गर्मियों में आंखों की जलन और सूखेपन से तुरंत राहत: बाबा रामदेव के इन आयुर्वेदिक नुस्खों से बढ़ाएं अपनी आंखों की रोशनी।
गर्मियों का मौसम आते ही चिलचिलाती धूप, उमस और गर्म हवाएं यानी लू हमारे पूरे शरीर को प्रभावित करने लगती हैं। इस मौसम
- चिलचिलाती धूप और लू से आंखों को बचाएं: योग गुरु के बताए आसान घरेलू उपाय दूर करेंगे ड्राय आइज की समस्या
- समर आई केयर: धूल, प्रदूषण और जलन से आखों की सुरक्षा के लिए अपनाएं बाबा रामदेव के ये सरल प्राणायाम और घरेलू फार्मूले
गर्मियों का मौसम आते ही चिलचिलाती धूप, उमस और गर्म हवाएं यानी लू हमारे पूरे शरीर को प्रभावित करने लगती हैं। इस मौसम में त्वचा के साथ-साथ हमारे शरीर का सबसे संवेदनशील हिस्सा यानी हमारी आंखें सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं। सूरज की तेज पराबैंगनी किरणें (UV Rays), वातावरण में उड़ती धूल-मिट्टी और प्रदूषण के कारण इस मौसम में आंखों में लालिमा, लगातार पानी आना, चुभन, जलन और सूखेपन (ड्राय आइज) की समस्या तेजी से बढ़ने लगती है। आधुनिक समय में स्क्रीन टाइम बढ़ने और एयर कंडीशनर के लगातार इस्तेमाल से यह दिक्कत और भी गंभीर रूप ले लेती है। योग गुरु बाबा रामदेव के अनुसार, आयुर्वेद और योग में इन समस्याओं का बेहद सरल, प्राकृतिक और अचूक समाधान मौजूद है, जिसे अपनाकर हम अपनी आंखों को बिना किसी साइड इफेक्ट के पूरी तरह सुरक्षित और शीतल रख सकते हैं। बाबा रामदेव के अनुसार, गर्मियों के दिनों में आंखों में होने वाली जलन और सूखेपन का मुख्य कारण शरीर में 'पित्त दोष' का असंतुलन होना है। जब बाहर का तापमान बढ़ता है, तो शरीर के भीतर की गर्मी भी बढ़ने लगती है, जिसका सीधा असर हमारी नाजुक आंखों की नमी पर पड़ता है। इस समस्या से निजात पाने के लिए सबसे पहला और प्रभावी उपाय है 'शीतलता प्रदान करना'। बाबा रामदेव रोजाना सुबह उठकर मुंह में साफ और सादा पानी भरकर आंखों पर ठंडे पानी के छींटे मारने की सलाह देते हैं। ऐसा करने से आंखों के आसपास की मांसपेशियों को तुरंत आराम मिलता है, रक्त संचार बेहतर होता है और रात भर में जमा हुई आंखों की गंदगी व गर्मी पूरी तरह बाहर निकल जाती है। यह एक बेहद सरल क्रिया है जिसे कोई भी व्यक्ति नियमित रूप से अपने जीवन का हिस्सा बना सकता है।
आंखों के सूखेपन यानी ड्राय आइज की समस्या को दूर करने के लिए आयुर्वेद में त्रिफला को एक अमृत के समान माना गया है। त्रिफला, जो कि आंवला, हरड़ और बहेड़ा का एक अनूठा मिश्रण है, आंखों की रोशनी बढ़ाने और हर तरह के संक्रमण को दूर करने में बेहद कारगर है। इसके इस्तेमाल के लिए एक चम्मच त्रिफला चूर्ण को रात में एक गिलास साफ पानी में भिगोकर रख दें। सुबह इस पानी को एक साफ सूती कपड़े से अच्छी तरह छान लें ताकि इसमें चूर्ण का कोई भी बारीक कण न रहे। इसके बाद इस औषधीय पानी से अपनी आंखों को अच्छी तरह धोएं या आई वॉश कप की मदद से आंखों को इसमें डुबोकर कुछ बार पलकें झपकाएं। इसके अलावा, नियमित रूप से शुद्ध गुलाब जल की दो-दो बूंदें आंखों में डालने से भी जलन और थकावट से तुरंत मुक्ति मिलती है।
आयुर्वेदिक विशेष टिप
गर्मियों के मौसम में रोजाना सुबह खाली पेट एक-एक चम्मच आंवला पाउडर या ताजे आंवले के रस का सेवन करने से न केवल आंखों की कमजोरी दूर होती है, बल्कि यह शरीर के आंतरिक पित्त को भी शांत करता है जिससे आंखों की ड्रायनेस दूर होती है।
घरेलू उपायों के साथ-साथ योग गुरु प्राणायाम को आंखों के स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य मानते हैं। उनका कहना है कि अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम का नियमित अभ्यास हमारी आंखों की नसों को गहराई से मजबूती प्रदान करता है। जब हम अनुलोम-विलोम प्राणायाम करते हैं, तो शरीर के भीतर ऑक्सीजन का प्रवाह अत्यधिक बढ़ जाता है, जिससे सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं (Microvessels) के माध्यम से आंखों तक शुद्ध रक्त और पोषण पहुंचता है। रोजाना 15 से 20 मिनट अनुलोम-विलोम करने से आंखों का सूखापन दूर होता है और चश्मे का नंबर भी धीरे-धीरे कम होने लगता है। इसके साथ ही, भ्रामरी प्राणायाम से निकलने वाली तरंगें आंखों और मस्तिष्क की थकान को पूरी तरह मिटा देती हैं।
आहार और जीवनशैली में बदलाव भी आंखों की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गर्मियों में शरीर में पानी की कमी (डीहाइड्रेशन) होने से आंखों में आंसू बनने की प्रक्रिया धीमी हो जाती है, जो सूखेपन को और बढ़ा देती है। इसलिए दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी, नारियल पानी, गन्ने का रस या बेल का शरबत पीना चाहिए। बाबा रामदेव के अनुसार, आंखों की ठंडक के लिए ताजी लौकी (दूधी) का रस पीना या रात को बादाम भिगोकर सुबह उसे मिश्री और सौंफ के साथ पीसकर खाना बेहद गुणकारी होता है। यह मिश्रण आंखों के रेटिना को पोषण देता है और कंप्यूटर या मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली हानिकारक ब्लू लाइट के दुष्प्रभावों को बेअसर करने में मदद करता है।
गर्मियों में जब आप तेज धूप में बाहर निकलते हैं, तो सीधे तौर पर गर्म हवाएं आपकी आंखों की प्राकृतिक नमी को सोख लेती हैं। इससे बचने के लिए हमेशा यूवी प्रोटेक्टिव चश्मे (सनग्लासेस) का प्रयोग करना चाहिए। कंप्यूटर पर लंबे समय तक काम करने वाले लोगों को हर 20 मिनट में अपनी पलकों को जानबूझकर झपकाना चाहिए और थोड़ी देर के लिए दूर की वस्तुओं को देखना चाहिए। काम के बीच में ब्रेक लेकर अपनी दोनों हथेलियों को आपस में रगड़कर गर्म करें और फिर आंखें बंद करके हथेलियों की इस ऊष्मा से आंखों की सिकाई करें, जिसे योग में 'पामिंग' क्रिया कहा जाता है। यह क्रिया आंखों के लिपिड ग्लैंड्स को सक्रिय करती है जिससे आंखों का प्राकृतिक स्राव ठीक बना रहता है।
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