मनीष सिसोदिया को दिल्ली कोर्ट से राहत- 8 साल की जांच के बाद सीबीआई ने कहा, ‘कोई भ्रष्टाचार नहीं मिला।

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को एक मामले में बड़ी....

Aug 6, 2025 - 11:43
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मनीष सिसोदिया को दिल्ली कोर्ट से राहत- 8 साल की जांच के बाद सीबीआई ने कहा, ‘कोई भ्रष्टाचार नहीं मिला।
मनीष सिसोदिया को दिल्ली कोर्ट से राहत- 8 साल की जांच के बाद सीबीआई ने कहा, ‘कोई भ्रष्टाचार नहीं मिला।

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (आप) के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को एक मामले में बड़ी राहत दी। सीबीआई ने कोर्ट में स्वीकार किया कि 8 साल की जांच, छापेमारी और गहन तलाशी के बावजूद सिसोदिया के खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई सबूत नहीं मिला। सिसोदिया ने इस फैसले के बाद सोशल मीडिया मंच X पर लिखा, “8 साल की जांच, सीबीआई-ईडी की रेड, मीडिया ट्रायल, बच्चों के कपड़े तक खंगाले गए… लेकिन कोर्ट में खुद सीबीआई ने कहा - 1 रुपये का भी भ्रष्टाचार नहीं मिला।” यह मामला दिल्ली सरकार की 2015 में गठित फीडबैक यूनिट से जुड़ा था, जिसमें सिसोदिया पर राजनीतिक जासूसी और भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे।

2015 में आम आदमी पार्टी की दिल्ली में सरकार बनने के बाद मनीष सिसोदिया को शिक्षा, वित्त और सतर्कता जैसे महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई थी। उसी साल दिल्ली सरकार ने एक फीडबैक यूनिट (एफबीयू) गठित की थी, जिसका उद्देश्य सरकारी योजनाओं की निगरानी और भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों की जांच करना था। 2016 में दिल्ली के तत्कालीन उपराज्यपाल नजीब जंग ने इस यूनिट को अवैध बताते हुए इसकी जांच के लिए सीबीआई को निर्देश दिए।

सीबीआई ने 2016 में इस मामले में जांच शुरू की और 17 मार्च 2023 को सिसोदिया के खिलाफ एक नया केस दर्ज किया। सीबीआई ने दावा किया कि फीडबैक यूनिट का इस्तेमाल राजनीतिक जासूसी के लिए किया गया और इसके लिए सरकारी फंड का दुरुपयोग हुआ। जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि इस यूनिट की 60% रिपोर्टें भ्रष्टाचार और सतर्कता से संबंधित थीं, जबकि 40% राजनीतिक खुफिया जानकारी से जुड़ी थीं। हालांकि, सीबीआई ने यह भी माना कि इन रिपोर्टों के आधार पर किसी सरकारी अधिकारी या विभाग के खिलाफ कोई औपचारिक कार्रवाई नहीं हुई।

2018 में दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश पर आप नेताओं द्वारा कथित हमले के बाद भी सिसोदिया पर जांच का दबाव बढ़ा। इस मामले में भी सीबीआई ने सिसोदिया और अन्य आप नेताओं के खिलाफ जांच शुरू की थी। इसके अलावा, 2022 में दिल्ली की आबकारी नीति में कथित अनियमितताओं को लेकर सिसोदिया के खिलाफ सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छापेमारी की। 19 अगस्त 2022 को सीबीआई ने सिसोदिया के घर और कार्यालय सहित सात राज्यों के 31 ठिकानों पर छापे मारे। सिसोदिया ने दावा किया कि उनकी तलाशी में बच्चों के कपड़े तक खंगाले गए, लेकिन कोई सबूत नहीं मिला।

  • कोर्ट में सीबीआई का बयान

05 अगस्त 2025 को राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई के दौरान सीबीआई ने स्वीकार किया कि फीडबैक यूनिट मामले में मनीष सिसोदिया के खिलाफ भ्रष्टाचार का कोई सबूत नहीं मिला। कोर्ट में सीबीआई ने कहा कि 8 साल की जांच, कई छापेमारियों और गहन तलाशी के बाद भी सिसोदिया के खिलाफ एक रुपये का भी भ्रष्टाचार साबित नहीं हुआ। इस बयान के बाद कोर्ट ने सिसोदिया को इस मामले में राहत दी। सिसोदिया ने इस फैसले को अपनी ईमानदारी की जीत बताया और कहा कि यह उन लोगों के लिए जवाब है जो उनकी छवि को बदनाम करने की कोशिश कर रहे थे।

सिसोदिया ने X पर लिखा, “सीबीआई और ईडी की रेड, मीडिया ट्रायल और बच्चों के कपड़े तक खंगालने के बावजूद कोर्ट में साफ हो गया कि मैंने कोई भ्रष्टाचार नहीं किया। यह मेरे लिए नहीं, बल्कि उन लाखों बच्चों के लिए जीत है, जिनके लिए हमने दिल्ली में शिक्षा क्रांति की।” उन्होंने यह भी कहा कि यह फैसला उन लोगों के लिए सबक है जो बिना सबूत के नेताओं को बदनाम करते हैं।

हालांकि फीडबैक यूनिट मामले में सिसोदिया को राहत मिली है, लेकिन दिल्ली की आबकारी नीति (2021-22) से जुड़े मामले में उनकी मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। इस मामले में सीबीआई और ईडी ने सिसोदिया को 26 फरवरी 2023 को गिरफ्तार किया था। सीबीआई ने दावा किया कि नई आबकारी नीति में अनियमितताएं हुईं, जैसे लाइसेंस शुल्क में छूट देना, अनधिकृत लाभ देना और सरकारी खजाने को 144 करोड़ रुपये का नुकसान।

सिसोदिया के वकीलों ने कोर्ट में तर्क दिया कि उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। 06 अक्टूबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से सवाल किया था कि सिसोदिया के पास कोई रिश्वत का पैसा नहीं मिला, फिर मनी लॉन्ड्रिंग का केस कैसे बनता है। कोर्ट ने ईडी से पूछा, “आपके पास दिनेश अरोड़ा (एक गवाह) के बयान के अलावा और क्या सबूत है?” हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 30 अक्टूबर 2023 को सिसोदिया की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, लेकिन यह राहत दी कि अगर छह महीने में चार्जशीट दाखिल नहीं हुई, तो वे फिर से जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।

  • सिसोदिया की गिरफ्तारी और आप का दावा

सिसोदिया ने 17 अक्टूबर 2022 को सीबीआई की पूछताछ के बाद दावा किया था कि उन पर आप छोड़कर बीजेपी में शामिल होने का दबाव डाला गया। उन्होंने कहा, “मुझे सीएम बनाने का ऑफर दिया गया, लेकिन मैंने इनकार कर दिया।” आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी सिसोदिया का समर्थन करते हुए कहा कि केंद्र सरकार आप की बढ़ती लोकप्रियता से डरती है। केजरीवाल ने 19 अगस्त 2022 को ट्वीट किया, “जिस दिन न्यूयॉर्क टाइम्स ने दिल्ली के शिक्षा मॉडल और सिसोदिया की तारीफ की, उसी दिन केंद्र ने उनके घर सीबीआई भेज दी। पहले भी कई रेड हुईं, लेकिन कुछ नहीं मिला।”

आप ने इस मामले को राजनीति से प्रेरित बताया और कहा कि सिसोदिया को दिल्ली के शिक्षा मॉडल को बढ़ावा देने की सजा दी जा रही है। आप ने दावा किया कि सिसोदिया ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों में क्रांति लाई, जिसकी तारीफ विदेशी अखबारों तक में हुई।

बीजेपी ने सिसोदिया और आप पर तीखा हमला बोला। दिल्ली बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा, “सिसोदिया का कट्टर ईमानदार होने का दावा हास्यास्पद है। आबकारी नीति में भ्रष्टाचार के सबूत हैं, और फीडबैक यूनिट के जरिए जासूसी की गई।” बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने 2022 में कहा था, “सिसोदिया भ्रष्टाचार का वर्ल्ड कप जीतने की नौटंकी कर रहे हैं।”

वहीं, दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष अनिल चौधरी ने कहा कि सिसोदिया और केजरीवाल भगत सिंह जैसे शहीदों का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि सिसोदिया पर देशद्रोह का केस दर्ज होना चाहिए।

सिसोदिया को कोर्ट से मिली राहत ने दिल्ली में विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल को गरमा दिया है। आप ने इसे अपनी नैतिक जीत बताया, जबकि बीजेपी ने कहा कि आबकारी नीति मामले में सिसोदिया अभी भी घेरे में हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मामले को लेकर तीखी बहस छिड़ी। X पर एक यूजर ने लिखा, “8 साल की जांच में कुछ नहीं मिला, फिर भी सिसोदिया को परेशान किया गया। यह राजनीतिक बदले की कार्रवाई है।” एक अन्य यूजर ने लिखा, “फीडबैक यूनिट में राहत मिली, लेकिन शराब घोटाले में सिसोदिया की जवाबदेही बाकी है।”

सिसोदिया को दिल्ली के शिक्षा मॉडल का मुख्य architect माना जाता है। उनके नेतृत्व में दिल्ली के सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे, शिक्षक प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम में सुधार हुआ। न्यूयॉर्क टाइम्स ने 2022 में उनके काम की तारीफ की थी। आप का दावा है कि केंद्र सरकार सिसोदिया को इसलिए निशाना बना रही है, क्योंकि दिल्ली का शिक्षा मॉडल बीजेपी शासित राज्यों के लिए चुनौती बन गया है।

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