न या शांत रातों में भी मेट्रो की सेवाओं को सुनिश्चित करती हैं।
प्रीति की डेली रूटीन बेहद अनुशासित और व्यस्त होती है। उनका दिन सुबह 4 बजे शुरू होता है जब वे परिवार के लिए नाश्ता और लंच तैयार करती हैं। इसके बाद वे घर से निकलकर मेट्रो डिपो या स्टेशन पहुंचती हैं जहां ट्रेन ऑपरेशन की तैयारी शुरू होती है। ट्रेन चलाने से पहले वे सभी सेफ्टी चेक, सिग्नल सिस्टम और ट्रेन की मैकेनिकल स्थिति की जांच करती हैं। एक शिफ्ट में वे कई ट्रिप्स कंप्लीट करती हैं जिसमें हजारों यात्रियों को उनकी मंजिल तक सुरक्षित पहुंचाना शामिल होता है। ड्यूटी के दौरान वे एटीएस सिस्टम, कम्युनिकेशन और इमरजेंसी प्रोटोकॉल पर फोकस रखती हैं। उनकी सटीकता और शांत स्वभाव से यात्रियों को सुरक्षित महसूस होता है।
जब शहर में त्योहार, मैच या कोई बड़ा इवेंट होता है तब मेट्रो पर दबाव बढ़ जाता है। ऐसे मौकों पर प्रीति की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है क्योंकि मेट्रो दिल्ली की मुख्य परिवहन व्यवस्था है। कई बार जब उनके रिश्तेदार घर पर जश्न मना रहे होते हैं तब वे स्टेशन पर ड्यूटी निभा रही होती हैं। फिर भी वे इस बात पर गर्व महसूस करती हैं कि उनकी वजह से शहर का सुकून बना रहता है। प्रीति का मानना है कि मेट्रो सिर्फ ट्रांसपोर्ट नहीं बल्कि शहर की धड़कन है और इसे चलाना एक सम्मान की बात है।
इनसेट: प्रीति ने एक इंटरव्यू में कहा कि "जब शहर जश्न में डूबा होता है, तब मेट्रो पर काम की जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ जाती है। कई खास मौकों पर मेरे रिश्तेदार घर पर सेलिब्रेट कर रहे थे और मैं यहां स्टेशन पर अपनी ड्यूटी पर थी। फिर भी, मुझे इस बात पर गर्व है कि जब शहर सोता है या जश्न मना रहा होता है, तब मैं उसके इस सुकून को कायम रखने में मदद कर रही होती हूं।"
प्रीति की सफलता महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है। DMRC में महिलाओं की संख्या बढ़ रही है और वे ट्रेन ऑपरेटर, स्टेशन कंट्रोलर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर हैं। प्रीति की तरह कई महिलाएं इस क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। उनका अवॉर्ड उनके निरंतर प्रयासों, सेफ्टी स्टैंडर्ड्स बनाए रखने और यात्रियों की सेवा के लिए दिया गया। DMRC के फाउंडेशन डे पर यह सम्मान उन्हें और अन्य महिलाओं को प्रोत्साहित करता है। प्रीति ने बताया कि उनकी सफलता के पीछे परिवार का सहयोग महत्वपूर्ण है जो उन्हें काम पर फोकस करने की आजादी देता है।
ट्रेन ऑपरेटर का काम बेहद जिम्मेदारी भरा है जहां एक छोटी चूक भी बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है। प्रीति नियमित ट्रेनिंग, सिमुलेशन और अपडेट्स से खुद को तैयार रखती हैं। वे यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देती हैं और इमरजेंसी में शांत रहकर स्थिति संभालती हैं। उनका दैनिक जीवन काम, परिवार और व्यक्तिगत विकास का संतुलन दर्शाता है जहां वे सुबह जल्दी उठकर सब कुछ मैनेज करती हैं। प्रीति की कहानी दिल्ली मेट्रो में महिलाओं की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। DMRC ने महिलाओं के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम्स शुरू किए हैं जिससे और अधिक महिलाएं इस क्षेत्र में आ रही हैं। प्रीति का योगदान न केवल तकनीकी है बल्कि सामाजिक भी क्योंकि वे दिखाती हैं कि महिलाएं किसी भी चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में सफल हो सकती हैं।
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