अखिलेश यादव ने योगी आदित्यनाथ पर साधा निशाना, कहा- मुख्यमंत्री पर 2017 से पहले मुकदमे थे, दंगों से जुड़े मुकदमों का किया जिक्र।
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिली है। उत्तर प्रदेश विधान परिषद में राज्यपाल के अभिभाषण पर
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर तीखी बयानबाजी देखने को मिली है। उत्तर प्रदेश विधान परिषद में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्षी दलों खासकर समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने 2017 से पहले की स्थिति को उपद्रव, अराजकता, कर्फ्यू और माफिया राज से भरा हुआ बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में गुंडे और माफिया सत्ता के संरक्षण में समांतर सरकार चला रहे थे। उन्होंने दावा किया कि उस समय प्रदेश में दंगे, अपराध और भय का माहौल था तथा कानून व्यवस्था पूरी तरह से प्रभावित थी। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि 2017 के बाद स्थिति बदल गई है और अब कानून का राज है तथा प्रदेश उत्सव प्रदेश बन गया है।
इस चर्चा के दौरान विपक्ष की ओर से समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पलटवार किया। अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि मुख्यमंत्री खुद उपद्रवी थे। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पर दर्ज मुकदमे 2017 से पहले के हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि उन मुकदमों को समाजवादियों ने ही राजनीतिक संरक्षण देकर बचाया है। उन्होंने यह भी कहा कि उपद्रव, आगजनी और नफरत फैलाना मुख्यमंत्री की राजनीति का हिस्सा रहा है।
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि मुख्यमंत्री पर 2017 से पहले कई मुकदमे दर्ज थे। उन्होंने दावा किया कि ये मुकदमे समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान दर्ज हुए थे और समाजवादी पार्टी ने ही उन्हें संरक्षण प्रदान किया। अखिलेश यादव ने यह भी जिक्र किया कि मुख्यमंत्री ने शंकराचार्य का अपमान किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि कोई मुख्यमंत्री ऐसे बयान कैसे दे सकता है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार जनता के असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए नफरत की राजनीति कर रही है।
यह बयानबाजी विधान परिषद में हुई चर्चा के संदर्भ में आई है जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व सरकारों पर 2017 से पहले की अराजकता का जिक्र किया था। उन्होंने कहा था कि उस समय प्रदेश में निवेश लाना मुश्किल था और कानून व्यवस्था तार-तार थी। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वे पुरानी स्थितियों को याद दिलाकर वर्तमान सरकार की उपलब्धियों को कमतर दिखाने की कोशिश कर रहे हैं।
अखिलेश यादव के इस हमले में मुख्य रूप से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राजनीतिक जीवन के शुरुआती दौर में दर्ज मुकदमों का जिक्र किया गया। विभिन्न स्रोतों से उपलब्ध जानकारी के अनुसार योगी आदित्यनाथ पर 2017 से पहले कुछ मुकदमे दर्ज थे जो विभिन्न राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े थे। इनमें से कुछ मामलों में बाद में कार्रवाई हुई या वे निरस्त हुए। अखिलेश यादव ने इन मुकदमों को आधार बनाकर मुख्यमंत्री को उपद्रवी करार दिया और कहा कि समाजवादी पार्टी ने ही उन्हें बचाया।
इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में सियासी गरमा-गरमी बढ़ गई है। दोनों पक्षों के बीच 2017 से पहले और बाद की स्थिति को लेकर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री की राजनीति को नफरत फैलाने वाली बताया जबकि मुख्यमंत्री ने पूर्व सरकार को अराजकता का जिम्मेदार ठहराया।
विधान परिषद की इस चर्चा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार ने कानून व्यवस्था को मजबूत किया है और अपराधियों पर सख्ती बरती है। उन्होंने दावा किया कि 2017 से पहले का दौर बीमारू राज्य का था जहां गरीब, महिलाएं और युवा असुरक्षित थे। अखिलेश यादव ने जवाब में कहा कि वर्तमान सरकार असली मुद्दों से भाग रही है और नफरत की राजनीति को बढ़ावा दे रही है।
यह बयानबाजी उत्तर प्रदेश में आगामी राजनीतिक घटनाक्रमों के संकेत दे रही है जहां दोनों प्रमुख दल एक-दूसरे पर लगातार हमलावर हैं। अखिलेश यादव का यह हमला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पिछले बयानों का सीधा जवाब माना जा रहा है।
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