नवरात्र के बाद उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन में होगी बड़ी सर्जरी, मंत्रिमंडल विस्तार की तैयारियां भी तेज
मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी कयासों का बाजार गर्म है। रिक्त पड़े पदों को भरने के साथ-साथ कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में बदलाव की भी संभावना है। इस विस्तार में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा जाएगा
- मिशन 2027 के लिए भाजपा-संघ का महामंथन: मुख्यमंत्री आवास पर समन्वय बैठक में बनी रणनीतिक सहमति
- पंकज चौधरी की नई टीम और जातीय समीकरणों का समाधान: यूपी भाजपा में बड़े प्रशासनिक और सांगठनिक फेरबदल का खाका तैयार
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शुक्रवार का दिन राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना रहा। मुख्यमंत्री आवास पर आयोजित दो चरणों की समन्वय बैठक में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, सरकार के प्रतिनिधियों और संघ के पदाधिकारियों ने घंटों मंथन किया। इस उच्च स्तरीय बैठक में सह-सरकार्यवाह अरुण कुमार की उपस्थिति ने इसे और भी महत्वपूर्ण बना दिया। बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी विधानसभा चुनावों के लिए सांगठनिक ढांचे को 'लीन एंड फिट' बनाना और शासन-प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना था। इस दौरान क्षेत्रीय समन्वय बैठकों से मिले फीडबैक पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें नौकरशाही की संवेदनशीलता और जनता की शिकायतों के त्वरित निस्तारण जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी गई। संघ की ओर से यह स्पष्ट सुझाव दिया गया कि मंत्रियों और विधायकों को अपने क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं और आम जनता के साथ सीधा संवाद बढ़ाना चाहिए ताकि सरकार की छवि और भी मजबूत हो सके।
प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद से पंकज चौधरी संगठन को नए सिरे से गढ़ने में जुटे हुए हैं। उन्होंने दिसंबर से ही इस प्रक्रिया को गति दी है और अब यह अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। सूत्रों के अनुसार, प्रदेश के सभी 94 सांगठनिक जिलों में जिलाध्यक्षों की नियुक्ति के बाद अब जिला कार्यकारिणी के गठन का कार्य लगभग पूरा हो गया है। पंकज चौधरी ने प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल के साथ मिलकर पश्चिम और ब्रज क्षेत्र की कार्यकारिणी को फाइनल कर लिया है, जबकि बाकी क्षेत्रों की सूची भी इसी सप्ताह जारी होने की उम्मीद है। प्रदेश कार्यकारिणी में नए चेहरों को शामिल करने और पुराने पदाधिकारियों की भूमिका बदलने पर भी सहमति बन गई है। इस पूरी कवायद का उद्देश्य सांगठनिक स्तर पर ऊर्जा का संचार करना है ताकि 2027 के चुनावी समर में भाजपा एक मजबूत और एकजुट इकाई के रूप में उतर सके।
पार्टी के भीतर उभरे वर्तमान चुनौतियों और विशेष रूप से जातीय द्वंद्व को समाप्त करने के लिए भी रणनीति तैयार की गई है। पिछले कुछ समय में यूजीसी की नई गाइडलाइंस और शंकराचार्य से जुड़े विवादों ने जो राजनीतिक मोड़ लिया, उसे लेकर पार्टी नेतृत्व सतर्क है। बैठक में इस बात पर गंभीरता से चर्चा की गई कि विपक्ष इन मुद्दों का इस्तेमाल जातीय आधार पर ध्रुवीकरण करने के लिए कर सकता है। पार्टी नेताओं और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच जो मतभेद कुछ घटनाओं के दौरान सतह पर आए, उन्हें सुलझाने के लिए एक स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने पर जोर दिया गया। संगठन का मानना है कि किसी भी हाल में सवर्ण और पिछड़ी जातियों के बीच असंतुलन की स्थिति पैदा नहीं होने देनी चाहिए। इसके लिए आने वाले समय में विभिन्न जातियों के प्रतिनिधियों के साथ अलग से संवाद कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई गई है। आगामी विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए भाजपा एक 'डबल लेयर' सर्वे प्लान पर काम कर रही है। इसमें मौजूदा विधायकों के कार्यों का रिपोर्ट कार्ड दो अलग-अलग स्वतंत्र एजेंसियों के माध्यम से तैयार करवाया जा रहा है। इसका उद्देश्य टिकट वितरण के समय किसी भी प्रकार के पक्षपात को रोकना और केवल जिताऊ उम्मीदवारों को ही मैदान में उतारना है।
मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भी कयासों का बाजार गर्म है। रिक्त पड़े पदों को भरने के साथ-साथ कुछ मौजूदा मंत्रियों के विभागों में बदलाव की भी संभावना है। इस विस्तार में क्षेत्रीय और जातीय संतुलन का विशेष ध्यान रखा जाएगा ताकि हर वर्ग का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके। अवध क्षेत्र से कुर्मी या पासी समुदाय के किसी बड़े चेहरे को मंत्रिमंडल में स्थान मिल सकता है, वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश से भी कुछ प्रभावशाली नामों पर विचार चल रहा है। मंत्रिमंडल में नए चेहरों को शामिल करने का एक मुख्य उद्देश्य सरकार की कार्यक्षमता को बढ़ाना और उन क्षेत्रों में पार्टी की पैठ मजबूत करना है जहाँ पिछला प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस दिशा में कुछ महत्वपूर्ण संकेत दे सकते हैं।
संघ और भाजपा के बीच हुई इस बैठक में जमीनी फीडबैक को सबसे अधिक महत्व दिया गया। संघ के पदाधिकारियों ने छह क्षेत्रीय समन्वय बैठकों काशी, अवध, गोरखपुर, कानपुर, ब्रज और पश्चिम से मिली जानकारी साझा की। इस फीडबैक में यह बात सामने आई कि निचले स्तर पर कार्यकर्ताओं में कुछ प्रशासनिक फैसलों को लेकर असंतोष है। इसके समाधान के लिए तय किया गया कि जिलों के प्रभारी मंत्री अब केवल औपचारिक दौरे नहीं करेंगे, बल्कि वे संगठन के पदाधिकारियों के साथ बैठकर स्थानीय समस्याओं का मौके पर ही निपटारा करेंगे। साथ ही, सार्वजनिक मंचों या सोशल मीडिया पर पार्टी लाइन से हटकर बयानबाजी करने वाले नेताओं को भी सख्त हिदायत दी गई है कि वे अनुशासन का पालन करें और किसी भी विवाद को आंतरिक बैठकों में ही उठाएं।
संगठन में होने वाले इस बड़े बदलाव का असर निगमों, आयोगों और बोर्डों में होने वाली नियुक्तियों पर भी पड़ेगा। काफी समय से लंबित इन नियुक्तियों को अब नवरात्र के तुरंत बाद गति मिलने वाली है। भाजपा नेतृत्व चाहता है कि चुनाव से पहले समर्पित कार्यकर्ताओं को इन पदों पर बैठाकर उन्हें सक्रिय किया जाए। इससे न केवल कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि सरकार की योजनाओं के क्रियान्वयन में भी आसानी होगी। पंकज चौधरी और धर्मपाल सिंह की जोड़ी उन नामों की सूची तैयार कर रही है जो सांगठनिक अनुभव के साथ-साथ प्रशासनिक क्षमता भी रखते हों। माना जा रहा है कि इन नियुक्तियों के माध्यम से पार्टी उन नेताओं को भी साधने का प्रयास करेगी जो फिलहाल हाशिए पर महसूस कर रहे हैं।
आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों को धार देने के लिए भाजपा ने 'बूथ जीतो, चुनाव जीतो' के मंत्र पर काम शुरू कर दिया है। प्रत्येक बूथ पर 'मन की बात' जैसे कार्यक्रमों का आयोजन और केंद्र व राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का प्रचार-प्रसार तेज करने का निर्देश दिया गया है। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व यह मानता है कि उत्तर प्रदेश में जीत का रास्ता मजबूत संगठन से होकर ही जाता है। इसीलिए, नवरात्र के बाद होने वाले सांगठनिक परिवर्तन केवल चेहरों का बदलाव नहीं होंगे, बल्कि यह एक व्यापक रणनीतिक बदलाव होगा जो भविष्य की चुनावी चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार किया गया है। आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में सांगठनिक सक्रियता और प्रशासनिक कड़ाई का एक नया स्वरूप देखने को मिल सकता है।
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