हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के नतीजे: बीजेपी की हैट्रिक का सपना टूटा, कांग्रेस के कर्मवीर सिंह बौध ने मारी बाजी।

हरियाणा की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से जारी राज्यसभा चुनाव का सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया है। 16 मार्च 2026 को हुए मतदान के बाद आए

Mar 17, 2026 - 12:43
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हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के नतीजे: बीजेपी की हैट्रिक का सपना टूटा, कांग्रेस के कर्मवीर सिंह बौध ने मारी बाजी।
हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के नतीजे: बीजेपी की हैट्रिक का सपना टूटा, कांग्रेस के कर्मवीर सिंह बौध ने मारी बाजी।
  • विधानसभा में मतों का नया समीकरण: संजय भाटिया और कर्मवीर सिंह बौध पहुंचे राज्यसभा, निर्दलीय उम्मीदवार को मिली करारी शिकस्त।
  • देर रात तक चला हाई-वोल्टेज ड्रामा: निर्वाचन आयोग के हस्तक्षेप के बाद घोषित हुए परिणाम, बीजेपी और कांग्रेस के बीच रहा कड़ा मुकाबला।

हरियाणा की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से जारी राज्यसभा चुनाव का सस्पेंस आखिरकार खत्म हो गया है। 16 मार्च 2026 को हुए मतदान के बाद आए परिणामों ने राज्य की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को बड़ा झटका दिया है। बीजेपी यहाँ राज्यसभा सीटों पर जीत की हैट्रिक लगाने से चूक गई है। राज्य की दो खाली सीटों के लिए हुए इस चुनाव में एक सीट बीजेपी के खाते में गई है, जबकि दूसरी सीट पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया है। बीजेपी की ओर से पूर्व सांसद संजय भाटिया ने जीत दर्ज की, वहीं कांग्रेस के उम्मीदवार कर्मवीर सिंह बौध ने भी शानदार जीत हासिल कर राज्यसभा का टिकट पक्का कर लिया। इस चुनाव में तीसरे उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरे निर्दलीय प्रत्याशी सतीश नांदल को हार का सामना करना पड़ा, जिन्हें बीजेपी का मौन समर्थन प्राप्त था।

चुनाव परिणाम घोषित होने से पहले चंडीगढ़ स्थित विधानसभा परिसर में जबरदस्त राजनीतिक उठापटक देखने को मिली। सुबह 9 बजे से शुरू हुआ मतदान शाम 4 बजे तक चला, जिसमें 90 सदस्यीय विधानसभा के 88 विधायकों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इनेलो (INLD) के दो विधायकों, अर्जुन चौटाला और आदित्य देवीलाल ने वोटिंग प्रक्रिया से दूरी बनाए रखी। मतदान के तुरंत बाद बीजेपी और कांग्रेस दोनों ने एक-दूसरे के विधायकों के वोटों पर आपत्तियां दर्ज कराईं, जिसके कारण मतगणना को कई घंटों तक रोकना पड़ा। बीजेपी ने कांग्रेस विधायक के वोट की गोपनीयता भंग होने का आरोप लगाया, जबकि कांग्रेस ने कैबिनेट मंत्री अनिल विज के वोट को अमान्य करने की मांग की। लंबी खींचतान के बाद केंद्रीय चुनाव आयोग ने इन शिकायतों का निपटारा किया और देर रात मतगणना शुरू हो सकी।

इस चुनाव में जीत का गणित काफी दिलचस्प रहा। कुल 88 वोट पड़ने के कारण जीत के लिए आवश्यक कोटा 30 मतों का निर्धारित किया गया था। बीजेपी के पास अपने 48 विधायक थे, जबकि कांग्रेस के पास 37 विधायकों का संख्या बल था। बीजेपी ने अपने आधिकारिक उम्मीदवार संजय भाटिया को जिताने के बाद अतिरिक्त वोटों को निर्दलीय सतीश नांदल की ओर मोड़ने की रणनीति बनाई थी, ताकि कांग्रेस के कर्मवीर सिंह बौध को हैट्रिक रोककर बाहर किया जा सके। हालांकि, कांग्रेस ने अपनी एकजुटता बनाए रखी और कर्मवीर सिंह बौध को आवश्यक कोटे से अधिक वोट मिले। खबरों के अनुसार, बीजेपी के कुछ विधायकों और निर्दलीयों की क्रॉस-वोटिंग की संभावनाओं के बीच कांग्रेस ने अपनी सीट बचाने में कामयाबी हासिल की, जो मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए एक नैतिक हार के रूप में देखी जा रही है।

मतदान का आधिकारिक आंकड़ा: हरियाणा की दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए मुकाबले में बीजेपी के संजय भाटिया को प्रथम वरीयता के 32 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के कर्मवीर सिंह बौध ने 31 वोट हासिल कर अपनी जीत सुनिश्चित की। निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल को केवल 25 वोट मिल सके, जिससे उनकी हार तय हो गई। कुल 90 विधायकों में से 88 ने वोट डाले और 2 वोट तकनीकी आधार पर खारिज होने की चर्चा भी रही।

बीजेपी के लिए यह हार इसलिए भी चुभने वाली है क्योंकि पार्टी को उम्मीद थी कि वह पिछली बार की तरह इस बार भी निर्दलीय उम्मीदवार के कंधे पर बंदूक रखकर कांग्रेस को पटखनी दे देगी। साल 2024 के विधानसभा चुनावों में मिली ऐतिहासिक जीत के बाद बीजेपी काफी उत्साहित थी और इसे उसकी हैट्रिक के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन राज्यसभा के इस रण में कांग्रेस के भूपेंद्र सिंह हुड्डा और उदय भान की जोड़ी ने अपनी रणनीति से सत्तापक्ष को मात दे दी। कांग्रेस के कर्मवीर सिंह बौध की जीत ने पार्टी कार्यकर्ताओं में नया जोश भर दिया है। जीत के बाद बौध ने कहा कि यह सत्य की जीत है और वे सदन में हरियाणा के ज्वलंत मुद्दों, विशेषकर बेरोजगारी और किसानों की समस्याओं को पुरजोर तरीके से उठाएंगे।

चुनाव के दौरान हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज का जज्बा भी चर्चा का विषय रहा। दोनों पैरों में फ्रैक्चर होने के बावजूद वे व्हीलचेयर पर बैठकर वोट डालने पहुंचे। उन्होंने मतदान के बाद दावा किया था कि बीजेपी दोनों सीटों पर अपना प्रभाव दिखाएगी, लेकिन परिणामों ने उनके दावों के उलट तस्वीर पेश की। वहीं, निर्दलीय उम्मीदवार सतीश नांदल की हार ने उन निर्दलीय विधायकों की स्थिति को भी स्पष्ट कर दिया है जो सरकार के साथ खड़े थे। सतीश नांदल को जिताने के लिए बीजेपी ने जो 'प्लान बी' तैयार किया था, वह विधायकों की गुपचुप नाराजगी या रणनीतिक चूक के कारण विफल हो गया। इससे यह भी संकेत मिलता है कि विधानसभा के भीतर सत्ताधारी गठबंधन के पास अब उतना अभेद्य बहुमत नहीं रहा जितना चुनाव परिणामों के तुरंत बाद महसूस किया जा रहा था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव के परिणाम आने वाले समय में हरियाणा की राजनीति की दिशा तय करेंगे। राज्यसभा में एक सीट का नुकसान बीजेपी के लिए ऊपरी सदन में अपने बहुमत के लक्ष्य को प्राप्त करने में थोड़ी बाधा डाल सकता है। वहीं कांग्रेस के लिए यह एक बड़ी मनोवैज्ञानिक जीत है, क्योंकि पार्टी ने अपने विधायकों को टूटने से बचाए रखा और भाजपा समर्थित निर्दलीय के चक्रव्यूह को भेद दिया। कांग्रेस ने वोटिंग से पहले अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए रिसॉर्ट पॉलिटिक्स का भी सहारा लिया था और उन्हें हिमाचल प्रदेश के कसौली में ठहराया गया था। यह रणनीति अंततः सफल रही और पार्टी ने सुरक्षित रूप से अपने उम्मीदवार को संसद के ऊपरी सदन तक पहुँचा दिया।

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