लघुकथा: आभासी दिखावा…
“दी! क्या आपको पता है शाश्वत जी आजकल कहाँ हैं और कैसे हैं ?” “नहीं! मुझे कैसे पता होगा? क्यों क्या हुआ ? “....
लघुकथा
आभासी दिखावा…
“दी! क्या आपको पता है शाश्वत जी आजकल कहाँ हैं और कैसे हैं ?”
“नहीं! मुझे कैसे पता होगा? क्यों क्या हुआ ? “
“अरे वो पिछले दो हफ़्ते से अपनी टाइम लाइन पर नहीं आ रहे और न किसी की पोस्ट पर ही आ रहे हैं!”
“हाँ! कह तो सही रही हो, इधर बहुत दिनों से उनकी कोई पोस्ट दिखी नहीं! वरना हर दिन एक लाजवाब पोस्ट डालते हैं और सभी की पोस्ट पर ईमानदारी से आते हैं… किसी से पूछा नहीं तुमने?”
उदास हो उसने कहा, “दी! पूछा था कुछ लोगों से…तो उन्होंने कहा “तुम क्यों उन्हें ढूँढ रही हो, सब क्या सोचेंगे तुम्हारे बारे में ?”
“अरे! ये क्या अहमक़ाना बात हुई। अगर किसी की रचनाओं से जुड़े हैं तो स्वाभाविक तौर पर उस शख़्स के दुख-सुख से भी हम जुड़ जाते हैं, भले ही उनसे बहुत व्यक्तिगत न हों!”
“जी! दी, वही तो… “
“देखो मैं प्रयास करती हूँ कि आख़िर बात क्या है?
…और सुनो! उनके फ़ॉलोवर्स तो सैकड़ों की संख्या में हैं तो क्या सब ‘दिखावटी’ हैं?”
नलिनी श्रीवास्तव "नील"
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